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Palwal News: नशा छुड़ाने का दावा, लाइसेंस गायब<bha>;</bha> केंद्र से 72 मरीज मुक्त
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पांच हजार रुपये तक लिए जाते थे हर माह
शहर से सटे असावटा गांव में जिला प्रशासन की संयुक्त जांच टीम ने मारा छापा
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। पलवल शहर से सटे असावटा गांव में बिना वैध लाइसेंस के संचालित नशा मुक्ति केंद्र से जिला प्रशासन की संयुक्त जांच टीम ने 72 मरीजों को छुड़ाया है। जांच के दौरान केंद्र का संचालक अधिकारियों के सामने संचालन से संबंधित लाइसेंस या अनुमति पत्र पेश नहीं कर सका। जिला प्रशासन की संयुक्त जांच टीम ने 24 अक्तूबर को उपायुक्त के आदेश पर असावटा स्थित योग एवं मेडिटेशन नशा मुक्ति केंद्र का औचक निरीक्षण किया था। टीम में जिला नागरिक अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपक और डीसीओ प्रवीण राठी सहित अन्य अधिकारी शामिल थे। मौके से मरीजों की प्रविष्टियों वाला रजिस्टर भी बरामद हुआ। जांच टीम को केंद्र में इलाज के लिए दवाइयां नहीं मिलीं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि इस आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मरीजों को किसी प्रकार का उपचार नहीं दिया जा रहा था।
संचालक पर प्राथमिकी दर्ज
जांच के दौरान सामने आया कि केंद्र में भर्ती मरीजों से हर माह चार से पांच हजार रुपये तक शुल्क लिया जा रहा था। केंद्र में मिले 72 मरीजों की संख्या के आधार पर अनुमान लगाया जाए तो मासिक शुल्क की राशि 2.88 लाख से 3.60 लाख रुपये तक हो सकती है। वास्तविक वसूली और केंद्र की कुल आय की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
अधिकारियों ने बताया कि छुड़ाए गए मरीजों को परिजनों के हवाले कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि गैर-कानूनी तरीके से नशा मुक्ति केंद्र चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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जांच टीम जब केंद्र पहुंची तो वहां असावटा निवासी अमित मिला। उसने खुद को केंद्र का संचालक बताया। अधिकारियों ने संचालन से संबंधित दस्तावेज मांगे, लेकिन वह कोई वैध लाइसेंस या अनुमति पत्र पेश नहीं कर सका। टीम ने मौके पर मौजूद व्यवस्थाओं और मरीजों के रिकॉर्ड की जांच की। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी की शिकायत पर कैंप थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
केंद्रों की वैधता की जांच जरूरी
नशे की लत से जूझ रहे लोगों और उनके परिजनों को उपचार के लिए केंद्र चुनते समय उसकी वैधता, उपलब्ध चिकित्सकीय सुविधाओं और प्रशिक्षित कर्मचारियों की जानकारी लेनी चाहिए। केवल नशा छुड़ाने का दावा करने वाले केंद्र पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है।
जिले में एक भी पंजीकृत नशा मुक्ति केंद्र नहीं
रिकॉर्ड के अनुसार, फिलहाल जिले में एक भी नशा मुक्ति केंद्र नही हैं। जिला अस्पताल में इससे जुड़ा मात्र एक छोटा सा क्लिनिक है। हालांकि, नियमों को ताक पर रखकर कई जगह अवैध रूप से मुक्ति केंद्र का संचालन किया जा रहा है, जो लोगों से मनमाना शुल्क वसूल रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से नियमित जांच नहीं की जाती। इस साल अब तक केवल दो बार ही ऐसे केंद्रों पर छापा मारा गया है।
अप्रैल में सीएम फ्लाइंग ने की थी कार्रवाई
पलवल की भाटिया कॉलोनी में अप्रैल में सीएम फ्लाइंग की टीम ने स्वास्थ्य विभाग और पुलिस के साथ मिलकर बिना लाइसेंस चल रहे नशा मुक्ति केंद्र का पर्दाफाश किया था। यह केंद्र योग एवं मेडिटेशन सेंटर के नाम पर संचालित किया जा रहा था। छापेमारी के दौरान केंद्र में 24 मरीज मिले थे, जबकि तलाशी में 84 मरीजों की फाइलें और उनके परिजनों के सहमति पत्र बरामद हुए थे। मरीजों से हर माह चार से पांच हजार रुपये फीस लिए जाने की बात सामने आई थी। टीम को मौके से दर्द निवारक दवाइयां और एंटीसेप्टिक सॉल्यूशन भी मिले थे। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी की शिकायत पर कैंप थाना पुलिस ने केंद्र के संचालक गुरवेंद्र के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी।
वर्जन
जिला उपायुक्त और सीएमओ के निर्देश पर टीम ने असावटा गांव स्थित नशा मुक्ति केंद्र का निरीक्षण किया। जांच के दौरान केंद्र संचालक संचालन से संबंधित वैध लाइसेंस या अनुमति पत्र पेश नहीं कर सका। - डॉ. दीपक, चिकित्सा अधिकारी, जिला नागरिक अस्पताल
जिले में जहां भी अवैध तरीके से नशा मुक्ति केंद्र संचालित किए जाने की सूचना मिलेगी, वहां स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करेगी। बिना वैध लाइसेंस के केंद्र चलाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। - डॉ. सतेंद्र वशिष्ठ, सीएमओ
यह कार्रवाई नारकोटिक्स कंट्रोल के निर्देशों से संबंधित है और जिले में इसके लिए गठित कमेटी पहले से ही प्रभावी ढंग से कार्य कर रही है। भविष्य में भी ऐसे बिना अनुमति संचालित केंद्रों की सूचना मिलने पर इसी प्रकार छापेमारी की जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. जयेन्द्र सिंह छिल्लर, उपायुक्त
