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Palwal News: भारी बारिश से छह हजार एकड़ कपास की फसल प्रभावित
Wed, 03 Sep 2025 10:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल
संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल
Updated Wed, 03 Sep 2025 10:49 PM IST
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हथीन। एक सप्ताह से लगातार हो रही बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। शहर की गलियों से लेकर गांवों की सड़कों तक पानी भरा हुआ है, वहीं खेत-खलिहान भी जलमग्न हो गए हैं। खेतों में खड़ी खरीफ की कपास, धान और बाजरे की फसलें पानी में डूब गई हैं जिससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
हथीन क्षेत्र में करीब छह हजार एकड़ भूमि पर खड़ी कपास की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। यह नकदी फसल होने के कारण किसानों के लिए बड़ी उम्मीद का सहारा होती है लेकिन इस बार बरसात ने उनकी मेहनत पर तुषारापात कर दिया है। गांव मलाई के किसान मोहम्मद जकरिया ने बताया कि कपास की फसल में फूल आने शुरू ही हुए थे तभी लगातार बारिश से फसल को भारी नुकसान पहुंचा है।
वहीं, खिल्लुका निवासी किसान याहया नंबरदार ने कहा कि इस बार की फसल बहुत अच्छी थी लेकिन तेज बरसात ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया।
किसानों का कहना है कि कपास की फसल से उन्हें नकदी आय होती है, जिससे परिवार की आजीविका चलती है लेकिन इस बार उनकी उम्मीदें टूट गई हैं। ऐसे में अब किसानों की सबसे बड़ी चिंता खेतों में जमा पानी और फसल को बचाने की है।
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इस बीच खंड कृषि अधिकारी प्रदीप मलिक ने किसानों को राहत देने के लिए सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि कपास की फसल से पानी निकालने के बाद खेतों में पौधों की जड़ों पर कोको कॉपर ऑक्सी क्लोराइड पाउडर का छिड़काव करना चाहिए। एक लीटर पानी में एक ग्राम दवा मिलाकर पौधों की जड़ों में ड्रेंचिंग करने से फसल को लाभ होगा।
उन्होंने यह भी बताया कि बाजरा और धान की फसल को भी नुकसान पहुंचा है लेकिन अभी यह नुकसान आंशिक है। इसका आकलन किया जा रहा है। विभाग की ओर से किसानों को समय-समय पर जरूरी निर्देश और सहयोग प्रदान किया जाएगा।
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हथीन क्षेत्र में करीब छह हजार एकड़ भूमि पर खड़ी कपास की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। यह नकदी फसल होने के कारण किसानों के लिए बड़ी उम्मीद का सहारा होती है लेकिन इस बार बरसात ने उनकी मेहनत पर तुषारापात कर दिया है। गांव मलाई के किसान मोहम्मद जकरिया ने बताया कि कपास की फसल में फूल आने शुरू ही हुए थे तभी लगातार बारिश से फसल को भारी नुकसान पहुंचा है।
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वहीं, खिल्लुका निवासी किसान याहया नंबरदार ने कहा कि इस बार की फसल बहुत अच्छी थी लेकिन तेज बरसात ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया।
किसानों का कहना है कि कपास की फसल से उन्हें नकदी आय होती है, जिससे परिवार की आजीविका चलती है लेकिन इस बार उनकी उम्मीदें टूट गई हैं। ऐसे में अब किसानों की सबसे बड़ी चिंता खेतों में जमा पानी और फसल को बचाने की है।
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इस बीच खंड कृषि अधिकारी प्रदीप मलिक ने किसानों को राहत देने के लिए सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि कपास की फसल से पानी निकालने के बाद खेतों में पौधों की जड़ों पर कोको कॉपर ऑक्सी क्लोराइड पाउडर का छिड़काव करना चाहिए। एक लीटर पानी में एक ग्राम दवा मिलाकर पौधों की जड़ों में ड्रेंचिंग करने से फसल को लाभ होगा।
उन्होंने यह भी बताया कि बाजरा और धान की फसल को भी नुकसान पहुंचा है लेकिन अभी यह नुकसान आंशिक है। इसका आकलन किया जा रहा है। विभाग की ओर से किसानों को समय-समय पर जरूरी निर्देश और सहयोग प्रदान किया जाएगा।