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Kurukshetra News: धर्मनगरी ने शिक्षा, स्वास्थ्य से लेकर पर्यटन की ओर लगाई बड़ी छलांग, लगे विकास के पंख
Sat, 01 Nov 2025 02:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sat, 01 Nov 2025 02:06 AM IST
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कुरुक्षेत्र। 1 नवंबर 1966 को हरियाणा राज्य बना तो इसके सात साल बाद ही धर्मनगरी कुरुक्षेत्र को 23 जनवरी 1973 को जिला होने का भी गौरव मिला। काल चक्र का पहिया घूमा तो देश की राजधानी दिल्ली से महज 154 किलोमीटर दूरी पर स्थित एवं दो राष्ट्रीय राजमार्गों व रेल लाइन से जुड़ी धर्मनगरी को विकास के पंख भी खूब लगे। सीएम सिटी का तमगा मिला और करीब पांच दशक के दौरान शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य, परिवहन व पर्यटन की ओर लंबी छलांग लगाई। करोड़ों की अनेक परियोजनाओं से लोगों का जीवन सुगम हुआ और जिले की पहचान भी बढ़ी।
प्रदेश सरकार से लेकर केंद्र सरकार ने धर्मनगरी को खूब तव्वजो दी और आम लोगों की मेहनत भी रंग लाई। वर्तमान में यहां हर रोज करीब 10 हजार लोग देश-विदेश से आते हैं। आज भी करोड़ों की परियोजनाएं लाइन में हैं और इससे आगे भी अनेक परियोजनाओं की दरकार है।
बॉक्स
इन विशेष पर्यटन स्थलों ने बढ़ाया गौरव
ब्रह्म सरोवर
ब्रह्मांड निर्माता ब्रह्मा जी से जुड़ा ये सरोवर शहर के बीचों बीच है, जाे 3600 फीट लंबा, 1500 फीट चौड़ा और 45 फीट गहरा है। यहां सांध्यकालीन आरती से पूरा वातावरण आध्यात्मिक हो जाता है। पर्यटक यहां सूर्यास्त के लाल और सुनहरे प्रतिबिंब को पानी में निहारते हुए घंटों बिता सकते हैं। यहीं पर हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन होता है और सूर्य ग्रहण से लेकर छठ पर्व जैसे अनेक विशेष पर्व भी मनाए जाते हैं।
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48 कोस भूमि
कुरुक्षेत्र की 48 कोस भूमि की महत्ता का वर्णन शास्त्रों में भी है। सरस्वती और द्रिशावती नदियों के आसपास के क्षेत्र को 48 कोस कहा जाता है। इसके 182 पौराणिक तीर्थों की पहचान हो चुकी है। कुरुक्षेत्र के पीपली से शुरू होकर कैथल से होते हुए जींद, पानीपत और करनाल 48 कोस भूमि में आते हैं। कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध में योद्धा लड़ते-लड़ते जिस भूमि तक पहुंच गए थे, वह 48 कोस की भूमि में शामिल मानी गई।
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206 करोड़ से तैयार महाभारत अनुभव केंद्र
यह वही स्थान है, जहां कौरव-पांडव की सेनाएं एक दूसरे के सामने खड़ी थीं और श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया था। इस तीर्थ का करीब 250 करोड़ से जीर्णोद्धार किया जा रहा है जिसके तहत 206 करोड़ से अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित महाभारत अनुभव केंद्र तैयार किया गया है जिसके दो भागों का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर चुके हैं। यहां श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप की 52 फीट ऊंची कांस्य मूर्ति लगाई गई है। यहां का लाइट एंड साउंड शो बेहद खास आकर्षण का केंद्र है।
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भद्रकाली मंदिर