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शहर से सटे असावटा गांव में जिला प्रशासन की संयुक्त जांच टीम ने मारा छापा
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। पलवल शहर से सटे असावटा गांव में बिना वैध लाइसेंस के संचालित नशा मुक्ति केंद्र से जिला प्रशासन की संयुक्त जांच टीम ने 72 मरीजों को छुड़ाया है। जांच के दौरान केंद्र का संचालक अधिकारियों के सामने संचालन से संबंधित लाइसेंस या अनुमति पत्र पेश नहीं कर सका। जिला प्रशासन की संयुक्त जांच टीम ने 24 अक्तूबर को उपायुक्त के आदेश पर असावटा स्थित योग एवं मेडिटेशन नशा मुक्ति केंद्र का औचक निरीक्षण किया था। टीम में जिला नागरिक अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपक और डीसीओ प्रवीण राठी सहित अन्य अधिकारी शामिल थे। मौके से मरीजों की प्रविष्टियों वाला रजिस्टर भी बरामद हुआ। जांच टीम को केंद्र में इलाज के लिए दवाइयां नहीं मिलीं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि इस आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मरीजों को किसी प्रकार का उपचार नहीं दिया जा रहा था।
संचालक पर प्राथमिकी दर्ज
जांच के दौरान सामने आया कि केंद्र में भर्ती मरीजों से हर माह चार से पांच हजार रुपये तक शुल्क लिया जा रहा था। केंद्र में मिले 72 मरीजों की संख्या के आधार पर अनुमान लगाया जाए तो मासिक शुल्क की राशि 2.88 लाख से 3.60 लाख रुपये तक हो सकती है। वास्तविक वसूली और केंद्र की कुल आय की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
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अधिकारियों ने बताया कि छुड़ाए गए मरीजों को परिजनों के हवाले कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि गैर-कानूनी तरीके से नशा मुक्ति केंद्र चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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जांच टीम जब केंद्र पहुंची तो वहां असावटा निवासी अमित मिला। उसने खुद को केंद्र का संचालक बताया। अधिकारियों ने संचालन से संबंधित दस्तावेज मांगे, लेकिन वह कोई वैध लाइसेंस या अनुमति पत्र पेश नहीं कर सका। टीम ने मौके पर मौजूद व्यवस्थाओं और मरीजों के रिकॉर्ड की जांच की। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी की शिकायत पर कैंप थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
केंद्रों की वैधता की जांच जरूरी
नशे की लत से जूझ रहे लोगों और उनके परिजनों को उपचार के लिए केंद्र चुनते समय उसकी वैधता, उपलब्ध चिकित्सकीय सुविधाओं और प्रशिक्षित कर्मचारियों की जानकारी लेनी चाहिए। केवल नशा छुड़ाने का दावा करने वाले केंद्र पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है।
जिले में एक भी पंजीकृत नशा मुक्ति केंद्र नहीं
रिकॉर्ड के अनुसार, फिलहाल जिले में एक भी नशा मुक्ति केंद्र नही हैं। जिला अस्पताल में इससे जुड़ा मात्र एक छोटा सा क्लिनिक है। हालांकि, नियमों को ताक पर रखकर कई जगह अवैध रूप से मुक्ति केंद्र का संचालन किया जा रहा है, जो लोगों से मनमाना शुल्क वसूल रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से नियमित जांच नहीं की जाती। इस साल अब तक केवल दो बार ही ऐसे केंद्रों पर छापा मारा गया है।
अप्रैल में सीएम फ्लाइंग ने की थी कार्रवाई
पलवल की भाटिया कॉलोनी में अप्रैल में सीएम फ्लाइंग की टीम ने स्वास्थ्य विभाग और पुलिस के साथ मिलकर बिना लाइसेंस चल रहे नशा मुक्ति केंद्र का पर्दाफाश किया था। यह केंद्र योग एवं मेडिटेशन सेंटर के नाम पर संचालित किया जा रहा था। छापेमारी के दौरान केंद्र में 24 मरीज मिले थे, जबकि तलाशी में 84 मरीजों की फाइलें और उनके परिजनों के सहमति पत्र बरामद हुए थे। मरीजों से हर माह चार से पांच हजार रुपये फीस लिए जाने की बात सामने आई थी। टीम को मौके से दर्द निवारक दवाइयां और एंटीसेप्टिक सॉल्यूशन भी मिले थे। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी की शिकायत पर कैंप थाना पुलिस ने केंद्र के संचालक गुरवेंद्र के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी।
वर्जन
जिला उपायुक्त और सीएमओ के निर्देश पर टीम ने असावटा गांव स्थित नशा मुक्ति केंद्र का निरीक्षण किया। जांच के दौरान केंद्र संचालक संचालन से संबंधित वैध लाइसेंस या अनुमति पत्र पेश नहीं कर सका। - डॉ. दीपक, चिकित्सा अधिकारी, जिला नागरिक अस्पताल
जिले में जहां भी अवैध तरीके से नशा मुक्ति केंद्र संचालित किए जाने की सूचना मिलेगी, वहां स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करेगी। बिना वैध लाइसेंस के केंद्र चलाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। - डॉ. सतेंद्र वशिष्ठ, सीएमओ
यह कार्रवाई नारकोटिक्स कंट्रोल के निर्देशों से संबंधित है और जिले में इसके लिए गठित कमेटी पहले से ही प्रभावी ढंग से कार्य कर रही है। भविष्य में भी ऐसे बिना अनुमति संचालित केंद्रों की सूचना मिलने पर इसी प्रकार छापेमारी की जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. जयेन्द्र सिंह छिल्लर, उपायुक्त