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Palwal News: किसानों व पशुपालकों को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रही यमुना की बाढ़
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संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। यमुना का जलस्तर भले ही कम होने लगा है, परंतु बाढ़ ग्रस्त गांवों को लोगो को परेशानी अभी कम नहीं हुई है। बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान किसानों व पशुपालकों को हुआ है। किसानों की हजारों एकड़ फसल नष्ट हो गई, जिससे उनका करोड़ों का नुकसान हो गया, वहीं पशुओं के लिए चारे की समस्या पशुपालकों के समक्ष चुनौती बनकर खड़ी हो गई। सदिर्यों के लिए जमा किया गया चारा भूसा भी पूरी तक खराब हो गया। दूध बेचकर गुजारा करने वाले पशुपालकों पर मुसीबतों को पहाड़ सा टूट पड़ा है। घर से दूर राहत शिविर में रहने के कारण उनका कारोबार ही ठप हो गया। अब पशुपालकों ने अपने पशुओं को लेकर रिश्तेदारों के यहां पलायन करना शुरू कर दिया है।
पलवल जिले में यमुना किनारे बसे गांवों में ज्यादातर किसान परिवार रहते हैं। इन गांवों के लोगों का प्रमुख व्यवसाय खेती बाड़ी करना व दूध बेचना है। यमुना में आई बाढ़ का सबसे ज्यादा प्रभाव इन दोनों वर्गों पर पड़ा है। बाढ़ में करीब 18 हजार एकड़ फसल डूबने से पूरी से बर्बाद हो गई। पानी उतरने के बाद भी यहां फसल होने की कोई उम्मीद नहीं है, क्योंकि खेतों में चारों तरफ यमुना की रेती दिखाई देगी। इसके अलावा चारे की कमी होने से पशुपालक किसानों को पशु को पेट भरना भी चुनौती बना हुआ है। प्रशासन द्वारा राहत शिविर में पशुओं के चारा मंगवाया गया है, परंतु एक-दो पशु रखने वाले किसान तो वहां अपने पशुओं के देखभाल करते हैं, परंतु 10 से 20 पशु रखने वाले किसानों के सामने पशुओं की देखभाल करना चुनौती बना हुआ है। सोमवार को गांव अतवा निवासी जयपाल अपने पशुओं को लेकर गांव से पलायन कर गए। जयपाल ने बताया कि यहां पशुओं के खाने के लिए कुछ नहीं बचा है। उन्हें पेट भरना ही भारी पड़ रहा है। वह अपने पशुओं को लेकर अपने रिश्तेदार के पास गुरुग्राम के गांव रिठौज जा रहा है। कुछ दिनों तक वहीं पशुओं को रख गुजारा करेगा। हालात सामान्य होने के बाद वापस गांव लौट आएगा। जयपाल के अलावा अन्य किसानों की भी यही कहानी है। वहीं गांव फाटनगर ननासी कुमर सिंह की दो दुधारू भैंस यमुना नदी के पानी के तेज बहाव में बह गई। जिनका कुछ पता नहीं चल पाया।
जमीन धंसने से दर्जनों मकान फटे, लोगों में दहशत
यमुना में बाढ़ का असर मकानों पर पड़ रहा है। जमीन धंसने से दर्जनों गांवों में मकान फट गए हैं। कई दिनों से गलियों में पानी भरा हुआ है, जिसका असर भी मकानों पर पड़ रहा है। मकानों में दरार आने से लोगों में दहशत बनी हुई हैं, क्योंकि में गांव बागपुर में गिरे मकान की घटना को लोग भूल नहीं पाए हैं। सोमवार को बागपुर के अलावा गांव इंद्रानगर में एक मकान की पूरी दीवार गिर गई। इसके अलावा महाबलीपुर, दोस्तपुर, सोलडा, भोलडा, कुशक, अतवा, माहौली, फाटनगर, टप्पा सहित अन्य गांवों से भी मकानों में दरार आने से सूचनाएं आ रही हैं। लोगों का कहना है कि सरकार को मकानों को मुआवजा
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मात्र दो फुट उतरा यमुना का जलस्तर
सिंचाई विभाग के एसडीओ सुभाष चंद ने बताया यमुना का जलस्तर अब कम होने लगा है। करीब दो फुट पानी नीचे आ चुका है, परंतु अब भी यमुना नदी का पानी खतरे के निशान से ऊपर है। इसलिए लोगों को सावधानी बरतनी है। कोई यमुना की तरफ न जाए।
किसानों के हुए नुकसान का पूर्ण आंकलन कर रिपोर्ट भेजें उपायुक्त