देश के प्रख्यात 52 शक्तिपीठों में से एक देवी कूप मां भद्रकाली मंदिर है। मान्यता है कि माता सती के घुटने से नीचे का भाग यहां कूप में गिरा था। पांडवों ने भगवान कृष्ण के साथ इस मंदिर में पूजा की थी और यहां अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया गया था। यहां आज भी घोड़े चढ़ाने की परंपरा है। देश-विदेश के अनेक राजनेताओं से लेकर राष्ट्रपति तक यहां मां के दर्शन कर चुके हैं।
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शेख चिल्ली मकबरा
हरियाणा का ताजमहल कहा जाने वाला शेख चिल्ली मकबरा खास पर्यटन केंद्र बना है। मकबरे के पश्चिमी भाग में जलालुद्दीन साबरी की दरगाह भी मौजूद है, जहां उन्हें उनके मरणोपरांत दफनाया गया था। ऐतिहासिक मकबरा की बनावट व खास सुंदरता देखने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंचते हैं। 373 साल पुराना शेख चिल्ली का मकबरा है, जिसे दारा शिकोह ने लगभग 1650 ई. में बनवाया था।
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संग्रहालयों की भी बनी नगरी
कुरुक्षेत्र की पहचान अब संग्रहालयों की नगरी के तौर पर भी होने लगी है। यहीं पर प्रदेश का पहला सिख संग्रहालय बनाया जाएगा। इसकी नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 25 नवंबर को रखे जाने की उम्मीद है। इसमें सिख गुरुओं के इतिहास को संजोया जाएगा। इससे पहले यहां श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित दुनिया का एकमात्र श्रीकृष्ण संग्रहालय भी है और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में धरोहर है। शेख चिल्ली के मकबरे, प्रेरणा वृद्ध आश्रम में भी संग्रहालय स्थित है।
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पैनोरमा एवं तारामंडल भी
धर्मनगरी में मूल रूप से साइंस पर आधारित कुरुक्षेत्र पैनोरमा भी है, जो वर्ष 2006 से विज्ञान की लौ जलाए हुए है और वहीं प्रदेश का एकमात्र कल्पना चावला तारामंडल भी है।
गुरु शिष्य का पहला मंदिर
बह्मसरोवर व सन्निहित सरोवर के साथ ही गीता के 18 अध्यायों पर आधारित 18 मंजिला ज्ञान मंदिर, ज्योतिसर में गुरु-शिक्ष्य श्री कृष्ण-अर्जुन का पहला रथनुमा इस्कॉन मंदिर, भीमा मंदिर सहित कई बड़े धार्मिक संस्थान निर्माणाधीन हैं। वहीं गीता ज्ञान संस्थान, श्री वेकेंटश्वर स्वामी तिरुपति बाला जी मंदिर, सर्वेश्वर महादेव मंदिर, स्थाणेश्वर महादेवी मंदिर, दुखभंजन महादेव मंदिर, महादेव मंदिर अरूणाय सहित अनेक प्रख्यात देवालय हैं।
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एलिवेटेड रेल ट्रैक ड्रीम प्रोजेक्ट
परिवहन की दृष्टि से भी धर्मनगरी मजबूत हुई है। जहां दिल्ली चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पहले से स्थित हैं। वहीं नेशनल हाईवे 152 डी भी दिल्ली व चंडीगढ़ से जोड़ रहा है। नेशनल हाईवे 152 भी जल्द पूरा होने की उम्मीद है। वहीं करीब 350 करोड़ का रेलवे एलिवेटेड ट्रक के ड्रीम प्रोजेक्ट की सौगात जनवरी माह तक मिलने की उम्मीद है। यही नहीं धर्मनगरी के रेलवे स्टेशन को भी अमृत भारत स्टेशन स्कीम के तहत करोड़ों खर्च कर विकसित किया गया है। यहां से गुजरने वाली करीब हर एक्सप्रेस गाड़ी का ठहराव है।
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एयरपोर्ट व रिंग रोड की आज भी दरकार
धर्मनगरी को एयरपोर्ट व रिंग रोड की आज भी दरकार है। हालांकि यह वर्षों पुरानी मांग है। दोनों परियोजनाओं की जनता व सरकार के बीच खूब चर्चा है। रिंग रोड की जमीनी स्तर पर तैयारी भी की जा रही है। इससे शहर जाम से मुक्त होगा।
