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बोलने के लिए कम समय मिलने से नाखुश अभय चौटाला
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हरियाणा सरकार की तीन दिवसीय प्री-बजट बैठकों के पहले दिन इनेलो विधायक अभय चौटाला कड़े तेवरों में दिखे। बोलने के लिए कम समय मिलने से नाखुश चौटाला ने बैठकों को खानापूर्ति करार दिया। एक विभाग पर बोलने के लिए दो से पांच मिनट के समय को उन्होंने कम बताया और कहा कि सरकार को प्री-बजट बैठकें कम से कम दो-तीन महीने पहले करनी चाहिए थीं। एक विभाग पर कम से कम एक दिन चर्चा होती तो बेहतर रहता। सरकार अपनी पसंद के ही सुझाव ले रही है। बजट की किताबें छप चुकी हैं, अब बैठकों का कोई औचित्य नहीं बनता। यह समय और पैसे की बर्बादी है। अभय ने कहा कि क्या सरकार विधायकों के सुझावों को शामिल करते हुए दोबारा से बजट दस्तावेज प्रकाशित करवाएगी। सरकार केवल दिखावे के लिए केंद्र सरकार की तर्ज पर प्री-बजट बैठकें कर रही है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था में किस तरह सुधार लाया जाए, रोजगार के साधन कैसे विकसित करें, किसान की आर्थिक हालत में कैसे सुधार हो, शिक्षा में किस तरह गुणवत्ता लाई जाए और किन मदों में कितनी राशि प्रस्तावित करें, पीने के पानी की समस्या को किस तरह किन योजनाओं के तहत सुधारा जाए और कितने रुपये इसके लिए प्रस्तावित हों। ये सब बजट में होना चाहिए। गठबंधन सरकार का ध्येय जनता के पैसे को मौज-मस्ती के लिए खर्च करना ही है। प्री-बजट बैठक में प्रदेश के कर्ज पर भी चर्चा होनी चाहिए।
बॉक्स
अभय ने ये सुझाव देने की कोशिश की
. धान की जगह बागवानी को प्रोत्साहित करने के लिए उन्होंने सुझाव देने की कोशिश की, लेकिन कम समय में कोई ज्यादा सुझाव नहीं दे पाए।
. कृषि विश्वविद्यालय में किसान की फसल की पैदावार बढ़ाने को लेकर शोध होना चाहिए
. बजट के लिए सकारात्मक सुझाव कम से कम दो-तीन माह पहले विधायकों से मौखिक या लिखित रूप में लें
. पिछले वर्ष के बजट में प्रत्येक मद में कुल कितनी राशि प्रस्तावित की गई थी और उसमें कितनी राशि खर्च की गई, इसकी सूची प्रत्येक विधायक को बैठक से पहले देनी चाहिए थी।
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अभय ने ये सुझाव देने की कोशिश की
. धान की जगह बागवानी को प्रोत्साहित करने के लिए उन्होंने सुझाव देने की कोशिश की, लेकिन कम समय में कोई ज्यादा सुझाव नहीं दे पाए।
. कृषि विश्वविद्यालय में किसान की फसल की पैदावार बढ़ाने को लेकर शोध होना चाहिए
. बजट के लिए सकारात्मक सुझाव कम से कम दो-तीन माह पहले विधायकों से मौखिक या लिखित रूप में लें
. पिछले वर्ष के बजट में प्रत्येक मद में कुल कितनी राशि प्रस्तावित की गई थी और उसमें कितनी राशि खर्च की गई, इसकी सूची प्रत्येक विधायक को बैठक से पहले देनी चाहिए थी।
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