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Palwal News: फार्म-6 भरे बिना स्कूलों ने बढ़ाई फीस, निदेशालय अंजान
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-अब तक नहीं खुला संबंधित पोर्टल, 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ी है फीस
संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। जिले के अधिकांश निजी स्कूलों में नए सत्र के दाखिले शुरू हो गए हैं। अभिभावकों की भारी भीड़ स्कूलों में उमड़ रही है। वहीं, स्कूलों ने ट्यूशन फीस में मामूली वृद्धि दिखाकर अन्य शुल्क बढ़ा दिए हैं। खास बात यह है कि फीस वृद्धि की जानकारी शिक्षा निदेशालय को नहीं है, क्योंकि अब तक फीस वृद्धि के लिए जरूरी फार्म-6 का पोर्टल नहीं खोला गया है। पोर्टल न खुलने का फायदा स्कूलों को मिला है, और उन्होंने 10 से 20 प्रतिशत तक फीस बढ़ा दी है, जिससे अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
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निदेशालय की लापरवाही से स्कूलों का फायदा
जिले में करीब 400 छोटे-बड़े निजी स्कूल हैं। इनमें से लगभग दो दर्जन बड़े स्कूल हैं। यहां दाखिलों को लेकर काफी प्रतिस्पर्धा रहती है। हर साल दिसंबर तक पोर्टल खुल जाता है और स्कूलों से फार्म-6 के आवेदन मांगे जाते हैं, लेकिन इस बार नया सत्र शुरू होने में केवल चार दिन शेष हैं और पोर्टल अब तक नहीं खुला। जब तक पोर्टल खुलेगा और प्रक्रिया शुरू होगी, तब तक अधिकतर स्कूलों में दाखिले पूरे हो चुके होंगे। हालांकि, स्कूल ऑफलाइन फार्म-6 जमा कर सकते थे, लेकिन किसी स्कूल ने ऐसा नहीं किया। छोटे बच्चों के दाखिले दो सप्ताह पहले ही शुरू हो चुके थे, जबकि अब बड़ी कक्षाओं के दाखिले जारी हैं।
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फीस वृद्धि की निगरानी नहीं
स्कूलों को फीस बढ़ाने के लिए फार्म-6 भरकर शिक्षा निदेशालय को देना होता है, जिसमें ट्यूशन, भवन और अन्य शुल्क की पूरी जानकारी होती है। लेकिन इस बार पोर्टल में देरी से अभिभावकों पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ा है। कई स्कूलों में अभिभावकों को केवल मौखिक रूप से फीस वृद्धि की जानकारी दी जा रही है। अभिभावक हरकेश शर्मा का कहना है कि निदेशालय ने इस प्रक्रिया में बहुत देरी कर दी है। यह कार्य पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था।
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वर्जन
बिना फार्म-6 भरे कोई भी स्कूल अपनी मर्जी से फीस नहीं बढ़ा सकता। विभाग का ऑनलाइन फार्म-6 पोर्टल अभी तक नहीं खुला है, इसलिए स्कूलों को पुरानी फीस पर ही दाखिले करने चाहिए। यदि किसी स्कूल ने बिना अनुमति के फीस बढ़ाई तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अभिभावक किसी भी तरह की शिकायत लेकर उनके कार्यालय आ सकते हैं।
अशोक बघेल, जिला शिक्षा अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। जिले के अधिकांश निजी स्कूलों में नए सत्र के दाखिले शुरू हो गए हैं। अभिभावकों की भारी भीड़ स्कूलों में उमड़ रही है। वहीं, स्कूलों ने ट्यूशन फीस में मामूली वृद्धि दिखाकर अन्य शुल्क बढ़ा दिए हैं। खास बात यह है कि फीस वृद्धि की जानकारी शिक्षा निदेशालय को नहीं है, क्योंकि अब तक फीस वृद्धि के लिए जरूरी फार्म-6 का पोर्टल नहीं खोला गया है। पोर्टल न खुलने का फायदा स्कूलों को मिला है, और उन्होंने 10 से 20 प्रतिशत तक फीस बढ़ा दी है, जिससे अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
निदेशालय की लापरवाही से स्कूलों का फायदा
जिले में करीब 400 छोटे-बड़े निजी स्कूल हैं। इनमें से लगभग दो दर्जन बड़े स्कूल हैं। यहां दाखिलों को लेकर काफी प्रतिस्पर्धा रहती है। हर साल दिसंबर तक पोर्टल खुल जाता है और स्कूलों से फार्म-6 के आवेदन मांगे जाते हैं, लेकिन इस बार नया सत्र शुरू होने में केवल चार दिन शेष हैं और पोर्टल अब तक नहीं खुला। जब तक पोर्टल खुलेगा और प्रक्रिया शुरू होगी, तब तक अधिकतर स्कूलों में दाखिले पूरे हो चुके होंगे। हालांकि, स्कूल ऑफलाइन फार्म-6 जमा कर सकते थे, लेकिन किसी स्कूल ने ऐसा नहीं किया। छोटे बच्चों के दाखिले दो सप्ताह पहले ही शुरू हो चुके थे, जबकि अब बड़ी कक्षाओं के दाखिले जारी हैं।
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फीस वृद्धि की निगरानी नहीं
स्कूलों को फीस बढ़ाने के लिए फार्म-6 भरकर शिक्षा निदेशालय को देना होता है, जिसमें ट्यूशन, भवन और अन्य शुल्क की पूरी जानकारी होती है। लेकिन इस बार पोर्टल में देरी से अभिभावकों पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ा है। कई स्कूलों में अभिभावकों को केवल मौखिक रूप से फीस वृद्धि की जानकारी दी जा रही है। अभिभावक हरकेश शर्मा का कहना है कि निदेशालय ने इस प्रक्रिया में बहुत देरी कर दी है। यह कार्य पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था।
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बिना फार्म-6 भरे कोई भी स्कूल अपनी मर्जी से फीस नहीं बढ़ा सकता। विभाग का ऑनलाइन फार्म-6 पोर्टल अभी तक नहीं खुला है, इसलिए स्कूलों को पुरानी फीस पर ही दाखिले करने चाहिए। यदि किसी स्कूल ने बिना अनुमति के फीस बढ़ाई तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अभिभावक किसी भी तरह की शिकायत लेकर उनके कार्यालय आ सकते हैं।
अशोक बघेल, जिला शिक्षा अधिकारी