{"_id":"5a0f2e364f1c1b7a548bd9e2","slug":"61510944310-kurukshetra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"केंद्रीय कृषि मंत्रालय की टीम ने किया गुरुकुल फार्म का दौरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
केंद्रीय कृषि मंत्रालय की टीम ने किया गुरुकुल फार्म का दौरा
Updated Sat, 18 Nov 2017 12:15 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्रीय कृषि मंत्रालय की टीम ने किया गुरुकुल फार्म का दौरा
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
धान की पराली को लेकर मचे घमासान के बीच शुक्रवार को केंद्रीय कृषि मंत्रालय की एक विशेष टीम प्रदेश कृषि विभाग के विशेषज्ञों के साथ गुरुकुल कुरुक्षेत्र के जीरो बजट प्राकृतिक कृषि फार्म पर पहुंची। गुरुकुल द्वारा पराली को बिना जलाए प्रबंधन और गेहूं की बुआई की पूरी प्रक्रिया को देखा। इस अवसर पर कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने गुरुकुल द्वारा प्राकृतिक कृषि के माध्यम से उपजी गन्ने, आलू, चना, धनिया और हरी सब्जियों की फसल का अवलोकन किया। साथ ही गुरुकुल के प्राकृतिक कृषि मॉडल की सराहना की।
गुरुकुल के प्रधान कुलवंत सिंह सैनी ने टीम के सभी सदस्यों को राज्यपाल आचार्य देवव्रत द्वारा लिखित जीरो बजट प्राकृतिक कृषि पुस्तक और उपहार भेंट किए। गुरुकुल के सह-प्राचार्य शमशेर सिंह ने बताया कि धान की पराली जलाने से उठने वाले धुएं के गुबार से वातावरण प्रदूषित हो चुका है। अब स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों पर प्रदेश सरकारों ने टीमें गठित कर धान की पराली जलाने पर पूरी रोक लगायी। इसी संदर्भ में आज इस टीम गुरुकुल कृषि फार्म को देखने पहुंची। इसमें डॉ. एएन मेसराम, डॉ. एमएन सिंह, इंजी पीके पांडेय, डॉ. आरएस चहल सहित डॉ. कर्मचंद उप कृषि निदेशक कुरुक्षेत्र, गुरुकुल के प्रधान कुलवंत सिंह सैनी मौजूद रहे। कृषि विशेषज्ञ डॉ. वजीर सिंह ने केंद्रीय मंत्रालय की टीम को जीवामृत और घनजीवामृत सहित राज्यपाल आचार्य देवव्रत के जीरो बजट प्राकृतिक कृषि मॉडल की विस्तृत जानकारी दी।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
धान की पराली को लेकर मचे घमासान के बीच शुक्रवार को केंद्रीय कृषि मंत्रालय की एक विशेष टीम प्रदेश कृषि विभाग के विशेषज्ञों के साथ गुरुकुल कुरुक्षेत्र के जीरो बजट प्राकृतिक कृषि फार्म पर पहुंची। गुरुकुल द्वारा पराली को बिना जलाए प्रबंधन और गेहूं की बुआई की पूरी प्रक्रिया को देखा। इस अवसर पर कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने गुरुकुल द्वारा प्राकृतिक कृषि के माध्यम से उपजी गन्ने, आलू, चना, धनिया और हरी सब्जियों की फसल का अवलोकन किया। साथ ही गुरुकुल के प्राकृतिक कृषि मॉडल की सराहना की।
गुरुकुल के प्रधान कुलवंत सिंह सैनी ने टीम के सभी सदस्यों को राज्यपाल आचार्य देवव्रत द्वारा लिखित जीरो बजट प्राकृतिक कृषि पुस्तक और उपहार भेंट किए। गुरुकुल के सह-प्राचार्य शमशेर सिंह ने बताया कि धान की पराली जलाने से उठने वाले धुएं के गुबार से वातावरण प्रदूषित हो चुका है। अब स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों पर प्रदेश सरकारों ने टीमें गठित कर धान की पराली जलाने पर पूरी रोक लगायी। इसी संदर्भ में आज इस टीम गुरुकुल कृषि फार्म को देखने पहुंची। इसमें डॉ. एएन मेसराम, डॉ. एमएन सिंह, इंजी पीके पांडेय, डॉ. आरएस चहल सहित डॉ. कर्मचंद उप कृषि निदेशक कुरुक्षेत्र, गुरुकुल के प्रधान कुलवंत सिंह सैनी मौजूद रहे। कृषि विशेषज्ञ डॉ. वजीर सिंह ने केंद्रीय मंत्रालय की टीम को जीवामृत और घनजीवामृत सहित राज्यपाल आचार्य देवव्रत के जीरो बजट प्राकृतिक कृषि मॉडल की विस्तृत जानकारी दी।
विज्ञापन