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पंचकूलाः अब सूखे कचरे से खुद भी बना सकेंगे खाद, विदेश में सीखा वेस्ट मैनेजमेंट और देश में इंप्लीमेंट

Thu, 04 Jul 2019 09:56 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अवधेश शुक्ला, अमर उजाला, पंचकूला
अवधेश शुक्ला, अमर उजाला, पंचकूला Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Thu, 04 Jul 2019 09:56 AM IST
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solid waste management, compost making by using dry waste
वेस्ट मैनेजमेंट की जानकारी देती लड़की - फोटो : अमर उजाला
कहावत है कि शिक्षा और हुनर कभी बेकार नहीं जाती है। शहर की एक बेटी ने इसी को सच कर दिखाया है। लंदन में आर्किटेक्ट की पढ़ाई करके अपने देश लौट आई, लेकिन उसका झुकाव हमेशा वेस्ट मैनेजमेंट की तरफ था। क्योंकि वह अपने देश को इस कलंक से मुक्ति दिलाना चाहती थी। बस फिर क्या था सोच को हकीकत में बदलने में जुट गई और उस सपने को साकार कर दिखाया।’ हम बात कर रहे हैं मुस्कान अग्रवाल की, जोकि इसी शहर के एक प्रसिद्ध उद्योगपति की बेटी है।
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उसने लंदन में वेस्ट मैनेजमेंट पर खूब रिसर्च किया और सफलता को हासिल किया। अब वह अपनी तकनीक का प्रयोग शहर में कर रही है। मुस्कान अब घर और होटल से निकलने वाले कचरे से खाद बनाकर पेड़ और पौधों एवं लॉन को खूबसूरत बनाने में जुटी है। मुस्कान अग्रवाल सेक्टर-9 निवासी अजय अग्रवाल की बेटी हैं। मुस्कान ने अमर उजाला से विशेष मुलाकात में बताया कि वह दो साल पहले लंदन में वेस्ट मैनेजमेंट सीख कर लौटी थीं। लेकिन हाल ही में नगर निगम पंचकूला द्वारा बड़ी संख्या में कचरा पैदा करने वालों को निर्देश दिए गए थे कि वह अपने कचरे का खुद निस्तारण करें। कचरे से खाद बनाए और उसका प्रयोग करें।
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निगम के इस नोटिस के बाद जहां कुछ होटल प्रबंधक कचरे के प्रबंधन को तैयार करने में जुट गए, वहीं सेक्टर-5 स्थित पल्लवी होटल और सेक्टर-16 स्थित पल्लवी रेस्टोरेंट के मालिक अजय अग्रवाल की बेटी मुस्कान अग्रवाल कचरे के निस्तारण में जुट गई। वर्तमान में मुस्कान अपने घर व होटल से निकलने वाले कचरे से खाद बनाकर पौधों एवं घास की लाइफ को बढ़ाने का काम कर रही हैं। उसकी इस पहल ने शहर के अन्य बड़े व्यवसायियों को हैरान कर दिया है और उन्होंने भी अब इस तरह कदम बढ़ाने का फैसला कर लिया है।
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बस 15 हजार रुपये आएगी लागत

कूड़े से खाद बनाने के लिए बस एक बार 15 हजार रुपये खर्च करने होंगे। इसके बाद वे खाद का प्रयोग घर के लॉन आदि में कर सकते हैं। मुस्कान ने बताया कि सबसे पहले उसने घर में यह एक्सपेरिमेंट किया था। खाद बनाने के लिए उसने दो डिब्बे घर में रखे थे, उसमें पहले खाद गीली थी। जिसके बाद उसे सूखाने के लिए धूप में रख दिया। अच्छी खाद बन गई। मुस्कान ने बताया कि होटल से निकलने वाले सूखे कचरे से खाद बनाने के लिए उन्होंने दो बीन्स तैयार करवाए हैं। जिस पर करीब 32 हजार रुपये का खर्च आया है।

अब खाद बनाने में उन्हें प्रत्येक माह मात्र 300 से 400 रुपये खर्च करने पड़ रहे है। वह खाद बनाने के लिए नारियल का बुरादा और एक्सीलेटर खरीदती हैं। इन्हें मिक्स करके सूखे कचरे में डाला जाता है। इसके बाद बीन्स को 15 से 20 दिन के लिए बंद कर दिया जाता है और सूखा कचरा खुद ही खाद में तबदील हो जाता है। उन्होंने बताया कि इन बीन्स को एक से दूसरे स्थान पर भी ले जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि सेक्टर-23 में कचरे का ढेर बढ़ता जा रहा है, इसलिए सभी को प्रयास करना होगा कि मिलकर घर या व्यावसायिक स्थानों पर खाद बनाने लगे तो इस तरह के कचरे के ढेरों से बचा जा सकता है।

 

खाद बनाने के दौरान ये बरते सावधानी

मुस्कान ने बताया कि खाद बनाने के दौरान कुछ सावधानी बरतने की भी जरूरत है। वह बीन्स में केवल आलू, गोभी, प्याज और अंडे के ही छिलके डालें। यदि गीली सब्जी या भोजन डाल दिया जाएगा तो खाद नहीं बनेगी। इसलिए रसोई में प्रयोग होने वाली सब्जियों का सूखा छिलका ही डालें।

उन्होंने बताया कि इस बीन्स में एक टूटी भी लगी हो। जब गर्मी से कचरा पानी छोड़ता है तो वह पानी इसी टूटी के माध्यम से बाहर निकलता है। इसके अलावा इसमें एक गैस पाइप भी है, जिससे जैसे-जैसे कचरा खाद में तबदील होगा तो गैस बनेगी और वह गैस इसी पाइप के जरिए बाहर निकलेगी।

खाद से बना सकते हैं खाद
मुस्कान ने बताया कि उन्होंने लंदन में आर्किटेक्ट की पढ़ाई की है, लेकिन उनका रुझान सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की तरफ था। इसी का परिणाम है कि आज उन्होंने घर में खाद बनाना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि लोग इस बीन्स के जरिए खाद से खाद बना सकते हैं और प्रतिमाह तीन से चार सौ रुपये का आने वाला खर्च भी बचा सकते हैं। उन्होंने बताया कि वैसे भी एनजीटी के निर्देश पर नगर निगम अधिकारी नोटिस जारी कर बड़े कारोबारियों को कचरे से खाद बनाने का आदेश दे चुके हैं। यदि कोई आदेश का उल्लंघन करता है तो एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
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