{"_id":"6902653b4941a845440c37d4","slug":"ratnavali-festival-is-preserving-rural-folk-art-and-culture-on-the-digital-path-kurukshetra-news-c-45-1-kur1001-144562-2025-10-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kurukshetra News: ग्रामीण लोक कला एवं संस्कृति को संरक्षित कर रहा रत्नावली महोत्सव डिजिटल राह पर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kurukshetra News: ग्रामीण लोक कला एवं संस्कृति को संरक्षित कर रहा रत्नावली महोत्सव डिजिटल राह पर
Thu, 30 Oct 2025 12:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Thu, 30 Oct 2025 12:34 AM IST
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। हरियाणवी लोक परिधान में संस्कृति को दर्शाती कलाकार। संवाद
- फोटो : 1
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का सबसे बड़ा व ग्रामीण लोक कला एवं संस्कृति को जीवंत व संरक्षित कर रहा रत्नावली महोत्सव अब पूरी तरह से डिजिटल की राह पर आ गया है। आधुनिकता के युग में महोत्सव डिजिटल होने के चलते न केवल लाखों लोगों तक तत्काल पहुंच रहा है बल्कि इसमें विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं भी नए-नए प्रयोग कर तकनीक को सफलता का माध्यम बना रहे हैं।
विश्वविद्यालय के ही छात्र-छात्राओं ने एप तैयार की है, जिस पर क्लिक करते ही न केवल महोत्सव में सज रहे सभी छह मंचों पर हो रहे कार्यक्रमों का पूरा खाका मोबाइल पर आ जाता है बल्कि इन मंचों की लोकेशन से लेकर अन्य पूरी जानकारी तक भी मिल जाती है। प्ले स्टोर पर उपलब्ध इस एप के जरिये आयोजन का प्रबंधन भी बेहद आसान हो गया है। एप संस्थापक एवं लॉ फाइनल ईयर की छात्रा अंशप्रीत कौर, सह संस्थापक एवं आईआईएचएस विभाग के छात्र गुरकीरत और लॉ प्रथम वर्ष की छात्रा एवं स्वयंसेवक तनीषा बताती हैं कि इस पर क्लिक कर पूरी जानकारी सामने होती है कि किसी मंच पर कौन कलाकार व स्वयंसेवक पहुंचा है और फिलहाल कौन सा कार्यक्रम चल रहा है। यही नहीं इस पर ही एक-दूसरे को संदेश तक पहुंचाया जा सकता है। उनका कहना है कि इस एप के जरिये हर छोटे से लेकर बड़े आयोजन का भी सफलतापूर्वक प्रबंधन किया जा सकता है। युवा एवं सांस्कृतिक विभाग के निदेशक डॉ. विवेक चावला का कहना है कि सार्थक गर्ग व अन्य विद्यार्थियों ने इस बार विशेष एप तैयार कर महोत्सव का प्रबंधन बेहद आसान कर दिया है।
हर स्वयंसेवक के कार्ड पर क्यू आर कोड
महोत्सव में यह पहला प्रयोग किया गया है कि टीम रत्नावली में शामिल करीब 200 छात्र-छात्राओं से लेकर सभी संयोजक, शिक्षक व अन्य संबंधित लोगों के लिए तैयार किए गए आईकार्ड पर क्यूआर कोड दिया गया है। इस पर एक क्लिक करते ही पूरा महोत्सव सामने होता है। इसके जरिये सभी स्वयंसेवक भी सूचनाएं आसानी से प्रेषित कर रहे हैं।
विज्ञापन
पॉडकास्ट के जरिये दूर तक फैल रहा संदेश
