फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Panchkula News ›   कालिया का नाम फाइनल होते ही कैंथ बन गए बागी

कालिया का नाम फाइनल होते ही कैंथ बन गए बागी

Tue, 15 Jan 2019 01:23 AM IST
Panchkula bureau Panchkula bureau
Updated Tue, 15 Jan 2019 01:23 AM IST
विज्ञापन
कालिया का नाम फाइनल होते ही कैंथ बन गए बागी
कालिया का नाम फाइनल होते ही कैंथ बन गए बागी
विज्ञापन


भाजपा के मेयर प्रत्याशी के तौर पर राजेश कालिया ने भरा परचा

पार्टी फैसले से नाराज भाजपा पार्षद सतीश कैंथ ने भी आजाद उम्मीदवार के नाम पर नामांकन भरा


अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आखिर वही हुआ, जिसके कयास लगाए जा रहे थे। भाजपा की ओर से मेयर प्रत्याशी के लिए पार्षद राजेश कालिया का नाम फाइनल करते ही पार्षद सतीश कैंथ ने बगावत कर दी। पार्टी ने जब कालिया के नाम की घोषणा की, तब तक किसी को खबर नहीं थी कि कैंथ पार्टी लाइन से किनारा कर लेंगे। इसका खुलासा तब हुआ, जब कैंथ नामांकन भरने के लिए नगर निगम के दफ्तर पहुंचे। बताया जा रहा है कि कैथ के नामांकन में भाजपा की पार्षद फरमिला प्रस्तावक बनी हैं। उन्होंने भी भाजपा के आलाकमान के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है। इस पूरे घटनाक्रम से एक बात तो तय हो गई है कि भाजपा के अंदर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। पार्टी के अंदर गुटबाजी का कैंसर खत्म होने के बजाय बढ़ता जा रहा है। पार्टी की किरकिरी पर प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन ने कहा कि सभी पार्षद भाजपा परिवार के सदस्य हैं, जो रूठे हैं, उन्हें मना लिया जाएगा।

कैंथ क्यों बने बागी
मेयर उम्मीदवार के लिए पार्टी में चार नामों पर विचार चल रहा था। इसमें सतीश कैंथ का भी नाम शामिल था। वह साल 2015 में कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए थे। कांग्रेस कार्यकाल में वे दो बार डिप्टी मेयर भी रहे थे। रविवार को हुई बैठक में जब राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा ने सभी पार्षदों और संगठनों से अलग-अलग बातचीत की तो कैंथ को कुछ लोगों ने जानकारी दे दी कि ज्यादातर पार्षदों ने उनके ही नाम पर सहमति जताई है और कालिया का विरोध किया है। अगले दिन यानी सोमवार को मीडिया के एक वर्ग में खबर आई कि पार्षदों की राय में कालिया पिछड़ गए हैं, जबकि कालिया के नाम पर संजय गुट के 11 पार्षद और किरण गुट के छह पार्षदों ने सहमति जताई थी। इसके बाद कैंथ को भी लगा कि उनके पार्षद साथियों ने उन्हीं का नाम आगे बढ़ाया था। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि सोमवार को जब भाजपा प्रेस कांफ्रेंस में मेयर प्रत्याशी के नाम की घोषणा की करेगी तो उनका ही नाम होगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं और वे बागी बन गए।
विज्ञापन


पार्टी ने राजेश कालिया पर क्यों जताया भरोसा
राजेश कालिया भले ही पहली बार पार्षद बने हो, लेकिन पार्टी में वे काफी अनुभवी हैं। वे आरएसएस में द्वितीय वर्ष शिक्षित स्वयंसेवक हैं। एससी-एसटी मोर्चा चंडीगढ़ के दो बार अध्यक्ष रह चुके हैं। पार्टी के अनुसूचित जाति वर्ग की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे हैं। पार्टी से जुड़े आंदोलनों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है। राम जन्मभूमि आंदोलन के वक्त पर भी उन्होंने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था। वाल्मीकि समुदाय में उनकी पकड़ भी काफी मजबूत है। पार्टी का मानना है कि शहर में इस समुदाय का करीब एक लाख वोट है, जो आगामी लोकसभा चुनाव के लिए काफी मायने रखता है। ये सब बाते राजेश कालिया के पक्ष में गईं और उनके नाम पर मुहर लगाई गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


कैंथ को भाजपा के एक बड़े नेता की शह
भाजपा के संगठन से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि कैंथ को भाजपा के एक बड़े नेता की शह मिल रही है। वे लोग नहीं चाहते हैं कि पार्टी में सबकुछ ठीक रहे। पार्टी इस मुद्दे पर नजर रख रही है। पदाधिकारियों ने बताया कि पहले रूठे साथी को मनाया जाएगा। उसके बाद शह देने वाले लोगों के खिलाफ केंद्रीय संगठन को शिकायत दी जाएगी।

बीते साल भी हुई थी बगावत
गुटबाजी से भाजपा का पुराना नाता रहा है। बीते वर्ष जब मेयर देवेश मोदगिल ने नामांकन भरा था तो भाजपा की पूर्व मेयर आशा जसवाल ने भी परचा भर दिया था। हालांकि बाद में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद आशा ने अपना नाम वापस ले लिया था। उसके बाद टंडन और सांसद किरण खेर के बीच तल्खी बढ़ी, लेकिन मेयर प्रत्याशी घोषित होने से ठीक पहले दोनों ने खटास दूर की और मेयर प्रत्याशी पर एकजुट हुए।

क्या कहना है कि कैंथ का
सतीश कैंथ के मुताबिक पार्टी अध्यक्ष और सांसद जातिवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। संगठन मंत्री दिनेश कुमार से भी मुलाकात की थी। एक वर्ष से पार्टी को जो नुकसान पहुंचा रहे हैं, उन्हें मेयर पद दिया गया। 10 दिनों से चर्चा चल रही है कि वाल्मीकि समाज का वोट अधिक है। यदि वाल्मीकि समाज का अधिक वोट है तो लोकसभा चुनाव में भी टिकट इसी बिरादरी को देना चाहिए। मैं अपने स्टैंड पर कायम हूं। मैं किसी के दबाव में नहीं हूं।

कैंथ को इनका मिला समर्थन
भाजपा से बगावत करके सतीश कुमार कैंथ ने सबसे अंत में नामांकन किया। सतीश कैंथ को भाजपा पार्षद फरमिला और निर्दलीय दलीप शर्मा ने समर्थन किया है। फरमिला देवी कैंथ की प्रस्तावक बनी हैं।


अमर उजाला ने पहले ही कालिया के नाम का किया था खुलासा
भाजपा में मेयर उम्मीदवार को लेकर अमर उजाला ने पहले ही राजेश कालिया के नाम का खुलासा कर दिया था। रविवार को प्रकाशित खबर में अमर उजाला ने बताया था कि राजेश कालिया को लोहड़ी को तोहफा मिल सकता है। आखिर में भाजपा के संगठन ने कालिया के नाम पर ही मुहर लगाई।

कोट
आपस में मतभेद हो सकते हैं मनभेद नहीं। सभी पार्षद अपने हैं। कोई अगर रूठा है तो उसे मना लिया जाएगा।
संजय टंडन, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed