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अबकी बार 21 पार्टियां दिखाएंगी मैदान में दम

Thu, 31 Aug 2017 01:48 AM IST
Updated Thu, 31 Aug 2017 01:48 AM IST
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अबकी बार 21 पार्टियां दिखाएंगी मैदान में दम
अबकी बार 21 पार्टियां दिखाएंगी मैदान में दम
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सुशील गंभीर
चंडीगढ़।
पंजाब यूनिवर्सिटी स्टूडेंट काउंसिल के लिए चुनावी दंगल शुरू हो गया है। इस बार छोटी-बड़ी मिलाकर कुल 21 पार्टियां मैदान में हैं। हालांकि सभी दल अकेले अपने दम पर चुनाव नहीं लड़ सकते। कुछ ऐसे हैं, जो गठबंधन से चुनाव लड़ेंगे। वहीं कुछ ऐसी पार्टियां भी हैं, जिन्होंने अकेले ही चुनावी मैदान में कूदने का फैसला किया है।
दो पार्टियां ऐसी हैं, जो दावा कर रही हैं किसी के साथ गठबंधन नहीं होगा, पहली स्टूडेंट फॉर सोसायटी (एसएफएस) और दूसरी पंजाब स्टूडेंट यूनियन ललकार (पीएसयू)। अन्य सभी दल गठबंधन पहले भी करते रहे हैं और इस बार भी कर सकते हैं। एसएफएस और पीएसयू ललकार की विचारधारा अलग होने के बावजूद कुछ विचार मिलते हैं। इसी केचलते पीएसयू ललकार ने एसएफएस को गठबंधन केलिए कहा था, लेकिन बात नहीं बनी। पीएसयू ललकार के नेता मानव के मुताबिक गठबंधन का प्रस्ताव था, लेकिन सहमती नहीं बन सकी। दोनों पार्टियां किसी अन्य से गठबंधन नहीं चाहतीं।
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एसएफएस ने उठाया फीस कम कराने के लिए किए संघर्ष का मुद्दा
पीयू की छात्र राजनीति में सक्रिय जानकार इस बात को मानकर चल रहे हैं कि इस बार दो पार्टियां सबसे बड़ी हैं। एक एनएसयूआई और दूसरी एसएफएस। एसएफएस जहां अपने चुनावी प्रचार में कह रही है कि फीस कम कराने के लिए लाठियां खाईं और पर्चे दर्ज कराए, वहीं दूसरे दल एसएफएस पर पत्थरबाज होने का आरोप लगा रहे हैं।
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सूबे में कांग्रेस सरकार का हवाला दे रहे एनएसयूआई वाले
एनएसयूआई के पास इस बार मजबूत दावा है कि पंजाब राज्य में कांग्रेस की सरकार है। एनएसयूआई कांग्रेस की ही छात्र इकाई है। लेकिन एनएसयूआई केलिए पार्टी की अंदरूनी कलह दिक्कत बन सकती है। क्योंकि इस बार एनएसयूआई केदो धड़े एक होकर चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन दोनों में गुटबाजी है। पिछले सप्ताह भी दोनों गुटों के बीच सड़क पर बवाल हुआ था।
उभरकर आ सकते हैं तीन ब्लॉक
अगर किसी एक दल की सीधे तौर पर जीत नहीं होगी, तो तीन ब्लॉक उभरकर सामने आएंगे। एक ब्लॉक होगा एनएसयूआई की अगुवाई में, दूसरा पूसू और तीसरा ब्लॉक सोई बनाएगी। यही तीन धड़े आपस में कहीं न कहीं मेल खाते हैं। क्रास वोटिंग का भी इस बार जमकर खेल होगा।

फीस और वायलेंस सबसे बड़ा मुद्दा
इस बार के चुनाव में बढ़ी हुई फीस का फैसला वापस कराना सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा है। सभी पार्टियां इस लड़ाई का क्रेडिट लेना चाहती हैं। वहीं फीस बढ़ोतरी केदौरान कैंपस में हुई हिंसा भी कुछ पार्टियों केवोट बैंक में सेंध मार कर सकती है। क्योंकि हिंसा केलिए एक-दूसरे पर आरोप लगाने का दौर कई दिनों से चल रहा है।
बॉक्स
पीयू केचुनावी मैदान में पार्टियां
- एनएसयूआई
- एसएफएस
- पूसू
- पूसू फॉर स्टूडेंट
- सोई
- इनसो
- पीएसयू ललकार
- पीपीएसओ
- जीजीएसओ
- एएसए
- आईएसए
- एबीवीपी
- एनएसओ
- एचपीएसए
- एचपीएसयू
- एचआईएमएसयू
- एचपीएसओ
- एचएसए
- पीपीएचयू
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