फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Panchkula News ›   पीजीआई ने पहली बार 12 घंटे में किए चार किडनी ट्रांसप्लांट

पीजीआई ने पहली बार 12 घंटे में किए चार किडनी ट्रांसप्लांट

Sat, 15 Jul 2017 02:03 AM IST
Updated Sat, 15 Jul 2017 02:03 AM IST
विज्ञापन
पीजीआई ने पहली बार 12 घंटे में किए चार किडनी ट्रांसप्लांट
पीजीआई ने पहली बार 12 घंटे में चार किडनी ट्रांसप्लांट
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
लंग्स ट्रांसप्लांट के बाद पीजीआई के रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी डिपार्टमेंट ने एक और उपलब्धि हासिल कर ली है। मात्र 12 घंटे में छह ऑपरेशन कर चार मरीजों को नई जिंदगी दी है। तीन डॉक्टरों की टीम ने चार किडनी ट्रांसप्लांट किए, जो इतने कम समय में संभव नहीं है। दो दिवंगत डोनरों से पहले किडनी सुरक्षित निकाली गई। फिर चार मरीजों में ट्रांसप्लांट किए गए। इस प्रकार से कुल छह ऑपरेशन किए गए। विभाग के एचओडी डा. आशीष शर्मा ने बताया कि इससे पहले 24 घंटे में चार ऑपरेशन किए गए थे लेकिन इस बार सिर्फ12 घंटे में ही टीम ने कमाल कर दिया।
छुट्टी पर थे, इमरजेंसी कॉल आई तो पहुंच गए हास्पिटल
डॉक्टरों ने बताया कि शुक्रवार को विभाग के एचओडी डा. आशीष शर्मा और डा. दीपेश छुट्टी पर थे। सिर्फ डा. सर्वजीत ड्यूटी पर थे। शुक्रवार शाम को पता चला कि हरियाणा के कैथल और अंबाला से दो ब्रेन डेड पेशेंट आए हैं। डा. सर्वजीत ने दिवंगत डोनर और रीसिपिएंट (वह मरीज, जिनमें ट्रांसप्लांट होना था) की जांच की। सब कुछ सही निकला, लेकिन अब समस्या यह थी कि साथी डाक्टर छुट्टी पर थे। एक साथ इतने सारे आपरेशन कैसे किए जाए। डा. सर्वजीत ने इस बारे में डा. आशीष को बताया। उन्होंने तत्काल छुट्टी रद्द कर पीजीआई पहुंचने की बात कही। साथ ही डा. दीपेश भी छुट्टी रद्द कर पीजीआई पहुंच गए। ऑपरेशन की सभी तैयारियां डॉ. सर्वजीत ने कर रखी थी। शुक्रवार सुबह साढ़े सात बजे आपरेशन शुरू किया गया और रात आठ बजे तक जाकर ऑपरेशन खत्म हुआ।
विज्ञापन


सिर्फ स्नैक्स के सहारे ओटी में रहे
12 घंटे तक आपरेशन के दौरान डाक्टर सिर्फ स्नैक्स के सहारे ओटी में रहे। तीन टीमों को एक-एक डाक्टरों ने संभाला और ऑपरेशन को अंजाम दिया। इससे न सिर्फ दिवंगत डोनरों के परिजनों की इच्छा पूरी हुई बल्कि चार उन मरीजों को नई जिंदगी मिली, जो डायलिसिस के सहारे जिंदगी बसर कर रहे थे। रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी टीम का ही कमाल है कि मात्र 14 दिन में 11 दिवंगत डोनरों से ट्रांसप्लांट किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


हरियाणा के थे दोनों दिवंगत डोनर
हरियाणा के अंबाला निवासी अवतार सिंह एक्सीडेंट में घायल हो गए थे। सिर में गंभीर चोट लगने के बाद उन्हें पीजीआई लाया गया। 11 जुलाई को उन्हें ब्रेन डेड घोषित होने के बाद उनकी किडनी और कोर्नियां सुरक्षित निकाली गईं और साथ ही दोनों किडनी ट्रांसप्लांट कर दी गई। उसके बाद दूसरे दिवगंत डोनर कुलदीप सिंह जो अंबाला के थे, वह भी एक्सीडेंट में घायल हुए थे। ब्रेन डेड होने के बाद उनकी दोनों किडनी, लिवर और दो कोर्निया सुरक्षित निकाली गईं। दोनों किडनियों को रीनल ट्रांसप्लांट की टीम ने ट्रांसप्लांट किए।


कोट
इसमें दिवंगत डोनर के परिजनों की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। ऐसे मुश्किल वक्त में इतने मजबूत फैसले लेना किसी भी साहस से कम नहीं है। साथ ही पीजीआई डाक्टरों और स्टाफ के समपर्णता को मैं सलाम करता हूं कि वे बिना वक्त गंवाए 12 घंटे तक ओटी में रहे और मरीजों को नया जीवन दिया।
डा. विपिन कौशल, नोडल आफिसर रोटो पीजीआई
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed