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उपमंडल अस्पताल में मनाया गया विश्व निमोनिया दिवस
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होडल। उपमंडल नागरिक अस्पताल में शुक्रवार को विश्व निमोनिया दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम किया गया। कार्यक्रम के तहत निमोनिया के प्रति जागरूकता लाने अस्पताल के अलावा विभाग द्वारा कई स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पताल और अन्य स्थानों में शून्य से पांच साल तक के बच्चों को निमोनिया से बचाने के लिए जागरूक किया गया। उपमंडल नागरिक अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डा. सतीश वर्मा ने बताया ठंड में कोविड के साथ साथ बच्चों में सर्दी का भी खतरा मंडरा रहा है। इसके लिए हमें चाहिए कि हम कोविड नियमों का पालन करें। ठंड के मौसम में बच्चों के साथ-साथ बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। यह एक ऐसा रोग है जिसे सही समय पर पहचान करके इलाज न किया जाए तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि सर्दी में ठंड लगने से बच्चों के फेफड़े में एक तरह का संक्रमण होता है। इससे सांस लेने में परेशानी होती है। यह संक्रमण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देता है। इसी को हम निमोनिया भी कहते हैं। यदि निमोनिया के लक्षण बच्चों या बुजुर्गों में दिखें तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना चाहिए
अस्पताल के फिजिशियन डॉ. पंकज ने बताया कि ठंड में सबसे जरूरी अपने शरीर और फेफड़ों को स्वस्थ रखना है। इसके लिए फेफड़ों को स्वस्थ रखने से संबंधित व्यायाम करें। इस दौरान विटामिन सी और डी का सेवन काफी फायदेमंद रहता है। जितना हो सके धूम्रपान एवं प्रदूषण से बचें। ताजा व पौष्टिक भोजन करें। एवं कोविड गाइडलाइन का पालन करें।
ये होते हैं निमोनिया के लक्षण
अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कमलकांत ने बताया कि निमोनिया होने पर तेज बुखार, खांसी आना, सांस का तेज चलना, पसली तेज चलना निमोनिया के लक्षण होते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
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बच्चों का बचाव कैसे करें
समय पर बच्चे का टीकाकरण कराएं, निमोनिया से बचाव करने के लिए पीसीवी के तीनों टीके अवश्य लगवाएं जो बीमारी से बचाव का काम करता है। सफाई का ध्यान रखें, खांसते और छींकते समय बच्चे की नाक और मुंह पर रूमाल या कपड़ा रखें। कीटाणुओं को फैलने से रोकें, बच्चों के हाथों बार-बार साफ करते रहें।
पोषण का ध्यान रखें
बच्चे को प्रथम छह माह तक मां का ही दूध दें। मां का दूध बच्चे में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ता है साथ ही मां के दूध में एंटीबॉडीज होती हैं जो बच्चे को रोगों से लड़ने में मदद करती है। सर्दी से बचाने के लिए गर्म कपड़े पहनाएं, ठंडी हवा से बचाव के लिये कान को ढंके, पैरों के गर्म मोजे पहनाएं। नंगे पैर ना घूमने दे ठंडे पानी से दूर रखें।
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अस्पताल के फिजिशियन डॉ. पंकज ने बताया कि ठंड में सबसे जरूरी अपने शरीर और फेफड़ों को स्वस्थ रखना है। इसके लिए फेफड़ों को स्वस्थ रखने से संबंधित व्यायाम करें। इस दौरान विटामिन सी और डी का सेवन काफी फायदेमंद रहता है। जितना हो सके धूम्रपान एवं प्रदूषण से बचें। ताजा व पौष्टिक भोजन करें। एवं कोविड गाइडलाइन का पालन करें।
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ये होते हैं निमोनिया के लक्षण
अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कमलकांत ने बताया कि निमोनिया होने पर तेज बुखार, खांसी आना, सांस का तेज चलना, पसली तेज चलना निमोनिया के लक्षण होते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
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बच्चों का बचाव कैसे करें
समय पर बच्चे का टीकाकरण कराएं, निमोनिया से बचाव करने के लिए पीसीवी के तीनों टीके अवश्य लगवाएं जो बीमारी से बचाव का काम करता है। सफाई का ध्यान रखें, खांसते और छींकते समय बच्चे की नाक और मुंह पर रूमाल या कपड़ा रखें। कीटाणुओं को फैलने से रोकें, बच्चों के हाथों बार-बार साफ करते रहें।
पोषण का ध्यान रखें
बच्चे को प्रथम छह माह तक मां का ही दूध दें। मां का दूध बच्चे में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ता है साथ ही मां के दूध में एंटीबॉडीज होती हैं जो बच्चे को रोगों से लड़ने में मदद करती है। सर्दी से बचाने के लिए गर्म कपड़े पहनाएं, ठंडी हवा से बचाव के लिये कान को ढंके, पैरों के गर्म मोजे पहनाएं। नंगे पैर ना घूमने दे ठंडे पानी से दूर रखें।