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बजट 2019 से नाखुश हैं शहरी किसान, बोले- सरकार कहती कुछ है करती कुछ, महंगा हो गया सब

Sat, 06 Jul 2019 10:40 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sat, 06 Jul 2019 10:40 AM IST
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union budget 2019 not beneficial for urban farmers, agricultural equipments rates hiked
फाइल फोटो
बजट से चंडीगढ़ के किसान नाखुश हैं। चंडीगढ़ से सटे गांवों के किसानों का कहना है कि बजट में उनकी तरफ ध्यान नहीं दिया गया। खाद बीज से लेकर कृषि उपकरणों के कीमतों में बढ़ोतरी होगी। सरकार कहती कुछ है और करती कुछ और। बड़े वादे किए, लेकिन किसानों के हाथ में कुछ नहीं लगने वाला। किसानों के खाते में छह हजार रुपये डाले, लेकिन डीजल और पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी किसानों की कमर तोड़ेगा।
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हफ्ते तक ट्यूबवेल की खराबी ठीक होती
चंडीगढ़ के किसानों को नहरी पानी नहीं सरकारी ट्यूबवेल का ही केवल सहारा है। ट्यूबवेल खराब होने पर फसल खराब होना निश्चित है। हफ्ता तक ट्यूबवेल की खराबी ठीक नहीं होती। सिंचाई के लिए प्रशासन के पब्लिक हेल्थ और भगवान का सहारा है। सरकार तो यह भी ठीक नहीं करती।
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-दलबीर सिंह, किसान

डीजल पर सेस बढ़ाना सही नहीं
गरमी में तो काफी अधिक परेशानी होती है। बारिश की कमी के कारण खेती अभी तक शुरू नहीं हुआ है। टयूबवेल खराब होने पर उसे समय पर ठीक हो तो बेहतर होगा। साथ ही सरकार को डीजल पर सेस नहीं बढ़ाना चाहिए था। सेस बढ़ाने से ट्रांसपोर्ट का महंगा होना निश्चित है। एक राज्य से दूसरे राज्य तक सामान लेकर आना जाना महंगा होगा।
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-संजीव अत्री, किसान

 

किसान और आम आदमी को लाभ नहीं
मेरे समझ से बजट जीरो है। जिस बजट से आम आदमी और किसान को लाभ नहीं है, उसका क्या लाभ। खेती में अब कोई फायदा नहीं है, लेकिन क्या करें। कर भी क्या सकते हैं। डीजल के महंगा होने से किसानों की परेशानी बढ़ना लाजिमी है। सरकार इस बात को नहीं समझ पाई। किसानों को कोई नहीं समझता। किसान अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
- हरदीप सिंह, किसान

फसल के मरने से हमारे सपने मरते हैं
किसानों की खेतों में समय पर पानी ही पहुंच जाए तो हमारी हालत ठीक हो जाएगी। हालत तब खराब होती है जब फसल तैयार होने को होती है और ट्यूबवेल जवाब देती है या खराब होती है तो फसलें भी खराब होती है। फसलों का मर जाना हमारे सपनों को मर जाने के बराबर है। किसान अपने खेतों में लहलहाती फसलों को देखकर सपने बुुनता है।
- राकेश शर्मा, किसान

बजट केवल दिखावा
कोई लाभ नही है जी इस बजट से। केवल दिखावा है। बड़े लोगों को फायदा है। महंगाई पर कोई लाभ नहीं है। डीजल पर कीमत बढ़ाने का मतलब है माल ढुलाई का भाड़ा बढ़ जाना। साथ ही जब माल ढुलाई बढ़ेगा तो किसान के सामान जिसमें खाद, बीज और कृषि उपकरणों की कीमतें भी बढ़ जाएगी। और इसका मार किसानों पर पड़ेगा। यह बजट दिखावा है।
- जरनैल सिंह, किसान
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