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पौधों का घुट रहा है दम, कहां सो रहे हैं हम
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स को पर्यावरण बचाने का संदेश दे रहा है, लेकिन खुद की हरियाली को संकट में डाल रहा है। 300 से अधिक पेड़ों की जड़ों में पत्थर व कंक्रीट डाल दिया गया। इस वजह सेपेड़ खुलकर सांस नहीं ले पा रहे हैं। पर्यावरण प्रेमियों मुताबिक अगर यही हाल रहा तो अगले एक दशक में पेड़ सूख जाएंगे।
पीयू में 156 से अधिक पेड़ों की प्रजातियां हैं। कुल पेड़ों की संख्या 4000 से अधिक है। 60 फीसदी से अधिक पेड़ों पर दीमक ने हमला बोल दिया है। 50 से अधिक पेड़ सूख गए हैं। बाकी सूखने के कगार पर हैं। इसके अलावा पेड़ों को मारने के लिए और तरीके अपनाए गए हैं। गेट नंबर एक से लेकर मार्केट तक व एडमिन ब्लॉक के आसपास के पेड़ों की जड़ों में पत्थर डाल दिए गए और उनकी पुताई कर दी गई जबकि एनजीटी के नियमों के मुताबिक दो तीन फीट तक पेड़ के पत्थर या कंक्रीट नहीं लगाए जा सकते। पत्थर लगाने से इन पेड़ों की टहनियां भी सूखने लगी हैं। समाज शास्त्र के प्रोफेसर विनोद कुमार चौधरी समेत कई पर्यावरण प्रेमियों में आक्रोश है। उनका कहना है कि ग्रीन बेल्ट में पेड़ों के चारों ओर लगाई जा रही ईंटों का विरोध किया तो काम रुका, लेकिन कंक्रीट हटाया नहीं जा रहा है। जल्द ही इसके लिए वीसी प्रो. राजकुमार से मिलेंगे। नगर निगम जिस तरह पेड़ों के चारों ओर कंक्रीट हटवाने का काम कर रहा है। उसी तरह पीयू भी अपने परिसर में वह काम करे ताकि हरियाली को बचाया जा सके।
इनसेट---
सड़क भी पेड़ों के सूखने का कारण
पीयू में चारों ओर सड़कें बनाई गई हैं। गांधी भवन से लेकर लॉ डिपार्टमेंट तक बनाई गई सड़क के कारण कई पेड़ सूख गए। कुछ दीमक ने सुखा दिए। लॉ विभाग से स्पोर्ट्स विभाग के चौक कई पेड़ और सूख गए हैं। इसकी खबर पीयू प्रशासन को नहीं है। हैरत तो ये है कि हर साल लाखों रुपये हरियाली के नाम पर खर्च हो रहा है, लेकिन जो पेड़ लगे हैं उन्हें बचाने में पीयू प्रशासन फेल हो रहा है। इस ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।
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पीयू में 156 से अधिक पेड़ों की प्रजातियां हैं। कुल पेड़ों की संख्या 4000 से अधिक है। 60 फीसदी से अधिक पेड़ों पर दीमक ने हमला बोल दिया है। 50 से अधिक पेड़ सूख गए हैं। बाकी सूखने के कगार पर हैं। इसके अलावा पेड़ों को मारने के लिए और तरीके अपनाए गए हैं। गेट नंबर एक से लेकर मार्केट तक व एडमिन ब्लॉक के आसपास के पेड़ों की जड़ों में पत्थर डाल दिए गए और उनकी पुताई कर दी गई जबकि एनजीटी के नियमों के मुताबिक दो तीन फीट तक पेड़ के पत्थर या कंक्रीट नहीं लगाए जा सकते। पत्थर लगाने से इन पेड़ों की टहनियां भी सूखने लगी हैं। समाज शास्त्र के प्रोफेसर विनोद कुमार चौधरी समेत कई पर्यावरण प्रेमियों में आक्रोश है। उनका कहना है कि ग्रीन बेल्ट में पेड़ों के चारों ओर लगाई जा रही ईंटों का विरोध किया तो काम रुका, लेकिन कंक्रीट हटाया नहीं जा रहा है। जल्द ही इसके लिए वीसी प्रो. राजकुमार से मिलेंगे। नगर निगम जिस तरह पेड़ों के चारों ओर कंक्रीट हटवाने का काम कर रहा है। उसी तरह पीयू भी अपने परिसर में वह काम करे ताकि हरियाली को बचाया जा सके।
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इनसेट---
सड़क भी पेड़ों के सूखने का कारण
पीयू में चारों ओर सड़कें बनाई गई हैं। गांधी भवन से लेकर लॉ डिपार्टमेंट तक बनाई गई सड़क के कारण कई पेड़ सूख गए। कुछ दीमक ने सुखा दिए। लॉ विभाग से स्पोर्ट्स विभाग के चौक कई पेड़ और सूख गए हैं। इसकी खबर पीयू प्रशासन को नहीं है। हैरत तो ये है कि हर साल लाखों रुपये हरियाली के नाम पर खर्च हो रहा है, लेकिन जो पेड़ लगे हैं उन्हें बचाने में पीयू प्रशासन फेल हो रहा है। इस ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।
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