महोत्सव में इस बार पॉडकास्ट रिकाॅर्ड करने का नया प्रयोग किया गया है जिसके जरिये कलाकारों, मेहमानों का संदेश सोशल मीडिया के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाया जा रहा है। इसके संयोजक डॉ. महासिंह पूनिया का कहना है कि पॉडकास्ट आज के समय में प्रचलित माध्यम बन चुका है। इसके जरिये कलाकारों से लेकर अतिथियों से की जाने वाली चर्चाएं रील के रूप में हर व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास है। इसके प्रति युवाओं में खास आकर्षण है।
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का सबसे बड़ा व ग्रामीण लोक कला एवं संस्कृति को जीवंत व संरक्षित कर रहा रत्नावली महोत्सव अब पूरी तरह से डिजिटल की राह पर आ गया है। आधुनिकता के युग में महोत्सव डिजिटल होने के चलते न केवल लाखों लोगों तक तत्काल पहुंच रहा है बल्कि इसमें विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं भी नए-नए प्रयोग कर तकनीक को सफलता का माध्यम बना रहे हैं।
विश्वविद्यालय के ही छात्र-छात्राओं ने एप तैयार की है, जिस पर क्लिक करते ही न केवल महोत्सव में सज रहे सभी छह मंचों पर हो रहे कार्यक्रमों का पूरा खाका मोबाइल पर आ जाता है बल्कि इन मंचों की लोकेशन से लेकर अन्य पूरी जानकारी तक भी मिल जाती है। प्ले स्टोर पर उपलब्ध इस एप के जरिये आयोजन का प्रबंधन भी बेहद आसान हो गया है। एप संस्थापक एवं लॉ फाइनल ईयर की छात्रा अंशप्रीत कौर, सह संस्थापक एवं आईआईएचएस विभाग के छात्र गुरकीरत और लॉ प्रथम वर्ष की छात्रा एवं स्वयंसेवक तनीषा बताती हैं कि इस पर क्लिक कर पूरी जानकारी सामने होती है कि किसी मंच पर कौन कलाकार व स्वयंसेवक पहुंचा है और फिलहाल कौन सा कार्यक्रम चल रहा है। यही नहीं इस पर ही एक-दूसरे को संदेश तक पहुंचाया जा सकता है। उनका कहना है कि इस एप के जरिये हर छोटे से लेकर बड़े आयोजन का भी सफलतापूर्वक प्रबंधन किया जा सकता है। युवा एवं सांस्कृतिक विभाग के निदेशक डॉ. विवेक चावला का कहना है कि सार्थक गर्ग व अन्य विद्यार्थियों ने इस बार विशेष एप तैयार कर महोत्सव का प्रबंधन बेहद आसान कर दिया है।
विज्ञापन
हर स्वयंसेवक के कार्ड पर क्यू आर कोड
महोत्सव में यह पहला प्रयोग किया गया है कि टीम रत्नावली में शामिल करीब 200 छात्र-छात्राओं से लेकर सभी संयोजक, शिक्षक व अन्य संबंधित लोगों के लिए तैयार किए गए आईकार्ड पर क्यूआर कोड दिया गया है। इस पर एक क्लिक करते ही पूरा महोत्सव सामने होता है। इसके जरिये सभी स्वयंसेवक भी सूचनाएं आसानी से प्रेषित कर रहे हैं।
विज्ञापन
पॉडकास्ट के जरिये दूर तक फैल रहा संदेश
महोत्सव में इस बार पॉडकास्ट रिकाॅर्ड करने का नया प्रयोग किया गया है जिसके जरिये कलाकारों, मेहमानों का संदेश सोशल मीडिया के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाया जा रहा है। इसके संयोजक डॉ. महासिंह पूनिया का कहना है कि पॉडकास्ट आज के समय में प्रचलित माध्यम बन चुका है। इसके जरिये कलाकारों से लेकर अतिथियों से की जाने वाली चर्चाएं रील के रूप में हर व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास है। इसके प्रति युवाओं में खास आकर्षण है।

कुरुक्षेत्र। हरियाणवी लोक परिधान में संस्कृति को दर्शाती कलाकार। संवाद- फोटो : 1

कुरुक्षेत्र। हरियाणवी लोक परिधान में संस्कृति को दर्शाती कलाकार। संवाद- फोटो : 1