केंद्रीय उर्जा एवं भारी उद्योग राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने सोमवार को बाढ़ प्रभावित गांवों को दौरान किया। इस दौरान गुर्जर ने कहा कि इस वर्ष ज्यादा बारिश होने की वजह से यमुना में ज्यादा पानी आया है। यह एक प्राकृतिक आपदा है और इससे किसानों की फसलों व संपत्तियों को बड़ा नुकसान हुआ है। आपदा की इस घड़ी में प्रशासन व सरकार पूरी तरह से लोगों के साथ है। उन्होंने सभी प्रशासनिक अधिकारियों से प्रत्येक गांव की रिपोर्ट लेते हुए निर्देश दिए कि किसी भी गांव में पीने के पानी व खाने की कोई दिक्कत न हो। गांवों के रास्तों को जल्द से जल्द सुचारू किया जाए। उन्होंने उपायुक्त नेहा सिंह को निर्देश दिए कि वे जिला में यमुना के जलभराव से हुए नुकसान की रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजें। उन्होंने कहा कि जो भी नुकसान आपदा के मुआवजा नियमों में आता है वह किसानों को दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जो बोरवैल ठप हुए हैं उनकी रिपोर्ट भी तैयार कर सरकार को भेजें, ताकि मुख्यमंत्री मनोहर लाल से इसके लिए भी अनुरोध किया जा सके। उन्होंने भूमि कटाव के कारण टूटी सड़कों को जल्द दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं।
जजपा महासचिव हर्ष कुमार ने भी जाना लोगों का हाल
होडल। जजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व सिचाई मंत्री चौ. हर्ष कुमार ने पार्टी जिला अध्यक्ष देवेंद्र सिंह सौरोत के साथ यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर यमुना के साथ लगते गांव लहरपुर, फाटनगर, बिल्लोचपुर, अतवा, महोली, काशीपुर, सतुआगढी, शोरू का नंगला आदि गांवाें का जायजा लिया और ग्रामीणों से बातचीत की। हर्ष कुमार ने प्राकृतिक आपदा के समय में सभी को एकजुट होकर एक दूसरे का सहयोग करने को कहा। यमुना नदी के पानी जल स्तर के बाद घरों में सांप व अन्य जहारीले कीट घरों में प्रवेश कर रहे हैं। कई ग्रामीणों के घरों में दरारें आ चुकी हैं।
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पलवल। यमुना का जलस्तर भले ही कम होने लगा है, परंतु बाढ़ ग्रस्त गांवों को लोगो को परेशानी अभी कम नहीं हुई है। बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान किसानों व पशुपालकों को हुआ है। किसानों की हजारों एकड़ फसल नष्ट हो गई, जिससे उनका करोड़ों का नुकसान हो गया, वहीं पशुओं के लिए चारे की समस्या पशुपालकों के समक्ष चुनौती बनकर खड़ी हो गई। सदिर्यों के लिए जमा किया गया चारा भूसा भी पूरी तक खराब हो गया। दूध बेचकर गुजारा करने वाले पशुपालकों पर मुसीबतों को पहाड़ सा टूट पड़ा है। घर से दूर राहत शिविर में रहने के कारण उनका कारोबार ही ठप हो गया। अब पशुपालकों ने अपने पशुओं को लेकर रिश्तेदारों के यहां पलायन करना शुरू कर दिया है।
पलवल जिले में यमुना किनारे बसे गांवों में ज्यादातर किसान परिवार रहते हैं। इन गांवों के लोगों का प्रमुख व्यवसाय खेती बाड़ी करना व दूध बेचना है। यमुना में आई बाढ़ का सबसे ज्यादा प्रभाव इन दोनों वर्गों पर पड़ा है। बाढ़ में करीब 18 हजार एकड़ फसल डूबने से पूरी से बर्बाद हो गई। पानी उतरने के बाद भी यहां फसल होने की कोई उम्मीद नहीं है, क्योंकि खेतों में चारों तरफ यमुना की रेती दिखाई देगी। इसके अलावा चारे की कमी होने से पशुपालक किसानों को पशु को पेट भरना भी चुनौती बना हुआ है। प्रशासन द्वारा राहत शिविर में पशुओं के चारा मंगवाया गया है, परंतु एक-दो पशु रखने वाले किसान तो वहां अपने पशुओं के देखभाल करते हैं, परंतु 10 से 20 पशु रखने वाले किसानों के सामने पशुओं की देखभाल करना चुनौती बना हुआ है। सोमवार को गांव अतवा निवासी जयपाल अपने पशुओं को लेकर गांव से पलायन कर गए। जयपाल ने बताया कि यहां पशुओं के खाने के लिए कुछ नहीं बचा है। उन्हें पेट भरना ही भारी पड़ रहा है। वह अपने पशुओं को लेकर अपने रिश्तेदार के पास गुरुग्राम के गांव रिठौज जा रहा है। कुछ दिनों तक वहीं पशुओं को रख गुजारा करेगा। हालात सामान्य होने के बाद वापस गांव लौट आएगा। जयपाल के अलावा अन्य किसानों की भी यही कहानी है। वहीं गांव फाटनगर ननासी कुमर सिंह की दो दुधारू भैंस यमुना नदी के पानी के तेज बहाव में बह गई। जिनका कुछ पता नहीं चल पाया।
