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Kurukshetra News: पिंडदान, तर्पण कर मांगी पितरों की अक्षय तृप्ति
Tue, 09 Apr 2024 03:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 09 Apr 2024 03:54 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। सोमवती अमावस्या पर सूर्यास्त की डुबकी और दीपदान के साथ ही पिहोवा का तीन दिवसीय चैत्र चौदस मेला संपन्न हो गया।देश के दूर-दराज इलाके से लाखों श्रद्धालु अपने पितरों के निमित्त पिंडदान, गति और तर्पण कराने पहुंचे। सूर्योदय के साथ ही श्रद्धालु पावन सरस्वती तीर्थ पर स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच गए थे। श्रद्धालुओं ने तीर्थ पुरोहितों के पास अपनी वंशावली देखी। साथ ही पुराने बाजार में दरगाही शाह को घोड़े अर्पित किए। वहीं ब्रह्मसरोवर और सन्निहित सरोवर पर भी श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई।
मेले के तीसरे दिन भी पुलिस और अन्य तरह की प्रशासनिक व्यवस्था नजर नहीं आई। मेले के लिए शहर में जगह-जगह लगाए गए नाकों से पुलिसकर्मी गायब रहे। पुलिसकर्मी के नहीं होने के कारण जेबकतरों ने कई श्रद्धालुओं का अपना शिकार बनाया। जेबकतरों ने किसी की जेब से पर्स निकाल लिया तो किसी का पूरा बैग ही साफ कर दिया। मौके पर पुलिस सहायता न मिलने पर श्रद्धालु प्रशासन को कोसते नजर आए। इसके अलावा शहर में बेरोकटोक वाहन चलते रहे। हालांकि मेले में प्रवेश करने के लिए प्रशासन की ओर से वाहनों के लिए पास वितरित किए थे, मगर बगैर पास के वाहन चलते दिखे।
वहीं सरस्वती चौक के पास वाहनों के प्रवेश के कारण जाम लग गया। प्रशासन ने श्रद्धालुओं के वाहनों को शहर के बाहर ही रोकने के लिए पार्किंग बनाई थी, मगर शहर में आने वाले नाकों पर कोई रोक न होने के कारण श्रद्धालु सरस्वती तीर्थ तक पहुंच गए। इससे सरस्वती चौक से शहर के बीच में लंबा जाम लग गया। इस जाम के कारण पैदल चल रहे श्रद्धालुओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जाम से निकलने के लिए श्रद्धालु जूझते रहे। काफी देर के बाद में वाहनों के निकलने के बाद जाम से कुछ राहत मिली।
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मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए नगर वासियों व विभिन्न शहरों से आए लोगों ने भंडारे लगाकर भोजन कराया। श्रद्धालुओं ने पूरे मन से भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। वहीं जिला सूचना एवं जन संपर्क विभाग के कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया। कलाकारों ने गीतों व भजनों के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों से बचाव के लिए जागरूक किया।
देश के कोने-कोने से आए लाखों श्रद्धालुओं ने मेला क्षेत्र में लगी दुकानों से जमकर खरीददारी की। दुकानदारों ने बच्चों के लिए प्लास्टिक, लकड़ी व लोहे से बनाए गए आकर्षक खिलौने रखे हुए थे। हर दुकान पर खिलौने खरीदने और देखने वालों की भीड़ लगी रही। इसके अलावा मेले में श्रद्धालुओं ने विशेषतौर पर लगे खजले की मिठाई का स्वाद चखा।
पितरों मिलता है मोक्ष ः पवन
जींद से आए पवन कुमार ने बताया कि सोमवती अमावस पर पवित्र नदी और तीर्थ में स्नान करने का महत्व है।यहां पिंडदान करने से पितरों को अक्षय मोक्ष की प्राप्ति होती है। पुराणों के अनुसार पांडवों के बड़े भाई युधिष्ठिर ने महाभारत के युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए अपने सगे संबंधियों का यहीं पिंडदान कराया था।