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एक दृष्टि से कुरुक्षेत्र जिला
जिला बना-- 23 जनवरी 1973
क्षेत्र-- 1530 स्क्वेयर किलोमीटर
ब्लॉक-- 7
तहसील-6
जनसंख्या(2011 के अनुसार)-- 9,64,655
पुरुष-- 510976
महिलाएं-- 453679
लिंगानुपात-- 888
गांव-- 415
शिक्षा-- 76.31 प्रतिशत
विश्वविद्यालय-- 2
कॉलेज-- 12
हाई स्कूल-- 299
मिडल स्कूल-- 252
प्राथमिक स्कूल-- 509
लिंगानुपात--
विधानसभा क्षेत्र-- थानेसर, लाडवा, पिहोवा, शाहाबाद
वर्तमान विधायक-- लाडवा- मुख्यमंत्री नायब सैनी, थानेसर-अशोक अरोड़ा, पिहोवा- मनदीप चटठा, शाहाबाद- रामकरण काला
सांसद-- नवीन जिंदल
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हरियाणा बनने से पहले ही शिक्षा में उभरने लगा, आज बना ध्रुवतारा
1966 में हरियाणा बनने के बाद बेहद सीमित संसाधनों से शुरू हुआ शिक्षा का सफर मुकाम तक पहुंचा है। हरियाणा बनने से पहले 1956 में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की नींव रखी। संस्कृत विश्वविद्यालय के रूप में शुरू हुआ यह संस्थान आज ए प्लस प्लस ग्रेड प्राप्त कर चुका है, 49 विभागों और करीब 450 महाविद्यालयों को दिशा दे रहा है। करीब नौ हजार विद्यार्थी परिसर में नियमित शिक्षा ले रहे हैं और 20 हजार के करीब विद्यार्थी प्राइवेट शिक्षा से जुड़े हैं।
इसके साथ ही राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) कुरुक्षेत्र ने तकनीकी शिक्षा को नई पहचान दी और उत्तर भारत में शीर्ष संस्थानों में अपना स्थान बनाया। 1963 में क्षेत्रीय इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में स्थापित किया गया था, जिसे 26 जून, 2002 को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान का दर्जा प्राप्त हुआ। जिले में देश का एकमात्र श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय है जिसकी शुरुआत 2017 से हुई और इसके शैक्षणिक सत्र ने 2018-19 से कार्य करना शुरू किया। राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, पॉलिटेक्निक, आईटीआई और अन्य उच्च शिक्षण संस्थान हजारों युवाओं के सपनों को पंख दे रहे हैं।
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स्वास्थ्य
200 बेड का हो जाएगा नागरिक अस्पताल
जिले को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं भी मिल रही हैं। लोकनायक जयप्रकाश नागरिक अस्पताल परिसर में 100 बेड का नया अस्पताल फेस 2 के तहत बनाया जाएगा, जिस पर 88.52 करोड़ रुपये खर्च होंगे। आठ मंजिला बनने वाले इस भवन के बाद अस्पताल 200 बेड का हो जाएगा, जहां मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
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प्रदेश सरकार से लेकर केंद्र सरकार ने धर्मनगरी को खूब तव्वजो दी और आम लोगों की मेहनत भी रंग लाई। वर्तमान में यहां हर रोज करीब 10 हजार लोग देश-विदेश से आते हैं। आज भी करोड़ों की परियोजनाएं लाइन में हैं और इससे आगे भी अनेक परियोजनाओं की दरकार है।
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इन विशेष पर्यटन स्थलों ने बढ़ाया गौरव
ब्रह्म सरोवर
ब्रह्मांड निर्माता ब्रह्मा जी से जुड़ा ये सरोवर शहर के बीचों बीच है, जाे 3600 फीट लंबा, 1500 फीट चौड़ा और 45 फीट गहरा है। यहां सांध्यकालीन आरती से पूरा वातावरण आध्यात्मिक हो जाता है। पर्यटक यहां सूर्यास्त के लाल और सुनहरे प्रतिबिंब को पानी में निहारते हुए घंटों बिता सकते हैं। यहीं पर हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन होता है और सूर्य ग्रहण से लेकर छठ पर्व जैसे अनेक विशेष पर्व भी मनाए जाते हैं।