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जमीन धंसने से दर्जनों मकान फटे, लोगों में दहशत
यमुना में बाढ़ का असर मकानों पर पड़ रहा है। जमीन धंसने से दर्जनों गांवों में मकान फट गए हैं। कई दिनों से गलियों में पानी भरा हुआ है, जिसका असर भी मकानों पर पड़ रहा है। मकानों में दरार आने से लोगों में दहशत बनी हुई हैं, क्योंकि में गांव बागपुर में गिरे मकान की घटना को लोग भूल नहीं पाए हैं। सोमवार को बागपुर के अलावा गांव इंद्रानगर में एक मकान की पूरी दीवार गिर गई। इसके अलावा महाबलीपुर, दोस्तपुर, सोलडा, भोलडा, कुशक, अतवा, माहौली, फाटनगर, टप्पा सहित अन्य गांवों से भी मकानों में दरार आने से सूचनाएं आ रही हैं। लोगों का कहना है कि सरकार को मकानों को मुआवजा
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मात्र दो फुट उतरा यमुना का जलस्तर
सिंचाई विभाग के एसडीओ सुभाष चंद ने बताया यमुना का जलस्तर अब कम होने लगा है। करीब दो फुट पानी नीचे आ चुका है, परंतु अब भी यमुना नदी का पानी खतरे के निशान से ऊपर है। इसलिए लोगों को सावधानी बरतनी है। कोई यमुना की तरफ न जाए।
किसानों के हुए नुकसान का पूर्ण आंकलन कर रिपोर्ट भेजें उपायुक्त
केंद्रीय उर्जा एवं भारी उद्योग राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने सोमवार को बाढ़ प्रभावित गांवों को दौरान किया। इस दौरान गुर्जर ने कहा कि इस वर्ष ज्यादा बारिश होने की वजह से यमुना में ज्यादा पानी आया है। यह एक प्राकृतिक आपदा है और इससे किसानों की फसलों व संपत्तियों को बड़ा नुकसान हुआ है। आपदा की इस घड़ी में प्रशासन व सरकार पूरी तरह से लोगों के साथ है। उन्होंने सभी प्रशासनिक अधिकारियों से प्रत्येक गांव की रिपोर्ट लेते हुए निर्देश दिए कि किसी भी गांव में पीने के पानी व खाने की कोई दिक्कत न हो। गांवों के रास्तों को जल्द से जल्द सुचारू किया जाए। उन्होंने उपायुक्त नेहा सिंह को निर्देश दिए कि वे जिला में यमुना के जलभराव से हुए नुकसान की रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजें। उन्होंने कहा कि जो भी नुकसान आपदा के मुआवजा नियमों में आता है वह किसानों को दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जो बोरवैल ठप हुए हैं उनकी रिपोर्ट भी तैयार कर सरकार को भेजें, ताकि मुख्यमंत्री मनोहर लाल से इसके लिए भी अनुरोध किया जा सके। उन्होंने भूमि कटाव के कारण टूटी सड़कों को जल्द दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं।
जजपा महासचिव हर्ष कुमार ने भी जाना लोगों का हाल
होडल। जजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व सिचाई मंत्री चौ. हर्ष कुमार ने पार्टी जिला अध्यक्ष देवेंद्र सिंह सौरोत के साथ यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर यमुना के साथ लगते गांव लहरपुर, फाटनगर, बिल्लोचपुर, अतवा, महोली, काशीपुर, सतुआगढी, शोरू का नंगला आदि गांवाें का जायजा लिया और ग्रामीणों से बातचीत की। हर्ष कुमार ने प्राकृतिक आपदा के समय में सभी को एकजुट होकर एक दूसरे का सहयोग करने को कहा। यमुना नदी के पानी जल स्तर के बाद घरों में सांप व अन्य जहारीले कीट घरों में प्रवेश कर रहे हैं। कई ग्रामीणों के घरों में दरारें आ चुकी हैं।