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जंगलात विभाग की टीम को जबरी रोकने वालों खिलाफ मामला दर्ज
Updated Sun, 08 Jul 2018 10:12 PM IST
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टांडा उड़मुड (होशियारपुर)। गांव गंदोवल के पास पड़ती वन-विभाग की जमीन की निशानदेही करने गई विभाग की टीम को उक्त जमीनों पर काबिज लोगों ने रोक दिया। उक्त लोगों के खिलाफ टांडा पुलिस ने सरकारी ड्यूटी में बाधा डालने और सरकारी जमीन पर कब्जा करने का मामला दर्ज किया है। पुलिस ने यह मामला वनरेंज अफसर दसूहा की शिकायत पर हरबंस सिंह निवासी रडा, बलजीतसिंह, कश्मीर सिंह दोनों निवासी फत्ता कुल्ला, कुलदीप सिंह निवासी टाहली, दिलबाग सिंह, तरसेम सिंह निवासी रड़ा मंड, भजनसिंह निवासी गंदोवाल और एक अज्ञात के खिलाफ दर्ज किया है। पुलिस को दी शिकायत में वनरेंज अफसर दसूहा ने बताया कि जंगलात विभाग की टीम माल महकमे और पुलिस टीम के साथ 20 जून को गंदोवल के सरकारी जंगल की जमीन की निशानदेही करवाने गए थे लेकिन वहां लगभग 60 व्यक्ति और लगभग 20 औरतों ने उन्हें रोक लिया। माहौल खराब न हो इसलिए टीम वापस आ गई थी। आरोपियों ने सरकारी ड्यूटी में बाधा डालने के साथ-साथ सरकारी जमीन पर कब्जा भी किया हुआ है। पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है ।
यह है मामला
दरिया ब्यास के पास पड़ते गांवों के लोगों को सरकार की ओर से 40-45 वर्ष पहले बंजर पड़ी जमीन आबादकारों को आबाद करने के लिए दी गई थी। इनकी गिरदावरी भी इन लोगों के नाम चलती आ रही थी। इन आबादकारों ने इन जमीनों में अपने घर बनाए हुए हैं और बिजली मोटरों का कनेक्शन भी लिया हुआ है। उनके परिवारों का पालन-पोषण इन जमीनों से चलता आ रहा है। सरकार की ओर से यह सारी गिरदावरियां वर्ष 2013 में बिना नोटिस दिए तोड़ दी गई और सरकार ने इन आबादकारों को उजाड़ने का प्लान बनाकर इन जमीन की निशानदेही करवाकर उस पर वन विभाग का कब्जा करवाना चाहा। जब वन-विभाग की टीम माल महकमे के साथ गांव गंदोवल में निशानदेही करने के लिए पहुंची तो उक्त लोगों ने उनका विरोध किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते टीम के कार्य में बाधा डाली। लोगों का कहना है कि सरकार की ओर से यह जमीन उन्हें अलाट की गई थी। इन परिवारों ने पूरी मेहनत से इस बंजर जमीन को जरखेज बनाया था। सरकार की ओर से ऐसे ही मनमानी की गई तो हम इस संघर्ष को किसी भी हद तक ले जाने को मजबूर होंगे।
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यह है मामला
दरिया ब्यास के पास पड़ते गांवों के लोगों को सरकार की ओर से 40-45 वर्ष पहले बंजर पड़ी जमीन आबादकारों को आबाद करने के लिए दी गई थी। इनकी गिरदावरी भी इन लोगों के नाम चलती आ रही थी। इन आबादकारों ने इन जमीनों में अपने घर बनाए हुए हैं और बिजली मोटरों का कनेक्शन भी लिया हुआ है। उनके परिवारों का पालन-पोषण इन जमीनों से चलता आ रहा है। सरकार की ओर से यह सारी गिरदावरियां वर्ष 2013 में बिना नोटिस दिए तोड़ दी गई और सरकार ने इन आबादकारों को उजाड़ने का प्लान बनाकर इन जमीन की निशानदेही करवाकर उस पर वन विभाग का कब्जा करवाना चाहा। जब वन-विभाग की टीम माल महकमे के साथ गांव गंदोवल में निशानदेही करने के लिए पहुंची तो उक्त लोगों ने उनका विरोध किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते टीम के कार्य में बाधा डाली। लोगों का कहना है कि सरकार की ओर से यह जमीन उन्हें अलाट की गई थी। इन परिवारों ने पूरी मेहनत से इस बंजर जमीन को जरखेज बनाया था। सरकार की ओर से ऐसे ही मनमानी की गई तो हम इस संघर्ष को किसी भी हद तक ले जाने को मजबूर होंगे।
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