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कौतूहल बना पैनोरमा का धैर्य परीक्षण यंत्र
ब्यूरो/अमर उजाला कुरुक्षेत्र
Updated Wed, 02 Sep 2015 12:59 AM IST
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वैज्ञानिक सोच और विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए कुरुक्षेत्र पैनोरमा एवं विज्ञान केंद्र कार्य करता रहता है। यहां पर स्थिरता और दक्षता जांचने के लिए धैर्य परीक्षण प्रोजेक्ट स्थापित किया गया है। यह व्यक्ति के शरीर के अंग, आंख, हाथ और दिमाग के कुशल सामंजस्य के बारे में बताता है।
करीब 20 हजार की लागत से एक माह पहले बना यह प्रोजेक्ट हर एक को आकर्षित कर रहा है। प्रतिदिन सैकड़ों पर्यटक इसे देखने आ रहे हैं और स्वयं का परीक्षण कर अपनी दक्षता को परखते हैं।
प्रोजेक्ट का आधार
कुरुक्षेत्र पैनोरमा एवं विज्ञान केंद्र में बनाए गए धैर्य परीक्षण में व्यक्ति के हाथ, दिमाग और आंख के सामंजस्य का स्तर पता चलता है।
परीक्षण करने वाला जितने कम समय में यानी 4 से 5 बीप की आवाज किए इसे पूरा करता है तो उसके हाथ, दिमाग और आंख का सांमजस्य बेहतर है। वह बेहतर आईक्यू वाला इंसान माना जा सकता है। यदि परीक्षण करने वाला 25 से 30 तक बीप की आवाज में प्रोजेक्ट को पूरा कर रहा है, तो उसके तीनों अंगों का सामंजस्य बेहतर नहीं है।
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इस तरह करता है कार्य
प्योर स्टेनलेस स्टील से बना यह प्रोजेक्ट धैर्य परीक्षण पर आधारित है। इसमें एक छल्ले को लहरदार मार्ग से गुजारते हुए दाई छोर से बाई छोर की ओर लेकर जाना होता है।
इसे इस प्रकार से लेकर जाना होता है कि छल्ला इस लहरदार मार्ग को न छुए। लहरदार मार्ग से छूने की स्थिति में एक बीप की ध्वनि सुनाई देगी और स्क्रीन पर एक संख्या प्रदर्शित होगी। कम से कम छूने पर शरीर के अंगों का बेहतर सामंजस्य और ज्यादा बार छूने पर कम सामंजस्य माना जाता है।
मुश्किलों सें पूरा हुआ प्रोजेक्ट
कुरुक्षेत्र पैनोरमा एवं विज्ञान केंद्र के एजुकेशन अधिकारी जितेंद्र कुमार ने बताया कि धैर्य परीक्षण प्रोजेक्ट को बनाने की योजना बहुत पहले से थी, लेकिन कुरुक्षेत्र में प्योर स्टेनलेस स्टील का रॉ मेटिरयल नहीं मिल सका। इसके लिए कई बार प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिली।
इसके बाद बाहर से स्टेनलेस स्टील मंगवाना पड़ा। इसकी पूरी डिजायन हाथों से तैयार की गई है।
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करीब 20 हजार की लागत से एक माह पहले बना यह प्रोजेक्ट हर एक को आकर्षित कर रहा है। प्रतिदिन सैकड़ों पर्यटक इसे देखने आ रहे हैं और स्वयं का परीक्षण कर अपनी दक्षता को परखते हैं।
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प्रोजेक्ट का आधार
कुरुक्षेत्र पैनोरमा एवं विज्ञान केंद्र में बनाए गए धैर्य परीक्षण में व्यक्ति के हाथ, दिमाग और आंख के सामंजस्य का स्तर पता चलता है।
परीक्षण करने वाला जितने कम समय में यानी 4 से 5 बीप की आवाज किए इसे पूरा करता है तो उसके हाथ, दिमाग और आंख का सांमजस्य बेहतर है। वह बेहतर आईक्यू वाला इंसान माना जा सकता है। यदि परीक्षण करने वाला 25 से 30 तक बीप की आवाज में प्रोजेक्ट को पूरा कर रहा है, तो उसके तीनों अंगों का सामंजस्य बेहतर नहीं है।
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इस तरह करता है कार्य
प्योर स्टेनलेस स्टील से बना यह प्रोजेक्ट धैर्य परीक्षण पर आधारित है। इसमें एक छल्ले को लहरदार मार्ग से गुजारते हुए दाई छोर से बाई छोर की ओर लेकर जाना होता है।
इसे इस प्रकार से लेकर जाना होता है कि छल्ला इस लहरदार मार्ग को न छुए। लहरदार मार्ग से छूने की स्थिति में एक बीप की ध्वनि सुनाई देगी और स्क्रीन पर एक संख्या प्रदर्शित होगी। कम से कम छूने पर शरीर के अंगों का बेहतर सामंजस्य और ज्यादा बार छूने पर कम सामंजस्य माना जाता है।
मुश्किलों सें पूरा हुआ प्रोजेक्ट
कुरुक्षेत्र पैनोरमा एवं विज्ञान केंद्र के एजुकेशन अधिकारी जितेंद्र कुमार ने बताया कि धैर्य परीक्षण प्रोजेक्ट को बनाने की योजना बहुत पहले से थी, लेकिन कुरुक्षेत्र में प्योर स्टेनलेस स्टील का रॉ मेटिरयल नहीं मिल सका। इसके लिए कई बार प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिली।
इसके बाद बाहर से स्टेनलेस स्टील मंगवाना पड़ा। इसकी पूरी डिजायन हाथों से तैयार की गई है।