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Kurukshetra News: फिर भीगा धान, उठान में ढील व लापरवाही पड़ी भारी
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कुरुक्षेत्र। थानेसर अनाजमंडी में बारिश में भीगता व पानी में बहता हुआ धान। संवाद
कुरुक्षेत्र। अनाजमंडियों में अव्यवस्था के कारण किसानों और राइस मिलर्स की चिंता बढ़ गई है। बारिश के चलते बोरियों में भरा धान अंकुरित होने लगा है, वहीं खेतों में पकी फसल भी बिछ गई है।
चार दिन पहले हुई बारिश के बावजूद धान का उठान और खरीद तेज नहीं हो पाई। वीरवार सुबह हुई बारिश से करीब दो लाख मीट्रिक टन धान भीग गया। जिले में औसतन 10 एमएम बारिश हुई, जिससे अनाजमंडियों में खुले में पड़ा धान भीगा और खरीद-उठान बाधित रहा।
वीरवार को दिनभर में केवल 30130 मीट्रिक टन धान का उठान हुआ, जबकि खरीद महज 3828 मीट्रिक टन रही। वीरवार देर शाम तक कुल 498317 मीट्रिक टन धान खरीदा गया, पर उठान केवल 61 फीसदी (301414 मीट्रिक टन) ही हो सका। बुधवार देर रात तक भी 51 फीसदी धान का ही उठान हुआ था, जिससे करीब दो लाख मीट्रिक टन से धान खुले में पड़ा बारिश में भीगता रहा।
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सचिव बोले, बारिश से बचाने के किए गए प्रयास
मार्केट कमेटी सचिव हरजीत सिंह का कहना है कि बारिश से धान को बचाने के लिए प्रयास किए गए लेकिन अधिक मात्रा में धान होने के चलते पूरा धान नहीं ढका जा सका। बारिश ज्यादा नहीं हुई, जिसके चलते कुछ बचाव हुआ। अब मौसम खुलते ही उठान और तेज करवा दिया जाएगा। दो दिन पहले ही छह और कांटे प्रशासन ने मंजूर किए हैं ताकि तौल जल्दी हो और उठान तेज हो सके।
कोई सुनवाई करने वाला नहीं : बलविंद्र
आढ़ती बलविंद्र सिंह का कहना है कि 29 सितंबर से धान खरीद शुरू हुई थी लेकिन आज तक भी व्यवस्था समुचित नहीं हो पाई है, जिसका खामियाजा किसान, आढ़ती व मिलर्स को भुगतना पड़ रहा है।
धान पड़ जाएगा काला, नमी भी बढ़ेगी : जीत सिंह
सिरसमा गांव के किसान जीत सिंह का कहना है कि बारिश में जो धान की जो फसल गिर चुकी है, उसमें नुकसान की आशंका है। ज्यादा गिरी फसल का रंग काला पड़ने, अचानक सूख जाने का भी खतरा रहता है। यहां तक कि धान की फसलगिरने के बाद खेते में लगातार पानी रहा तो अंकुरित होने तक का खतरा रहता है। अनाजमंडियों में पूरा भाव मिलने की उम्मीद कम हो जाती है। उत्पादन भी घट जाता है।
बारिश से धान की फसल को भारी नुकसान
इस्माईलाबाद। मौसम बदलने से एक बार फिर किसानों की चिंता बढ़ गई। सुबह से दोपहर तक हुई बारिश से खेतों और मंडियों में धान सहित अन्य फसलों को भारी नुकसान का अनुमान है। किसान अनिल कुमार, सौरव, प्रदीप, मनदीप, तरसेम ने बताया कि वे पिछली बारिश से उबरने से पहले ही वीरवार को फिर फसलें बर्बाद हो गईं। मंडी में धान की खरीद और उठान धीमा होने से किसानों का धान भीग गया है। बारिश के कारण उठान और भुगतान रुक गया है, जिससे किसानों को रुपयों की किल्लत हो रही है। खेतों में पहले से डूबी धान की फसल अब बारिश और हवा से पूरी तरह नष्ट हो गई है। किसानों ने नुकसान के लिए मुआवजे की मांग की है।
