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Kurukshetra News: रत्नावली के लिए सजने लगे स्टॉल, छात्र-छात्राओं ने शुरू की रिहर्सल
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कुरुक्षेत्र। रत्नावली को लेकर स्टाल की तैयारियां करते श्रमिक। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। रत्नावली महोत्सव के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय परिसर में तैयारियां तेज हो गई हैं। महोत्सव के मुख्य आकर्षण क्राफ्ट विला और खानपान के स्टॉल सजने लगे हैं। मुख्य मैदान में दुकानों के लिए बांस-बल्लियां लगाने का काम शुरू हो गया है। कारीगर और विद्यार्थी महोत्सव की तैयारियों में जुटे हैं। रत्नावली महोत्सव 30 अक्तूबर से 2 नवंबर तक आयोजित होगा।
महोत्सव में हरियाणवी संस्कृति, लोक कलाओं और पारंपरिक खानपान की झलक देखने को मिलेगी। अलग-अलग राज्यों और हरियाणा के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले शिल्पकारों व दुकानदारों के लिए पंडाल तैयार किए जा रहे हैं। मंच और अतिथियों के बैठने की व्यवस्था की जा रही है। इतना हीं नहीं, विद्यार्थी हरियाणवी सांग, लूर नृत्य और रागनी प्रतियोगिताओं सहित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए रिहर्सल कर रहे हैं।
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मीडिया चौपाल से लोक संस्कृति को मिलेगा नया मंच
इस बार के महोत्सव में हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. महासिंह पूनिया की अगुवाई में हरियाणवी मीडिया चौपाल का आयोजन किया जाएगा। जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान इसमें सहयोग करेगा। चौपाल में हरियाणा की लोक परंपराओं, लोकगीतों, लोक नृत्यों, पारंपरिक वाद्य यंत्रों और ग्रामीण जीवन को पॉडकास्ट, रील, फोटोग्राफी और डॉक्यूमेंट्री से प्रस्तुत किया जाएगा। इसका उद्देश्य लोक संस्कृति का संरक्षण करना और युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है।
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पहले दिन शुरू होंगी ये सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं
महोत्सव के पहले दिन 30 अक्तूबर को ऑडिटोरियम में हरियाणवी लोक नृत्य, पॉप सांग और लोकगीत प्रतियोगिताएं होंगी। आरके सदन में हरियाणवी भजन और युगल रागनी, ओपन एयर थिएटर में एकल नृत्य और रागनी प्रतियोगिताएं हाेंगी। वहीं, सिनेट हॉल में हरियाणवी भाषा और बोली से संबंधित प्रतियोगिताएं होंगी। 31 अक्तूबर को महिला एकल नृत्य, हरियाणवी लोक नृत्य, फैशन शो, लोक ऑर्केस्ट्रा, लोकगीत और हरियाणवी गजल की प्रस्तुतियां होंगी। इसके अलावा हरियाणवी स्किट, रॉक बैंड, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता और सांग मंचन भी होगा। पारंपरिक वस्तुओं की प्रदर्शनी में बोहिया, डोली, पिंजरा, बर्तन और अन्य सांस्कृतिक वस्तुएं प्रदर्शित की जाएंगी। महोत्सव के अंतिम दिन 2 नवंबर को हरियाणवी समूह नृत्य और रागनी प्रतियोगिता होंगी, जिसके बाद पुरस्कार वितरण किया जाएगा।
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कुरुक्षेत्र। रत्नावली महोत्सव के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय परिसर में तैयारियां तेज हो गई हैं। महोत्सव के मुख्य आकर्षण क्राफ्ट विला और खानपान के स्टॉल सजने लगे हैं। मुख्य मैदान में दुकानों के लिए बांस-बल्लियां लगाने का काम शुरू हो गया है। कारीगर और विद्यार्थी महोत्सव की तैयारियों में जुटे हैं। रत्नावली महोत्सव 30 अक्तूबर से 2 नवंबर तक आयोजित होगा।
महोत्सव में हरियाणवी संस्कृति, लोक कलाओं और पारंपरिक खानपान की झलक देखने को मिलेगी। अलग-अलग राज्यों और हरियाणा के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले शिल्पकारों व दुकानदारों के लिए पंडाल तैयार किए जा रहे हैं। मंच और अतिथियों के बैठने की व्यवस्था की जा रही है। इतना हीं नहीं, विद्यार्थी हरियाणवी सांग, लूर नृत्य और रागनी प्रतियोगिताओं सहित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए रिहर्सल कर रहे हैं।
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मीडिया चौपाल से लोक संस्कृति को मिलेगा नया मंच
इस बार के महोत्सव में हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. महासिंह पूनिया की अगुवाई में हरियाणवी मीडिया चौपाल का आयोजन किया जाएगा। जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान इसमें सहयोग करेगा। चौपाल में हरियाणा की लोक परंपराओं, लोकगीतों, लोक नृत्यों, पारंपरिक वाद्य यंत्रों और ग्रामीण जीवन को पॉडकास्ट, रील, फोटोग्राफी और डॉक्यूमेंट्री से प्रस्तुत किया जाएगा। इसका उद्देश्य लोक संस्कृति का संरक्षण करना और युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है।
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पहले दिन शुरू होंगी ये सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं
महोत्सव के पहले दिन 30 अक्तूबर को ऑडिटोरियम में हरियाणवी लोक नृत्य, पॉप सांग और लोकगीत प्रतियोगिताएं होंगी। आरके सदन में हरियाणवी भजन और युगल रागनी, ओपन एयर थिएटर में एकल नृत्य और रागनी प्रतियोगिताएं हाेंगी। वहीं, सिनेट हॉल में हरियाणवी भाषा और बोली से संबंधित प्रतियोगिताएं होंगी। 31 अक्तूबर को महिला एकल नृत्य, हरियाणवी लोक नृत्य, फैशन शो, लोक ऑर्केस्ट्रा, लोकगीत और हरियाणवी गजल की प्रस्तुतियां होंगी। इसके अलावा हरियाणवी स्किट, रॉक बैंड, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता और सांग मंचन भी होगा। पारंपरिक वस्तुओं की प्रदर्शनी में बोहिया, डोली, पिंजरा, बर्तन और अन्य सांस्कृतिक वस्तुएं प्रदर्शित की जाएंगी। महोत्सव के अंतिम दिन 2 नवंबर को हरियाणवी समूह नृत्य और रागनी प्रतियोगिता होंगी, जिसके बाद पुरस्कार वितरण किया जाएगा।

कुरुक्षेत्र। रत्नावली को लेकर स्टाल की तैयारियां करते श्रमिक। संवाद