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Palwal News: तीसरी आंख ने मूंदी पलकें, सुरक्षा में सेंध का खतरा
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नूंह और फिरोजपुर झिरका में लगाए गए 63 कैमरों में केवल 21 ही कार्यशील
26 कैमरे नूंह बस स्टैंड के निगरानी व्यवस्था से बाहर
नूंह बस स्टैंड में 17.75 लाख रुपये से लगाए गए थे 47 कैमरे
रोडवेज वर्कशॉप में लगाए गए 19 कैमरे दो साल से चालू नहीं
फिरोजपुर झिरका बस स्टैंड में लगे 16 कैमरे एक साल बाद भी चालू नहीं
फोटो - बस स्टैंड का फोटो।
रिजवान खान
नूंह। यात्रियों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए बस अड्डों पर लाखों रुपये खर्च कर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए, हालांकि यही कैमरे अब निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं। नूंह बस स्टैंड पर करीब 17.75 लाख रुपये की लागत से लगाए गए 47 कैमरों में से केवल 21 ही चालू हैं, जबकि सात कैमरे करीब छह माह से बंद पड़े हैं। इससे भी गंभीर स्थिति रोडवेज वर्कशॉप की है, जहां लगाए गए 19 कैमरे करीब दो साल से चालू नहीं हो पाए हैं।
वहीं, फिरोजपुर झिरका बस स्टैंड पर करीब 4.50 लाख रुपये की लागत से लगाए गए 16 कैमरे भी करीब एक साल बाद तक चालू नहीं हुए हैं।
नूंह मुख्यालय के बस स्टैंड पर वर्ष 2024 में करीब 17 लाख 75 हजार रुपये की लागत से 47 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इनका उद्देश्य बस स्टैंड परिसर में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखना और किसी वारदात की स्थिति में फुटेज के माध्यम से आरोपियों तक पहुंचने में मदद करना था। लेकिन, वर्तमान में 26 कैमरे निगरानी व्यवस्था से बाहर हैं।
छह माह से सात कैमरे बंद
बस स्टैंड परिसर में लगे सात कैमरे करीब छह माह से बंद बताए जा रहे हैं। इतने लंबे समय तक कैमरों का बंद रहना व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग पर सवाल खड़ा करता है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही वाले बस स्टैंड पर चोरी, स्नेचिंग, छेड़छाड़ या अन्य घटना होने की स्थिति में बंद कैमरों वाले हिस्सों की फुटेज उपलब्ध नहीं होगी। वहीं, रोडवेज वर्कशॉप में लगाए गए 19 कैमरों के दो साल से चालू नहीं होने पर सरकारी संपत्ति की सुरक्षा खतरे में है।
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नूह वर्कशॉप को लेकर कई बार डीजी ऑफिस, चंडीगढ़ को लिखित शिकायत देकर जल्द समाधान कराने की मांग की गई थी, लेकिन अभी तक वहां से कोई जवाब नहीं आया है। नूंह बस स्टैंड के सात कैमरे छह माह से बंद है, जिसके समाधान के लिए भी उच्च अधिकारियों को लिखा गया लेकिन अभी तक कैमरे चालू नहीं हो पाए हैं।
तत्काल चालू कराने की मांग
सीसीटीवी कैमरे लगाना ही सुरक्षा व्यवस्था पूरी होने का प्रमाण नहीं है। कैमरों का चालू रहना, उनकी नियमित जांच, रिकॉर्डिंग की निगरानी और खराब होने पर समय पर मरम्मत भी उतनी ही जरूरी है। नूंह और फिरोजपुर झिरका में लंबे समय से बंद पड़े कैमरों ने इसी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। यात्रियों ने विभाग को सभी कैमरों की तकनीकी स्थिति की जांच कराकर उन्हें तत्काल चालू कराने की मांग की है।
वर्जन
बस स्टैंड में जितने कैमरे चालू हैं, सुरक्षा के लिहाज से वे काफी हैं। - प्रदीप अहलावत, जीएम, रोडवेज
बस स्टैंड पर निगरानी के लिए लगाए गए कैमरे बंद है इसकी जानकारी नहीं थी। जल्द ही निरिक्षण कर जानकारी जुटा कर समस्या का समाधान कराया जायेगा। - रूहानी, एसडीएम फिरोजपुर झिरका
कोट
बस स्टैंड पर परिवार के साथ आने वाले लोगों को सुरक्षा का भरोसा होना चाहिए। कैमरे बंद रहेंगे तो परेशानी होगी। - असगर हुसैन
बस स्टैंड पर महिलाओं की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। कैमरे चालू रहने से असामाजिक तत्वों पर निगरानी बनी रहती है। - डॉ. सलमा खातून
वर्कशॉप में सरकारी बसें और सामान खड़ा रहता है। ऐसे स्थान पर कैमरों का दो साल तक बंद रहना चिंता का विषय है। - वसीम सिंगार