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चार दिन पहले हुई बारिश के बावजूद धान का उठान और खरीद तेज नहीं हो पाई। वीरवार सुबह हुई बारिश से करीब दो लाख मीट्रिक टन धान भीग गया। जिले में औसतन 10 एमएम बारिश हुई, जिससे अनाजमंडियों में खुले में पड़ा धान भीगा और खरीद-उठान बाधित रहा।
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वीरवार को दिनभर में केवल 30130 मीट्रिक टन धान का उठान हुआ, जबकि खरीद महज 3828 मीट्रिक टन रही। वीरवार देर शाम तक कुल 498317 मीट्रिक टन धान खरीदा गया, पर उठान केवल 61 फीसदी (301414 मीट्रिक टन) ही हो सका। बुधवार देर रात तक भी 51 फीसदी धान का ही उठान हुआ था, जिससे करीब दो लाख मीट्रिक टन से धान खुले में पड़ा बारिश में भीगता रहा।
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सचिव बोले, बारिश से बचाने के किए गए प्रयास
मार्केट कमेटी सचिव हरजीत सिंह का कहना है कि बारिश से धान को बचाने के लिए प्रयास किए गए लेकिन अधिक मात्रा में धान होने के चलते पूरा धान नहीं ढका जा सका। बारिश ज्यादा नहीं हुई, जिसके चलते कुछ बचाव हुआ। अब मौसम खुलते ही उठान और तेज करवा दिया जाएगा। दो दिन पहले ही छह और कांटे प्रशासन ने मंजूर किए हैं ताकि तौल जल्दी हो और उठान तेज हो सके।
कोई सुनवाई करने वाला नहीं : बलविंद्र
आढ़ती बलविंद्र सिंह का कहना है कि 29 सितंबर से धान खरीद शुरू हुई थी लेकिन आज तक भी व्यवस्था समुचित नहीं हो पाई है, जिसका खामियाजा किसान, आढ़ती व मिलर्स को भुगतना पड़ रहा है।
धान पड़ जाएगा काला, नमी भी बढ़ेगी : जीत सिंह
सिरसमा गांव के किसान जीत सिंह का कहना है कि बारिश में जो धान की जो फसल गिर चुकी है, उसमें नुकसान की आशंका है। ज्यादा गिरी फसल का रंग काला पड़ने, अचानक सूख जाने का भी खतरा रहता है। यहां तक कि धान की फसलगिरने के बाद खेते में लगातार पानी रहा तो अंकुरित होने तक का खतरा रहता है। अनाजमंडियों में पूरा भाव मिलने की उम्मीद कम हो जाती है। उत्पादन भी घट जाता है।
बारिश से धान की फसल को भारी नुकसान
इस्माईलाबाद। मौसम बदलने से एक बार फिर किसानों की चिंता बढ़ गई। सुबह से दोपहर तक हुई बारिश से खेतों और मंडियों में धान सहित अन्य फसलों को भारी नुकसान का अनुमान है। किसान अनिल कुमार, सौरव, प्रदीप, मनदीप, तरसेम ने बताया कि वे पिछली बारिश से उबरने से पहले ही वीरवार को फिर फसलें बर्बाद हो गईं। मंडी में धान की खरीद और उठान धीमा होने से किसानों का धान भीग गया है। बारिश के कारण उठान और भुगतान रुक गया है, जिससे किसानों को रुपयों की किल्लत हो रही है। खेतों में पहले से डूबी धान की फसल अब बारिश और हवा से पूरी तरह नष्ट हो गई है। किसानों ने नुकसान के लिए मुआवजे की मांग की है।

कुरुक्षेत्र। थानेसर अनाजमंडी में बारिश में भीगता व पानी में बहता हुआ धान। संवाद

कुरुक्षेत्र। थानेसर अनाजमंडी में बारिश में भीगता व पानी में बहता हुआ धान। संवाद

कुरुक्षेत्र। थानेसर अनाजमंडी में बारिश में भीगता व पानी में बहता हुआ धान। संवाद