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लचीले कानून का फायदा उठाते हैं शराब तस्कर

Mon, 04 Apr 2016 11:10 AM IST
संजय मग्गू/अमर उजाला, पलवल
संजय मग्गू/अमर उजाला, पलवल Updated Mon, 04 Apr 2016 11:10 AM IST
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liquor smugglers take advantage of flexible law
शराब बोरों में भरकर ले जाते - फोटो : अमर उजाला
शराब तस्कर कानून में लचीले प्रावधानों का जमकर फायदा उठाते हैं। उन्हें पता है कि अदालत से खड़े-खड़े जमानत मिल ही जानी है, इसलिए वह इस धंधे को छोड़ने को तैयार नहीं होते। इनके हौसले इतने बुलंद होते हैं कि पकड़े जाने पर हमला करने से भी नहीं चूकते। हवालात में पहुंच भी जाएं तो उनके खादी व खाकी से ऐसे संपर्क हैं कि वहां भी कोई परेशानी नहीं आती।
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पुलिस डायरी पर नजर डाली जाए तो स्पष्ट है कि शराब तस्करों को किसी का कोई डर नहीं है। आए दिन विभिन्न थानों में शराब तस्करी के मामले दर्ज किए जाते हैं। कुछ तो कानूनी पेचीदगियां व कुछ अपनी ऊंची पहुंच के चलते ही थानों से कच्ची जमानत पर ही छूट जाते हैं। तस्कर बाहर आते ही फिर धंधे में जुट जाते हैं।
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वर्ष 1996 में हुई थी शुरूआत : 
शराब तस्करी का जाल जिले में वर्ष 1996 में फैलना शुरू हुआ था। तत्कालीन सरकार द्वारा की गई शराबबंदी ने शराब तस्करों को जन्म दिया था। कहीं मजदूरी के कार्य में लगे लोग तो कहीं छात्र भी इस काले धंधे से जुड़ते चले गए। हालांकि सरकार ने तो अपने फैसले को पलटते हुए शराब के ठेके पुन: खोल दिए लेकिन तस्करी का धंधा आज तक भी अनवरत जारी है।
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नियमों में ढील ही शराब की तस्करी को बढ़ावा देती है। तस्करी पर रोक लगाने के लिए सरकार को आबकारी अधिनियम में कड़े प्रावधान करने चाहिए। शराब तस्करी को गैर जमानती अपराध घोषित कर दिया जाना चाहिए। इसके अलावा तस्करी की बात साबित होने पर आर्थिक जुर्माने के साथ-साथ सजा का भी प्रावधान किया जाना चाहिए।-राजीव कत्याल, अधिवक्ता, जिला कोर्ट, पलवल व फरीदाबाद।

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