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Palwal News: पशु अस्पताल के हालात बदहाल, जर्जर भवन से हादसे का खतरा
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अस्पताल की छत का प्लास्टर जगह-जगह से झड़ चुका है, जबकि लेंटर से सरिए बाहर निकल आए हैं।
फोटो कैप्शन : पशु चिकित्सालय की जर्जर खिड़कियां। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजपुर झिरका। खंड के गांव पाठखोरी स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय की जर्जर हालत पशुपालकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। वर्षों पुराने इस भवन की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। अस्पताल की छत का प्लास्टर जगह-जगह से झड़ चुका है, जबकि लेंटर से सरिए बाहर निकल आए हैं। भवन में लगी खिड़कियों और दरवाजों को दीमक ने बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत या पुनर्निर्माण नहीं कराया गया तो किसी भी दिन अप्रिय घटना घट सकती है।
गांव पाठखोरी पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के लिए क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखता है। यहां बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका पशुधन पर निर्भर है। ऐसे में पशुओं के उपचार के लिए राजकीय पशु चिकित्सालय की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन अस्पताल की बदहाल स्थिति के कारण पशुपालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार बरसात के दिनों में भवन की हालत और भी खराब हो जाती है। छत से पानी टपकने लगता है तथा दीवारों में नमी आने से उनके गिरने का खतरा बढ़ जाता है। अस्पताल में आने वाले पशुपालक और कर्मचारी हर समय डर के साए में रहते हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से भवन की कोई मरम्मत नहीं कराई गई, जिससे इसकी स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है।
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ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में कई बार विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पशुपालकों का कहना है कि सरकार और प्रशासन को गांव पाठखोरी सहित क्षेत्र के अन्य राजकीय पशु चिकित्सालयों का सर्वे कराकर उनकी वास्तविक स्थिति का आकलन करना चाहिए तथा आवश्यक मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्य जल्द शुरू करवाना चाहिए।
उधर, पशुपालन विभाग के उपनिदेशक वीरेंद्र सहरावत ने स्वीकार किया कि पशु चिकित्सालय की बिल्डिंग कंडम स्थिति में है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पहले ही मुख्यालय को पत्र भेजकर अवगत कराया जा चुका है। अब दोबारा एसडीओ पशुपालन विभाग को पत्र लिखकर मामले की जांच कराई जाएगी और आवश्यक कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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फोटो कैप्शन : पशु चिकित्सालय की जर्जर खिड़कियां। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजपुर झिरका। खंड के गांव पाठखोरी स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय की जर्जर हालत पशुपालकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। वर्षों पुराने इस भवन की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। अस्पताल की छत का प्लास्टर जगह-जगह से झड़ चुका है, जबकि लेंटर से सरिए बाहर निकल आए हैं। भवन में लगी खिड़कियों और दरवाजों को दीमक ने बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत या पुनर्निर्माण नहीं कराया गया तो किसी भी दिन अप्रिय घटना घट सकती है।
गांव पाठखोरी पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के लिए क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखता है। यहां बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका पशुधन पर निर्भर है। ऐसे में पशुओं के उपचार के लिए राजकीय पशु चिकित्सालय की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन अस्पताल की बदहाल स्थिति के कारण पशुपालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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ग्रामीणों के अनुसार बरसात के दिनों में भवन की हालत और भी खराब हो जाती है। छत से पानी टपकने लगता है तथा दीवारों में नमी आने से उनके गिरने का खतरा बढ़ जाता है। अस्पताल में आने वाले पशुपालक और कर्मचारी हर समय डर के साए में रहते हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से भवन की कोई मरम्मत नहीं कराई गई, जिससे इसकी स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है।
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ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में कई बार विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पशुपालकों का कहना है कि सरकार और प्रशासन को गांव पाठखोरी सहित क्षेत्र के अन्य राजकीय पशु चिकित्सालयों का सर्वे कराकर उनकी वास्तविक स्थिति का आकलन करना चाहिए तथा आवश्यक मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्य जल्द शुरू करवाना चाहिए।
उधर, पशुपालन विभाग के उपनिदेशक वीरेंद्र सहरावत ने स्वीकार किया कि पशु चिकित्सालय की बिल्डिंग कंडम स्थिति में है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पहले ही मुख्यालय को पत्र भेजकर अवगत कराया जा चुका है। अब दोबारा एसडीओ पशुपालन विभाग को पत्र लिखकर मामले की जांच कराई जाएगी और आवश्यक कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी जाएगी।