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48 कोस भूमि
कुरुक्षेत्र की 48 कोस भूमि की महत्ता का वर्णन शास्त्रों में भी है। सरस्वती और द्रिशावती नदियों के आसपास के क्षेत्र को 48 कोस कहा जाता है। इसके 182 पौराणिक तीर्थों की पहचान हो चुकी है। कुरुक्षेत्र के पीपली से शुरू होकर कैथल से होते हुए जींद, पानीपत और करनाल 48 कोस भूमि में आते हैं। कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध में योद्धा लड़ते-लड़ते जिस भूमि तक पहुंच गए थे, वह 48 कोस की भूमि में शामिल मानी गई।
206 करोड़ से तैयार महाभारत अनुभव केंद्र
यह वही स्थान है, जहां कौरव-पांडव की सेनाएं एक दूसरे के सामने खड़ी थीं और श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया था। इस तीर्थ का करीब 250 करोड़ से जीर्णोद्धार किया जा रहा है जिसके तहत 206 करोड़ से अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित महाभारत अनुभव केंद्र तैयार किया गया है जिसके दो भागों का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर चुके हैं। यहां श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप की 52 फीट ऊंची कांस्य मूर्ति लगाई गई है। यहां का लाइट एंड साउंड शो बेहद खास आकर्षण का केंद्र है।
भद्रकाली मंदिर
देश के प्रख्यात 52 शक्तिपीठों में से एक देवी कूप मां भद्रकाली मंदिर है। मान्यता है कि माता सती के घुटने से नीचे का भाग यहां कूप में गिरा था। पांडवों ने भगवान कृष्ण के साथ इस मंदिर में पूजा की थी और यहां अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया गया था। यहां आज भी घोड़े चढ़ाने की परंपरा है। देश-विदेश के अनेक राजनेताओं से लेकर राष्ट्रपति तक यहां मां के दर्शन कर चुके हैं।
शेख चिल्ली मकबरा
हरियाणा का ताजमहल कहा जाने वाला शेख चिल्ली मकबरा खास पर्यटन केंद्र बना है। मकबरे के पश्चिमी भाग में जलालुद्दीन साबरी की दरगाह भी मौजूद है, जहां उन्हें उनके मरणोपरांत दफनाया गया था। ऐतिहासिक मकबरा की बनावट व खास सुंदरता देखने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंचते हैं। 373 साल पुराना शेख चिल्ली का मकबरा है, जिसे दारा शिकोह ने लगभग 1650 ई. में बनवाया था।
संग्रहालयों की भी बनी नगरी
कुरुक्षेत्र की पहचान अब संग्रहालयों की नगरी के तौर पर भी होने लगी है। यहीं पर प्रदेश का पहला सिख संग्रहालय बनाया जाएगा। इसकी नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 25 नवंबर को रखे जाने की उम्मीद है। इसमें सिख गुरुओं के इतिहास को संजोया जाएगा। इससे पहले यहां श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित दुनिया का एकमात्र श्रीकृष्ण संग्रहालय भी है और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में धरोहर है। शेख चिल्ली के मकबरे, प्रेरणा वृद्ध आश्रम में भी संग्रहालय स्थित है।
पैनोरमा एवं तारामंडल भी
धर्मनगरी में मूल रूप से साइंस पर आधारित कुरुक्षेत्र पैनोरमा भी है, जो वर्ष 2006 से विज्ञान की लौ जलाए हुए है और वहीं प्रदेश का एकमात्र कल्पना चावला तारामंडल भी है।
गुरु शिष्य का पहला मंदिर
