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डेढ़ महीना से वेतन नहीं मिला दिव्यांग काउंटर क्लकोऱं् को
Updated Tue, 11 Sep 2018 05:36 AM IST
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(सर, दिव्यांगों की फोटो ट्रैक में सेव है)
साहब। डेढ़ महीने से वेतन नहीं मिला, घर का खर्च कैसे चलाएं
12 दिव्यांग काउंटर क्लर्कों ने प्रेस के माध्यम से ट्रैफिक पुलिस और चंडीगढ़ प्रशासन को सुनाया दुखड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
ट्रैफिक पुलिस चंडीगढ़ और प्रशासन 12 दिव्यांग काउंटर क्लर्कों की सुध लेने को तैयार नहीं है। यह बारह काउंटर क्लर्क प्रीपेड ऑटो रिक्शा बुकिंग बूथ पर काम करते हैं। इन्हें पिछले डेढ़ महीने से वेतन नहीं मिला है। इन काउंटर क्लर्कों में परवीन, बलविंदर, जगदीश, रामपाल, परमजीत, राजिंदर, सहदेव शर्मा, बंटी, सुरेश, अनुज, मुकेश, रिजवान का कहना है कि उनकी मुश्किलें हर रोज बढ़ रही हैं। ये दिव्यांग रविवार को सेक्टर-27 स्थित प्रेस क्लब पहुंचे थे। यहां उन्होंने पत्रकार वार्ता की। उन्होंने कहा कि यदि हमारी मांगें नहीं मानीं गई तो वह भूख हड़ताल करेंगे। इसी काउंटर क्लर्क की बेस पर हमारी शादियां हुईं हैं। अब हम सभी परिवार वाले हैं। ऐसे में बिना वेतन घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन हमें किसी भी दूसरे विभाग में शिफ्ट कर हमें उजड़ने से बचा लें। हम सभी पढ़े लिखे हैं। वहीं, सुरेश कुमार ने कहा कि वे काम करते-करते ग्रेजुएट हो गए हैं। सभी लोग 70 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग हैं। शहदेव शर्मा तो शत प्रतिशत दिव्यांग हैं। ये काउंटर क्लर्क सेक्टर-17, 43, 22, पीजीआई, न्यू ओपीडी पीजीआई, सुखना लेक, रॉक गार्डन पर स्थित प्रीपेड ऑटो रिक्शा बुकिंग बूथ पर तैनात हैं। बलविंदर ने बताया कि वह प्रशासन वे गुहार लगाते हैं कि प्रीपेड ऑटो रिक्शा बुकिंग बूथ के 12 दिव्यांगों की 15 वर्षों की मेहनत और इमानदारी पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि तत्कालीन राज्यपाल जेएफआर जैकब व एसएसपी अमिताभ ढिल्लो से 2003 में मिली सेवा से विमुख न करें। उन्होंने बताया कि हमारा रोजाना का मेहनताना जो कि 45 दिन से रुका हुआ है, वह उन्हें मुहैया करवाया जाए। प्रेसवार्ता के दौरान दिव्यांग काउंटर क्लर्कों ने बताया कि 2003 में 101 उसके बाद 2011 में 150 सैलरी मिलती थी, जिसमें से 3 दिन के अवकाश के पैसे काट लिए जाते थे इसके अलावा न हमारा कोई पीएफ या ईएसआई कुछ भी नहीं है। हम सभी दिव्यांग कहां जाएं। अब हमारा 387 रुपये 50 पैसे प्रतिदिन की दिहाड़ी है, जबकि डीसी रेट पर क्लर्क का रोजाना 520 रुपये है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार से यही मांग है कि डीसी रेट के हिसाब से हमें रोजाना भत्ता मिले और हमारी सेवाएं नियमित की जाएं।
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साहब। डेढ़ महीने से वेतन नहीं मिला, घर का खर्च कैसे चलाएं
12 दिव्यांग काउंटर क्लर्कों ने प्रेस के माध्यम से ट्रैफिक पुलिस और चंडीगढ़ प्रशासन को सुनाया दुखड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
ट्रैफिक पुलिस चंडीगढ़ और प्रशासन 12 दिव्यांग काउंटर क्लर्कों की सुध लेने को तैयार नहीं है। यह बारह काउंटर क्लर्क प्रीपेड ऑटो रिक्शा बुकिंग बूथ पर काम करते हैं। इन्हें पिछले डेढ़ महीने से वेतन नहीं मिला है। इन काउंटर क्लर्कों में परवीन, बलविंदर, जगदीश, रामपाल, परमजीत, राजिंदर, सहदेव शर्मा, बंटी, सुरेश, अनुज, मुकेश, रिजवान का कहना है कि उनकी मुश्किलें हर रोज बढ़ रही हैं। ये दिव्यांग रविवार को सेक्टर-27 स्थित प्रेस क्लब पहुंचे थे। यहां उन्होंने पत्रकार वार्ता की। उन्होंने कहा कि यदि हमारी मांगें नहीं मानीं गई तो वह भूख हड़ताल करेंगे। इसी काउंटर क्लर्क की बेस पर हमारी शादियां हुईं हैं। अब हम सभी परिवार वाले हैं। ऐसे में बिना वेतन घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन हमें किसी भी दूसरे विभाग में शिफ्ट कर हमें उजड़ने से बचा लें। हम सभी पढ़े लिखे हैं। वहीं, सुरेश कुमार ने कहा कि वे काम करते-करते ग्रेजुएट हो गए हैं। सभी लोग 70 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग हैं। शहदेव शर्मा तो शत प्रतिशत दिव्यांग हैं। ये काउंटर क्लर्क सेक्टर-17, 43, 22, पीजीआई, न्यू ओपीडी पीजीआई, सुखना लेक, रॉक गार्डन पर स्थित प्रीपेड ऑटो रिक्शा बुकिंग बूथ पर तैनात हैं। बलविंदर ने बताया कि वह प्रशासन वे गुहार लगाते हैं कि प्रीपेड ऑटो रिक्शा बुकिंग बूथ के 12 दिव्यांगों की 15 वर्षों की मेहनत और इमानदारी पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि तत्कालीन राज्यपाल जेएफआर जैकब व एसएसपी अमिताभ ढिल्लो से 2003 में मिली सेवा से विमुख न करें। उन्होंने बताया कि हमारा रोजाना का मेहनताना जो कि 45 दिन से रुका हुआ है, वह उन्हें मुहैया करवाया जाए। प्रेसवार्ता के दौरान दिव्यांग काउंटर क्लर्कों ने बताया कि 2003 में 101 उसके बाद 2011 में 150 सैलरी मिलती थी, जिसमें से 3 दिन के अवकाश के पैसे काट लिए जाते थे इसके अलावा न हमारा कोई पीएफ या ईएसआई कुछ भी नहीं है। हम सभी दिव्यांग कहां जाएं। अब हमारा 387 रुपये 50 पैसे प्रतिदिन की दिहाड़ी है, जबकि डीसी रेट पर क्लर्क का रोजाना 520 रुपये है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार से यही मांग है कि डीसी रेट के हिसाब से हमें रोजाना भत्ता मिले और हमारी सेवाएं नियमित की जाएं।