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Kurukshetra News: एनएचएम कर्मियों ने पीपीई किट पहनकर बिरला मंदिर तक मांगी भीख
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कुरुक्षेत्र। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत कर्मियों ने एलएनजेपी अस्पताल से बिरला मंदिर तक रोष मार्च निकाला। इस दौरान कर्मियों ने राहगीरों, दुकानदार और रेहड़ी वालों से भीख मांगी। आज बुधवार को कर्मी रोष व्यक्त करते हुए पिपली तक पहुंचेंगे। मंगलवार को कर्मियों ने भीख मांगकर सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त किया। मास्क लगाकर व पीपीई किट पहनकर कर्मियों ने हाथ में कटोरा लेकर दुकानदार और राहगीरों से भीख मांगते हुए बिरला मंदिर तक पहुंचे। भीख में उनको डेढ़ दर्जन केले, छह आम और 1703 रुपये मिले। फल को कर्मियों ने आपस में बांट लिया और रुपये आंदोलन के खर्च में डाल दिए।
साझा मोर्चा की तरफ से अनिता ने बताया कि वे 18 दिन से लगातार नियमितीकरण की मांग के समर्थन में सीएमओ कार्यालय के बाहर आंदोलनरत हैं, लेकिन सरकार और विभाग के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। विरोध स्वरूप कर्मियों को मजबूरन क्रमिक अनशन, मुंडन और भीख मांगने के लिए सड़कों पर उतारना पड़ रहा है। कर्मी 27 साल से अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं, मगर सरकार उनका शोषण करने पर तुली हुई है। उनका दैनिक वेतन 363 रुपये मनरेगा के तहत मिलने वाली दैनिक मजदूरी से भी कम है।
राज्य कोषाध्यक्ष पंकज आत्रेय ने बताया कि शुरुआत में उनको पांच साल तक मात्र 7,580 रुपये प्रतिमाह (करीब 252 रुपये प्रतिदिन) मिलते रहे। विगत 10 साल में भी इसमें कोई ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है। एनएचएम कर्मी नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा के प्रति वचनबद्ध है। इस कारण प्रदेश में मातृत्व व शिशु मृत्यु दर देश में सबसे कम है। अगर सरकार उनकी सुनवाई नहीं करेगी तो उनका आंदोलन जारी रहेगा। वे सड़कों पर उतरकर जनता को सरकार की नाकामी से अवगत कराएंगे।
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साझा मोर्चा की तरफ से अनिता ने बताया कि वे 18 दिन से लगातार नियमितीकरण की मांग के समर्थन में सीएमओ कार्यालय के बाहर आंदोलनरत हैं, लेकिन सरकार और विभाग के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। विरोध स्वरूप कर्मियों को मजबूरन क्रमिक अनशन, मुंडन और भीख मांगने के लिए सड़कों पर उतारना पड़ रहा है। कर्मी 27 साल से अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं, मगर सरकार उनका शोषण करने पर तुली हुई है। उनका दैनिक वेतन 363 रुपये मनरेगा के तहत मिलने वाली दैनिक मजदूरी से भी कम है।
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राज्य कोषाध्यक्ष पंकज आत्रेय ने बताया कि शुरुआत में उनको पांच साल तक मात्र 7,580 रुपये प्रतिमाह (करीब 252 रुपये प्रतिदिन) मिलते रहे। विगत 10 साल में भी इसमें कोई ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है। एनएचएम कर्मी नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा के प्रति वचनबद्ध है। इस कारण प्रदेश में मातृत्व व शिशु मृत्यु दर देश में सबसे कम है। अगर सरकार उनकी सुनवाई नहीं करेगी तो उनका आंदोलन जारी रहेगा। वे सड़कों पर उतरकर जनता को सरकार की नाकामी से अवगत कराएंगे।
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