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एमएसपी की गारंटी मिलने तक धरना रहेगा जारी
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पलवल। देश की संसद द्वारा तीन कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने के बीच संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, बिजली संशोधन बिल को रद्द करने सहित अन्य मांगों को लेकर चल रहा किसान आंदोलन रविवार को भी पलवल केएमपी केजीपी इंटरचेंज पर जारी रहा। पितांबर बंचारी की अध्यक्षता में आयोजित धरने का संचालन दरियाब सिंह सौरोत ने किया। धरना में सोतोत पाल के किसानों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। किसानों ने फैसला किया कि जरूरी मांगों पर सरकार के रुख को ध्यान में रखकर आगामी 7 दिसंबर को आयोजित किसान मोर्चा की बैठक में अगले आंदोलन की दिशा तय की जाएगी।
किसान आंदोलन को लगातार 1 साल से समर्थन दे रहे जोधपुर के किसान अच्छेलाल के भाई की पत्नी की असमय मृत्यु पर शोक व्यक्त किया गया तथा उनकी आत्मा की शांति के लिए 2 मिनट का मौन रखा गया।
किसान नेता महेंद्र सिंह चौहान व धर्म चन्द घुघेरा ने कहा कि एमएसपी में किसानों को एक तय दाम से कम कीमत पर अपनी फसल को बेचने की मजबूरी नहीं होती है। सरकार को निर्धारित दाम पर किसान की फसल खरीदनी पड़ती है। कृषि कानूनों के जरिए एमएसपी खत्म करने की साजिश हो रही थी। कृषि कानूनों को वापसी लेने की घोषणा के बाद भी किसान आंदोलन खत्म नहीं होने जा रहा है। जिस तरह गोदी मीडिया द्वारा संयुक्त मोर्चे में दरार की बात फैलाई जा रही है। यह मात्र आंदोलन को कमजोर करने की नाकामयाब कोशिश है।
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भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतन सिंह सौरोत ने कहा की अगर सरकार किसानों की मांगों पर सकारात्मक रुख रखती है तो किसान भी अपना सहयोग देने को तैयार रहेगा। धरने में किसान नेता सोहनपाल चौहान, उदय सिंह सरपंच, नरेंद्र सहरावत, श्रीचंद महाशय, रोशनलाल, गोपी हवलदार, रामसिंह चौहान, जयदेव, जोगिंदर मररौली भागीरथ, डॉ. रघुवीर सिंह राजकुमार ओलिहान घूघेरा ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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किसान आंदोलन को लगातार 1 साल से समर्थन दे रहे जोधपुर के किसान अच्छेलाल के भाई की पत्नी की असमय मृत्यु पर शोक व्यक्त किया गया तथा उनकी आत्मा की शांति के लिए 2 मिनट का मौन रखा गया।
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किसान नेता महेंद्र सिंह चौहान व धर्म चन्द घुघेरा ने कहा कि एमएसपी में किसानों को एक तय दाम से कम कीमत पर अपनी फसल को बेचने की मजबूरी नहीं होती है। सरकार को निर्धारित दाम पर किसान की फसल खरीदनी पड़ती है। कृषि कानूनों के जरिए एमएसपी खत्म करने की साजिश हो रही थी। कृषि कानूनों को वापसी लेने की घोषणा के बाद भी किसान आंदोलन खत्म नहीं होने जा रहा है। जिस तरह गोदी मीडिया द्वारा संयुक्त मोर्चे में दरार की बात फैलाई जा रही है। यह मात्र आंदोलन को कमजोर करने की नाकामयाब कोशिश है।
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भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतन सिंह सौरोत ने कहा की अगर सरकार किसानों की मांगों पर सकारात्मक रुख रखती है तो किसान भी अपना सहयोग देने को तैयार रहेगा। धरने में किसान नेता सोहनपाल चौहान, उदय सिंह सरपंच, नरेंद्र सहरावत, श्रीचंद महाशय, रोशनलाल, गोपी हवलदार, रामसिंह चौहान, जयदेव, जोगिंदर मररौली भागीरथ, डॉ. रघुवीर सिंह राजकुमार ओलिहान घूघेरा ने भी अपने विचार व्यक्त किए।