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Kurukshetra News: शिक्षा नीति के विरोध में शिक्षकों ने शाहाबाद ब्लॉक में दिया धरना
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कुरुक्षेत्र। हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा से संबद्ध ब्लॉक थानेसर इकाई ने बुधवार को खंड शिक्षा अधिकारी शाहाबाद कार्यालय पर धरना प्रदर्शन कर खंड शिक्षा अधिकारी बिजेंद्र सिंह के सहायक को ज्ञापन सौंपा।
खंड प्रधान हरकेश कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की आड़ में सरकार सरकारी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। सरकार बार-बार वादे करके भी उन्हें लागू नहीं कर रही, जिससे शिक्षकों में नाराजगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसएमसी की यूनिट के नाम पर करीब पांच हजार स्कूलों को मर्ज करने की योजना बनाई जा रही है, जो ग्रामीण शिक्षा के लिए नुकसानदायक है।
जिला प्रधान वीरेंद्र सिंह ने कहा कि रूल 2012 के तहत 50 अंकों की शर्त के चलते सरकार कई शिक्षकों को एसीपी लाभ नहीं दे रही, जबकि उनकी नियुक्ति इन नियमों के लागू होने से पहले की गई थी। उन्होंने तबादला नीति में पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि सभी अध्यापकों के तबादले अप्रैल तक हो जाने चाहिए थे, लेकिन अब तक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। उनकी मांग है कि प्राथमिक शिक्षकों और अतिथि अध्यापकों को भी ट्रांसफर ड्राइव में शामिल किया जाए।
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पीजीटी फाइन आर्ट व फिजिकल एजुकेशन के पदों के सृजन में विद्यार्थी संख्या की शर्त हटाने की मांग भी उठाई गई। इसके साथ ही प्राथमिक स्तर पर प्रत्येक कक्षा में अध्यापक उपलब्ध करवाने और सभी विषयों के पीरियड सप्ताह में छह से कम न करने की बात कही। संघ ने कौशल शिक्षा के अध्यापकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने और चिराग योजना के बहाने सरकारी स्कूलों से बच्चों का पलायन रोकने की भी मांग की। शिक्षकों का कहना था कि उन्हें बार-बार ऑनलाइन ट्रेनिंग और गैर-शैक्षणिक कार्यों में उलझाया जा रहा है, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इस मौके पर राज्य सचिव रामेश्वर, जिला कोषाध्यक्ष बलवीर सिंह, जय सिंह हुड्डा, खंड सचिव शेर सिंह, सुरेंद्र, संदीप, फिरोज सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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खंड प्रधान हरकेश कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की आड़ में सरकार सरकारी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। सरकार बार-बार वादे करके भी उन्हें लागू नहीं कर रही, जिससे शिक्षकों में नाराजगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसएमसी की यूनिट के नाम पर करीब पांच हजार स्कूलों को मर्ज करने की योजना बनाई जा रही है, जो ग्रामीण शिक्षा के लिए नुकसानदायक है।
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जिला प्रधान वीरेंद्र सिंह ने कहा कि रूल 2012 के तहत 50 अंकों की शर्त के चलते सरकार कई शिक्षकों को एसीपी लाभ नहीं दे रही, जबकि उनकी नियुक्ति इन नियमों के लागू होने से पहले की गई थी। उन्होंने तबादला नीति में पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि सभी अध्यापकों के तबादले अप्रैल तक हो जाने चाहिए थे, लेकिन अब तक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। उनकी मांग है कि प्राथमिक शिक्षकों और अतिथि अध्यापकों को भी ट्रांसफर ड्राइव में शामिल किया जाए।
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पीजीटी फाइन आर्ट व फिजिकल एजुकेशन के पदों के सृजन में विद्यार्थी संख्या की शर्त हटाने की मांग भी उठाई गई। इसके साथ ही प्राथमिक स्तर पर प्रत्येक कक्षा में अध्यापक उपलब्ध करवाने और सभी विषयों के पीरियड सप्ताह में छह से कम न करने की बात कही। संघ ने कौशल शिक्षा के अध्यापकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने और चिराग योजना के बहाने सरकारी स्कूलों से बच्चों का पलायन रोकने की भी मांग की। शिक्षकों का कहना था कि उन्हें बार-बार ऑनलाइन ट्रेनिंग और गैर-शैक्षणिक कार्यों में उलझाया जा रहा है, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इस मौके पर राज्य सचिव रामेश्वर, जिला कोषाध्यक्ष बलवीर सिंह, जय सिंह हुड्डा, खंड सचिव शेर सिंह, सुरेंद्र, संदीप, फिरोज सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।