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लॉकडाउन में लगाए 22 रक्तदान शिविर
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शिविर में रक्तदान करते रामेश्वर सैनी। फाइल फोटो
- फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। कोरोना से लोगों की जान बाद में जाएगी पहले तो रक्त की कमी ही उनका दम निकाल देगा। जिला अस्पताल में रक्त की कमी होने की यह खबर जैसे ही वायरल हुई तो जिले में हड़कंप मच गया। लॉकडाउन में शिविर लगाना तो दूर घर से बाहर निकलना भी बेहद मुश्किल था। उस मुश्किल दौर रामेश्वर सैनी उम्मीद की किरण बन गए। उन्होंने लॉकडाउन में 22 शिविर लगाकर करीब 500 इकाई रक्त एकत्रित किया।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में सीनियर मशीन मैन के पद पर तैनात 49 वर्षीय रामेश्वर सैनी ने जिला प्रशासन से रक्तदान शिविर की अनुमति ली और 30 मार्च 2020 को गांव हरिपुर बड़ाम में लॉकडाउन का पहला रक्तदान शिविर लगाया। इस शिविर में 30 इकाई रक्त एकत्रित हुआ। उसके बाद रामेश्वर सैनी ने पूरे एक सप्ताह तक शिविर लगाकर जिला अस्पताल में हुई रक्त की कमी को पूरा करने में सहयोग दिया।
इसके बाद उनसे प्रेरणा लेकर विभिन्न संस्थाओं ने रक्तदान शिविर लगाए। उन्होंने पहले लॉकडाउन में 22 शिविर लगाकर 500 से अधिक इकाई रक्त एकत्रित किया। रामेश्वर सैनी ने बताया कि अब तक वह 190 रक्तदान, एक नेत्र जांच, 27 वैक्सीनेशन और 24 स्वास्थ्य जांच शिविर लगा चुके हैं। वह स्वयं भी 27 बार रक्तदान कर चुके हैं। उनसे प्रेरणा लेकर उनका बेटा सुमित, पत्नी परवीता और साला अजीत भी रक्तदान कर रहे हैं। इसके अलावा वह संस्था के माध्यम से 27 महिलाओं को सिलाई मशीन भेंट कर चुके हैं। साल 2017 में उनको तत्कालीन राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने रेडक्रॉस अवार्ड से सम्मानित किया था।
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बहन के लिए रक्त की कमी हुई तो लिया प्रण
रामेश्वर सैनी ने बताया कि साल 2013 में उनकी फुफेरी बहन बीमार हो गई थी, उसका रक्त तीन ग्राम ही रह गया था। इस पर उसे बार-बार रक्त चढ़ाना पड़ता था। एक दिन वह रक्त लेने गए तो नहीं मिला। तब ब्लड बैंक कर्मी ने उनको स्वयं रक्त देने के लिए प्रेरित किया। इस पर उन्होंने कहा कि वह अपने लगाए शिविर में ही रक्तदान करेंगे। उस घटना के बाद उन्होंने रक्तदान शिविर लगाने शुरू कर दिए और लोगों को भी रक्त देने के लिए प्रेरित किया।
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कुरुक्षेत्र। कोरोना से लोगों की जान बाद में जाएगी पहले तो रक्त की कमी ही उनका दम निकाल देगा। जिला अस्पताल में रक्त की कमी होने की यह खबर जैसे ही वायरल हुई तो जिले में हड़कंप मच गया। लॉकडाउन में शिविर लगाना तो दूर घर से बाहर निकलना भी बेहद मुश्किल था। उस मुश्किल दौर रामेश्वर सैनी उम्मीद की किरण बन गए। उन्होंने लॉकडाउन में 22 शिविर लगाकर करीब 500 इकाई रक्त एकत्रित किया।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में सीनियर मशीन मैन के पद पर तैनात 49 वर्षीय रामेश्वर सैनी ने जिला प्रशासन से रक्तदान शिविर की अनुमति ली और 30 मार्च 2020 को गांव हरिपुर बड़ाम में लॉकडाउन का पहला रक्तदान शिविर लगाया। इस शिविर में 30 इकाई रक्त एकत्रित हुआ। उसके बाद रामेश्वर सैनी ने पूरे एक सप्ताह तक शिविर लगाकर जिला अस्पताल में हुई रक्त की कमी को पूरा करने में सहयोग दिया।
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इसके बाद उनसे प्रेरणा लेकर विभिन्न संस्थाओं ने रक्तदान शिविर लगाए। उन्होंने पहले लॉकडाउन में 22 शिविर लगाकर 500 से अधिक इकाई रक्त एकत्रित किया। रामेश्वर सैनी ने बताया कि अब तक वह 190 रक्तदान, एक नेत्र जांच, 27 वैक्सीनेशन और 24 स्वास्थ्य जांच शिविर लगा चुके हैं। वह स्वयं भी 27 बार रक्तदान कर चुके हैं। उनसे प्रेरणा लेकर उनका बेटा सुमित, पत्नी परवीता और साला अजीत भी रक्तदान कर रहे हैं। इसके अलावा वह संस्था के माध्यम से 27 महिलाओं को सिलाई मशीन भेंट कर चुके हैं। साल 2017 में उनको तत्कालीन राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने रेडक्रॉस अवार्ड से सम्मानित किया था।
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बहन के लिए रक्त की कमी हुई तो लिया प्रण
रामेश्वर सैनी ने बताया कि साल 2013 में उनकी फुफेरी बहन बीमार हो गई थी, उसका रक्त तीन ग्राम ही रह गया था। इस पर उसे बार-बार रक्त चढ़ाना पड़ता था। एक दिन वह रक्त लेने गए तो नहीं मिला। तब ब्लड बैंक कर्मी ने उनको स्वयं रक्त देने के लिए प्रेरित किया। इस पर उन्होंने कहा कि वह अपने लगाए शिविर में ही रक्तदान करेंगे। उस घटना के बाद उन्होंने रक्तदान शिविर लगाने शुरू कर दिए और लोगों को भी रक्त देने के लिए प्रेरित किया।