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249 बर्खास्त आंगनवाड़ी सहायिकाएं बहाल
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चंडीगढ़। महिला एवं बाल विकास विभाग ने हड़ताल पर जाने वाली 16 जिलों की बर्खास्त 249 आंगनवाड़ी सहायिकाओं को बहाल कर दिया है। तलाकशुदा और विधवा कर्मियों को तवज्जो दी गई है। अन्य सहायिकाओं की बहाली के लिए भी फाइल चला दी गई है।
विभाग की निदेशक हेमा शर्मा ने बताया कि सभी जिला कार्यक्रम अधिकारियों को बहाल सहायिकाओं को विभागीय प्रक्रिया पूरी कर ड्यूटी ज्वाइन करवाने के आदेश दिए गए हैं। भिवानी में 24, चरखी दादरी में 17, फरीदाबाद में 3, फतेहाबाद में 7, गुरुग्राम में 3, हिसार में 13, जींद में 19, कैथल में 14, करनाल में 72, महेंद्रगढ़ में 3, पानीपत में 1, रेवाड़ी में 34, रोहतक में 11, सिरसा में 5, सोनीपत में 2 और यमुनानगर में 21 सहायिकाओं को बहाल किया गया है।
नवंबर 2021 में मांगों को लेकर ये कर्मचारी हड़ताल पर चली गई थीं। बीते 29 दिसंबर को मुख्यमंत्री मनोहर लाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री कमलेश ढांडा ने विभिन्न यूनियनों के साथ बैठक कर अनेक निर्णय लिए थे। बावजूद इसके कुछ यूनियन ने हड़ताल को खत्म करने की बजाय जनवरी से अप्रैल के पहले सप्ताह तक चलाया। निरंतर जोखिम श्रेणी में आने वाले वर्ग से संबंधित योजनाओं में अवरोध उत्पन्न होने पर जिला स्तर पर स्थानीय प्रशासन ने नोटिस देते हुए बड़े स्तर पर कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बर्खास्त कर दिया था।
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एफआईआर, अदालती मामलों की रिपोर्ट मंगवाई : ढांडा
महिला एवं बाल विकास मंत्री कमलेश ढांडा ने कहा, मुख्यमंत्री मनोहर लाल चाहते हैं कि गर्भवती महिलाओं, दूध पिलाने वाली माताओं और नवजात बच्चों के पोषण एवं अन्य लक्ष्यों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं की चिंताओं का निवारण किया जाए। हड़ताल के दौरान दर्ज एफआईआर और अदालत में पहुंचे मामलों को लेकर जिला कार्यक्रम अधिकारियों से रिपोर्ट मंगवाई है। केस के आधार पर उनका निवारण किया जाएगा।
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विभाग की निदेशक हेमा शर्मा ने बताया कि सभी जिला कार्यक्रम अधिकारियों को बहाल सहायिकाओं को विभागीय प्रक्रिया पूरी कर ड्यूटी ज्वाइन करवाने के आदेश दिए गए हैं। भिवानी में 24, चरखी दादरी में 17, फरीदाबाद में 3, फतेहाबाद में 7, गुरुग्राम में 3, हिसार में 13, जींद में 19, कैथल में 14, करनाल में 72, महेंद्रगढ़ में 3, पानीपत में 1, रेवाड़ी में 34, रोहतक में 11, सिरसा में 5, सोनीपत में 2 और यमुनानगर में 21 सहायिकाओं को बहाल किया गया है।
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नवंबर 2021 में मांगों को लेकर ये कर्मचारी हड़ताल पर चली गई थीं। बीते 29 दिसंबर को मुख्यमंत्री मनोहर लाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री कमलेश ढांडा ने विभिन्न यूनियनों के साथ बैठक कर अनेक निर्णय लिए थे। बावजूद इसके कुछ यूनियन ने हड़ताल को खत्म करने की बजाय जनवरी से अप्रैल के पहले सप्ताह तक चलाया। निरंतर जोखिम श्रेणी में आने वाले वर्ग से संबंधित योजनाओं में अवरोध उत्पन्न होने पर जिला स्तर पर स्थानीय प्रशासन ने नोटिस देते हुए बड़े स्तर पर कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बर्खास्त कर दिया था।
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एफआईआर, अदालती मामलों की रिपोर्ट मंगवाई : ढांडा
महिला एवं बाल विकास मंत्री कमलेश ढांडा ने कहा, मुख्यमंत्री मनोहर लाल चाहते हैं कि गर्भवती महिलाओं, दूध पिलाने वाली माताओं और नवजात बच्चों के पोषण एवं अन्य लक्ष्यों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं की चिंताओं का निवारण किया जाए। हड़ताल के दौरान दर्ज एफआईआर और अदालत में पहुंचे मामलों को लेकर जिला कार्यक्रम अधिकारियों से रिपोर्ट मंगवाई है। केस के आधार पर उनका निवारण किया जाएगा।