बह्मसरोवर व सन्निहित सरोवर के साथ ही गीता के 18 अध्यायों पर आधारित 18 मंजिला ज्ञान मंदिर, ज्योतिसर में गुरु-शिक्ष्य श्री कृष्ण-अर्जुन का पहला रथनुमा इस्कॉन मंदिर, भीमा मंदिर सहित कई बड़े धार्मिक संस्थान निर्माणाधीन हैं। वहीं गीता ज्ञान संस्थान, श्री वेकेंटश्वर स्वामी तिरुपति बाला जी मंदिर, सर्वेश्वर महादेव मंदिर, स्थाणेश्वर महादेवी मंदिर, दुखभंजन महादेव मंदिर, महादेव मंदिर अरूणाय सहित अनेक प्रख्यात देवालय हैं।
एलिवेटेड रेल ट्रैक ड्रीम प्रोजेक्ट
परिवहन की दृष्टि से भी धर्मनगरी मजबूत हुई है। जहां दिल्ली चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पहले से स्थित हैं। वहीं नेशनल हाईवे 152 डी भी दिल्ली व चंडीगढ़ से जोड़ रहा है। नेशनल हाईवे 152 भी जल्द पूरा होने की उम्मीद है। वहीं करीब 350 करोड़ का रेलवे एलिवेटेड ट्रक के ड्रीम प्रोजेक्ट की सौगात जनवरी माह तक मिलने की उम्मीद है। यही नहीं धर्मनगरी के रेलवे स्टेशन को भी अमृत भारत स्टेशन स्कीम के तहत करोड़ों खर्च कर विकसित किया गया है। यहां से गुजरने वाली करीब हर एक्सप्रेस गाड़ी का ठहराव है।
एयरपोर्ट व रिंग रोड की आज भी दरकार
धर्मनगरी को एयरपोर्ट व रिंग रोड की आज भी दरकार है। हालांकि यह वर्षों पुरानी मांग है। दोनों परियोजनाओं की जनता व सरकार के बीच खूब चर्चा है। रिंग रोड की जमीनी स्तर पर तैयारी भी की जा रही है। इससे शहर जाम से मुक्त होगा।
एक दृष्टि से कुरुक्षेत्र जिला
जिला बना
क्षेत्र
ब्लॉक
तहसील-6
जनसंख्या(2011 के अनुसार)
पुरुष
महिलाएं
लिंगानुपात
गांव
शिक्षा
विश्वविद्यालय
कॉलेज
हाई स्कूल
मिडल स्कूल
प्राथमिक स्कूल
लिंगानुपात
विधानसभा क्षेत्र
वर्तमान विधायक
सांसद
हरियाणा बनने से पहले ही शिक्षा में उभरने लगा, आज बना ध्रुवतारा
1966 में हरियाणा बनने के बाद बेहद सीमित संसाधनों से शुरू हुआ शिक्षा का सफर मुकाम तक पहुंचा है। हरियाणा बनने से पहले 1956 में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की नींव रखी। संस्कृत विश्वविद्यालय के रूप में शुरू हुआ यह संस्थान आज ए प्लस प्लस ग्रेड प्राप्त कर चुका है, 49 विभागों और करीब 450 महाविद्यालयों को दिशा दे रहा है। करीब नौ हजार विद्यार्थी परिसर में नियमित शिक्षा ले रहे हैं और 20 हजार के करीब विद्यार्थी प्राइवेट शिक्षा से जुड़े हैं।
इसके साथ ही राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) कुरुक्षेत्र ने तकनीकी शिक्षा को नई पहचान दी और उत्तर भारत में शीर्ष संस्थानों में अपना स्थान बनाया। 1963 में क्षेत्रीय इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में स्थापित किया गया था, जिसे 26 जून, 2002 को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान का दर्जा प्राप्त हुआ। जिले में देश का एकमात्र श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय है जिसकी शुरुआत 2017 से हुई और इसके शैक्षणिक सत्र ने 2018-19 से कार्य करना शुरू किया। राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, पॉलिटेक्निक, आईटीआई और अन्य उच्च शिक्षण संस्थान हजारों युवाओं के सपनों को पंख दे रहे हैं।
स्वास्थ्य
200 बेड का हो जाएगा नागरिक अस्पताल
जिले को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं भी मिल रही हैं। लोकनायक जयप्रकाश नागरिक अस्पताल परिसर में 100 बेड का नया अस्पताल फेस 2 के तहत बनाया जाएगा, जिस पर 88.52 करोड़ रुपये खर्च होंगे। आठ मंजिला बनने वाले इस भवन के बाद अस्पताल 200 बेड का हो जाएगा, जहां मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।