लाखों खर्च करके कैमरे लगाए गए हैं तो उन्हें चालू रखना भी विभाग की जिम्मेदारी है। समय पर मरम्मत होनी चाहिए। - जमालुद्दीन
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26 कैमरे नूंह बस स्टैंड के निगरानी व्यवस्था से बाहर
नूंह बस स्टैंड में 17.75 लाख रुपये से लगाए गए थे 47 कैमरे
रोडवेज वर्कशॉप में लगाए गए 19 कैमरे दो साल से चालू नहीं
फिरोजपुर झिरका बस स्टैंड में लगे 16 कैमरे एक साल बाद भी चालू नहीं
फोटो - बस स्टैंड का फोटो।
रिजवान खान
नूंह। यात्रियों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए बस अड्डों पर लाखों रुपये खर्च कर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए, हालांकि यही कैमरे अब निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं। नूंह बस स्टैंड पर करीब 17.75 लाख रुपये की लागत से लगाए गए 47 कैमरों में से केवल 21 ही चालू हैं, जबकि सात कैमरे करीब छह माह से बंद पड़े हैं। इससे भी गंभीर स्थिति रोडवेज वर्कशॉप की है, जहां लगाए गए 19 कैमरे करीब दो साल से चालू नहीं हो पाए हैं।
वहीं, फिरोजपुर झिरका बस स्टैंड पर करीब 4.50 लाख रुपये की लागत से लगाए गए 16 कैमरे भी करीब एक साल बाद तक चालू नहीं हुए हैं।
नूंह मुख्यालय के बस स्टैंड पर वर्ष 2024 में करीब 17 लाख 75 हजार रुपये की लागत से 47 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इनका उद्देश्य बस स्टैंड परिसर में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखना और किसी वारदात की स्थिति में फुटेज के माध्यम से आरोपियों तक पहुंचने में मदद करना था। लेकिन, वर्तमान में 26 कैमरे निगरानी व्यवस्था से बाहर हैं।
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छह माह से सात कैमरे बंद
बस स्टैंड परिसर में लगे सात कैमरे करीब छह माह से बंद बताए जा रहे हैं। इतने लंबे समय तक कैमरों का बंद रहना व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग पर सवाल खड़ा करता है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही वाले बस स्टैंड पर चोरी, स्नेचिंग, छेड़छाड़ या अन्य घटना होने की स्थिति में बंद कैमरों वाले हिस्सों की फुटेज उपलब्ध नहीं होगी। वहीं, रोडवेज वर्कशॉप में लगाए गए 19 कैमरों के दो साल से चालू नहीं होने पर सरकारी संपत्ति की सुरक्षा खतरे में है।
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नूह वर्कशॉप को लेकर कई बार डीजी ऑफिस, चंडीगढ़ को लिखित शिकायत देकर जल्द समाधान कराने की मांग की गई थी, लेकिन अभी तक वहां से कोई जवाब नहीं आया है। नूंह बस स्टैंड के सात कैमरे छह माह से बंद है, जिसके समाधान के लिए भी उच्च अधिकारियों को लिखा गया लेकिन अभी तक कैमरे चालू नहीं हो पाए हैं।
तत्काल चालू कराने की मांग
सीसीटीवी कैमरे लगाना ही सुरक्षा व्यवस्था पूरी होने का प्रमाण नहीं है। कैमरों का चालू रहना, उनकी नियमित जांच, रिकॉर्डिंग की निगरानी और खराब होने पर समय पर मरम्मत भी उतनी ही जरूरी है। नूंह और फिरोजपुर झिरका में लंबे समय से बंद पड़े कैमरों ने इसी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। यात्रियों ने विभाग को सभी कैमरों की तकनीकी स्थिति की जांच कराकर उन्हें तत्काल चालू कराने की मांग की है।
वर्जन
बस स्टैंड में जितने कैमरे चालू हैं, सुरक्षा के लिहाज से वे काफी हैं। - प्रदीप अहलावत, जीएम, रोडवेज
बस स्टैंड पर निगरानी के लिए लगाए गए कैमरे बंद है इसकी जानकारी नहीं थी। जल्द ही निरिक्षण कर जानकारी जुटा कर समस्या का समाधान कराया जायेगा। - रूहानी, एसडीएम फिरोजपुर झिरका
कोट
बस स्टैंड पर परिवार के साथ आने वाले लोगों को सुरक्षा का भरोसा होना चाहिए। कैमरे बंद रहेंगे तो परेशानी होगी। - असगर हुसैन
बस स्टैंड पर महिलाओं की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। कैमरे चालू रहने से असामाजिक तत्वों पर निगरानी बनी रहती है। - डॉ. सलमा खातून
वर्कशॉप में सरकारी बसें और सामान खड़ा रहता है। ऐसे स्थान पर कैमरों का दो साल तक बंद रहना चिंता का विषय है। - वसीम सिंगार
लाखों खर्च करके कैमरे लगाए गए हैं तो उन्हें चालू रखना भी विभाग की जिम्मेदारी है। समय पर मरम्मत होनी चाहिए। - जमालुद्दीन