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कुरुक्षेत्र। सोमवती अमावस्या पर सूर्यास्त की डुबकी और दीपदान के साथ ही पिहोवा का तीन दिवसीय चैत्र चौदस मेला संपन्न हो गया।देश के दूर-दराज इलाके से लाखों श्रद्धालु अपने पितरों के निमित्त पिंडदान, गति और तर्पण कराने पहुंचे। सूर्योदय के साथ ही श्रद्धालु पावन सरस्वती तीर्थ पर स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच गए थे। श्रद्धालुओं ने तीर्थ पुरोहितों के पास अपनी वंशावली देखी। साथ ही पुराने बाजार में दरगाही शाह को घोड़े अर्पित किए। वहीं ब्रह्मसरोवर और सन्निहित सरोवर पर भी श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई।
मेले के तीसरे दिन भी पुलिस और अन्य तरह की प्रशासनिक व्यवस्था नजर नहीं आई। मेले के लिए शहर में जगह-जगह लगाए गए नाकों से पुलिसकर्मी गायब रहे। पुलिसकर्मी के नहीं होने के कारण जेबकतरों ने कई श्रद्धालुओं का अपना शिकार बनाया। जेबकतरों ने किसी की जेब से पर्स निकाल लिया तो किसी का पूरा बैग ही साफ कर दिया। मौके पर पुलिस सहायता न मिलने पर श्रद्धालु प्रशासन को कोसते नजर आए। इसके अलावा शहर में बेरोकटोक वाहन चलते रहे। हालांकि मेले में प्रवेश करने के लिए प्रशासन की ओर से वाहनों के लिए पास वितरित किए थे, मगर बगैर पास के वाहन चलते दिखे।
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वहीं सरस्वती चौक के पास वाहनों के प्रवेश के कारण जाम लग गया। प्रशासन ने श्रद्धालुओं के वाहनों को शहर के बाहर ही रोकने के लिए पार्किंग बनाई थी, मगर शहर में आने वाले नाकों पर कोई रोक न होने के कारण श्रद्धालु सरस्वती तीर्थ तक पहुंच गए। इससे सरस्वती चौक से शहर के बीच में लंबा जाम लग गया। इस जाम के कारण पैदल चल रहे श्रद्धालुओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जाम से निकलने के लिए श्रद्धालु जूझते रहे। काफी देर के बाद में वाहनों के निकलने के बाद जाम से कुछ राहत मिली।
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मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए नगर वासियों व विभिन्न शहरों से आए लोगों ने भंडारे लगाकर भोजन कराया। श्रद्धालुओं ने पूरे मन से भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। वहीं जिला सूचना एवं जन संपर्क विभाग के कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया। कलाकारों ने गीतों व भजनों के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों से बचाव के लिए जागरूक किया।
देश के कोने-कोने से आए लाखों श्रद्धालुओं ने मेला क्षेत्र में लगी दुकानों से जमकर खरीददारी की। दुकानदारों ने बच्चों के लिए प्लास्टिक, लकड़ी व लोहे से बनाए गए आकर्षक खिलौने रखे हुए थे। हर दुकान पर खिलौने खरीदने और देखने वालों की भीड़ लगी रही। इसके अलावा मेले में श्रद्धालुओं ने विशेषतौर पर लगे खजले की मिठाई का स्वाद चखा।
पितरों मिलता है मोक्ष ः पवन
जींद से आए पवन कुमार ने बताया कि सोमवती अमावस पर पवित्र नदी और तीर्थ में स्नान करने का महत्व है।यहां पिंडदान करने से पितरों को अक्षय मोक्ष की प्राप्ति होती है। पुराणों के अनुसार पांडवों के बड़े भाई युधिष्ठिर ने महाभारत के युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए अपने सगे संबंधियों का यहीं पिंडदान कराया था।