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कपास की फसलों में आफत बन रही सफेद मक्खी

Thu, 26 Aug 2021 10:51 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 26 Aug 2021 10:51 PM IST
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पलवल। जिले में बरसात के बाद कपास की फसल की बिजाई करने वाले किसानों के लिए सफेद मक्खी आफत बनकर आने लगी है। सफेद मक्खी से कपास की फसल खराब हो रही है। किसान राम अवतार, महेंद्र चौहान, चेतराम ने बताया कि फसल पर मक्खी बैठने लगी है। जिसे देख विभाग के अधिकारियों ने किसानों को अपनी फसल को सुरक्षित करने के लिए दिशा निर्देश भी जारी किए है।
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कृषि विशेषज्ञों के अनुसार अगस्त के अंतिम सप्ताह व सितंबर में कपास की फसल में सफेद मक्खी कीट आने की संभावना रहती है। समय से मक्खी का नियंत्रण नहीं हुआ तो उपज और उत्पाद की गुणवत्ता में काफी कमी आएगी। यह कीट कपास की फसल को काफी नुकसान पहुंचाता है, ऐसे में संक्रमण को रोकने के लिए डॉक्टरों की सलाह से दवाइयों का प्रयोग करें।
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इस कीट के लगने के बाद हरे कपास के पत्ते काले हो जाते हैं। इस प्रकार प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होती है। पौधा सूखना शुरू हो जाता है। तुरंत प्रभाव से कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेकर दवाओं का छिड़काव करने की सलाह दी जा रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए कांफीडोर और एकतारा नामक दवाओं का छिड़काव किया जा सकता है। इस बीमारी को दवाओं के छिड़काव से रोका जा सकता है। यदि एक बार बढ़ गई तो बाद में नियंत्रण करना मुश्किल हो जाता है।
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ऐसे करें सफेद मक्खी को खत्म
कृषि विभाग के उपमंडल अधिकारी कुलदीप तेवतिया ने कहा कि किसान अपने एक एकड़ की फसल में 2 किलोग्राम यूरिया में आधा किलोग्राम जिंक (21 प्रतिशत) के साथ इसे 200 लीटर पानी में मिलाकर लगाने से भी इस बीमारी से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। किसान कपास की फसल पर प्रति एकड़ एक लीटर नीम के तेल को 200 लीटर पानी में मिलाकर इसका छिड़काव करें तो सफेद मक्खी के प्रकोप को समाप्त किया जा सकता है।
क्या है सफेद मक्खी
सफेद मक्खी छोटा सा तेज उड़ने वाला पीले शरीर और सफेद पंख का कीड़ा है। छोटा एवं हल्के होने के कारण ये कीट हवा द्वारा एक से दूसरेे स्थान तक आसानी से चले जाते हैं। इसके अंडाकार शिशु पत्तों की निचली सतह पर चिपके रहकर रस चूसते रहते हैं। भूरे रंग के शिशु अवस्था पूरी होने के बाद वहीं पर यह प्यूपा में बदल जाते हैं। ग्रसित पौधे पीले व तैलीय दिखाई देते हैं। जिन्हें काली फंफूदी लग जाती है। यह कीड़े रस चूसकर फसल को नुकसान पहुंचाते हैं।

फसल में ज्यादा समय तक नहीं भरने दें पानी
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ महावीर सिंह ने बताया कि सफेद मक्खी को लेकर किसान को जागरूक रहना जरूरी है। कपास में ज्यादा समय तक बरसात का पानी एकत्रित न होने दें। एक पौधे पर मक्खी दिखाई दें उससे तुरंत खेत से बाहर फेंक दें।
फोटो 26पीएएलपी-6 में है।
कैप्शन: पलवल में एक खेत पर कपास की फसल
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