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Karnal News: युवाओं में तनाव का कारण बन रहा सोशल मीडिया
Wed, 17 Sep 2025 01:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Wed, 17 Sep 2025 01:43 AM IST
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151..... कमल
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। हाल ही में नेपाल में हो रही हिंसा ने सोशल मीडिया की ताकत को सोचने पर मजबूर कर दिया है। सोशल मीडिया के बैन होने पर जेन-जी का आक्रामक हो जाना चिंता का विषय भी बन रहा है। इसके लिए जरूरी है कि सोशल मीडिया का एक सीमा तक व सही तरीके से उपयोग किया जाए। आज के दौर में अधिक तनाव, बेरोजगार की समस्या और समाज के ताने-बाने युवाओं की मानसिक स्थिति में अधिक और गहरा बदलाव ला रही है। मनोचिकित्सक डाॅ. सौभाग्य कौशिक ने बताया कि जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना दो से तीन युवा अपने आक्रामक व्यवहार से परेशान होकर आते हैं। उनकी शिकायत रहती है कि वह अधिक देर तक धैर्य नहीं रख सकते, जिससे छोटी-छोटी बातों को सहन करने में दिक्कत आती है और उनका बर्ताव अधिक आक्रामक हो जाता है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों अपने बच्चों को सोशल मीडिया का सीमित उपयोग करने के लिए कहे। जितना अधिक मोबाइल पर समय व्यतीत किया जाएगा, उतना ही तनाव व अकेलापन घेरता है।
मोबाइल का चार घंटे ही करते हैं उपयोग
-काॅलेज जाने वाले छात्र कमल ने बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कंटेंट मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर करता है। उन्होंने कहा कि वह अपनी पूरी दिनचर्या में केवल चार घंटे ही मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं। स्वयं को किसी न किसी काम में व्यस्त रखने से मोबाइल की तरफ ध्यान कम जाता है।
जरूरी सूचना के लिए मोबाइल करें उपयोग
-मोहित ने बताया कि युवाओं में सोशल मीडिया से प्रभावित होकर अधिक आक्रामक होना समाज व देश के विकास के लिए सही नहीं है। उन्होंने बताया कि वह कोशिश करते हैं कि केवल पढ़ाई के लिए और जरूरी सूचना के लिए ही मोबाइल फोन का इस्तेमाल करें।
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युवाओं में लग रही सोशल मीडिया की लत
-प्रीयांशु ने बताया कि वह भविष्य को लेकर चिंता में हैं। सोशल मीडिया का दबाव व तुलना की आदत लगने से युवाओं में सोशल मीडिया की गहरी लत लगती जा रही है। ऐसे में अधिकतर समय मोबाइल में बिताने से कॅरिअर बनाने में परेशानी आ सकती है। उन्होंने बताया कि वह अपनी दिनचर्या में एक तरीका अपना रहे हैं कि वह काम के बीच में तनाव को कम करने के लिए मोबाइल का कम उपयोग करेंगे।
भड़काऊ कंटेंट पर लगानी चाहिए रोक
-रजनीश ने बताया कि आज का युवा स्वयं को बेरोजगार महसूस करते हैं, जिसके कारण वह सोशल मीडिया पर अधिक समय व्यतीत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवा साथी सोशल मीडिया को ही अपनी हिंसा और भड़ास निकालने का सबसे अच्छा माध्यम समझते हैं, जिससे खासकर युवाओं पर गहरा असर होता दिख रहा है। इसलिए प्रशासन को हिंसा और आक्रोश को बढ़ाने वाले कंटेंट पर रोक लगानी चाहिए।
1928-1945 साइलेंट जेनरेशन
1946-1964 बेबी बूमर्स
1965-1980 जनरेशन एक्स
1981-1995 मिलेनियल्स
1996-2012 जेन जी
2013-2025 जेन अल्फा
2025 व आगे ओन वाली पीढ़ी जेन बीटा
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करनाल। हाल ही में नेपाल में हो रही हिंसा ने सोशल मीडिया की ताकत को सोचने पर मजबूर कर दिया है। सोशल मीडिया के बैन होने पर जेन-जी का आक्रामक हो जाना चिंता का विषय भी बन रहा है। इसके लिए जरूरी है कि सोशल मीडिया का एक सीमा तक व सही तरीके से उपयोग किया जाए। आज के दौर में अधिक तनाव, बेरोजगार की समस्या और समाज के ताने-बाने युवाओं की मानसिक स्थिति में अधिक और गहरा बदलाव ला रही है। मनोचिकित्सक डाॅ. सौभाग्य कौशिक ने बताया कि जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना दो से तीन युवा अपने आक्रामक व्यवहार से परेशान होकर आते हैं। उनकी शिकायत रहती है कि वह अधिक देर तक धैर्य नहीं रख सकते, जिससे छोटी-छोटी बातों को सहन करने में दिक्कत आती है और उनका बर्ताव अधिक आक्रामक हो जाता है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों अपने बच्चों को सोशल मीडिया का सीमित उपयोग करने के लिए कहे। जितना अधिक मोबाइल पर समय व्यतीत किया जाएगा, उतना ही तनाव व अकेलापन घेरता है।
मोबाइल का चार घंटे ही करते हैं उपयोग
-काॅलेज जाने वाले छात्र कमल ने बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कंटेंट मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर करता है। उन्होंने कहा कि वह अपनी पूरी दिनचर्या में केवल चार घंटे ही मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं। स्वयं को किसी न किसी काम में व्यस्त रखने से मोबाइल की तरफ ध्यान कम जाता है।
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जरूरी सूचना के लिए मोबाइल करें उपयोग
-मोहित ने बताया कि युवाओं में सोशल मीडिया से प्रभावित होकर अधिक आक्रामक होना समाज व देश के विकास के लिए सही नहीं है। उन्होंने बताया कि वह कोशिश करते हैं कि केवल पढ़ाई के लिए और जरूरी सूचना के लिए ही मोबाइल फोन का इस्तेमाल करें।
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युवाओं में लग रही सोशल मीडिया की लत
-प्रीयांशु ने बताया कि वह भविष्य को लेकर चिंता में हैं। सोशल मीडिया का दबाव व तुलना की आदत लगने से युवाओं में सोशल मीडिया की गहरी लत लगती जा रही है। ऐसे में अधिकतर समय मोबाइल में बिताने से कॅरिअर बनाने में परेशानी आ सकती है। उन्होंने बताया कि वह अपनी दिनचर्या में एक तरीका अपना रहे हैं कि वह काम के बीच में तनाव को कम करने के लिए मोबाइल का कम उपयोग करेंगे।
भड़काऊ कंटेंट पर लगानी चाहिए रोक
-रजनीश ने बताया कि आज का युवा स्वयं को बेरोजगार महसूस करते हैं, जिसके कारण वह सोशल मीडिया पर अधिक समय व्यतीत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवा साथी सोशल मीडिया को ही अपनी हिंसा और भड़ास निकालने का सबसे अच्छा माध्यम समझते हैं, जिससे खासकर युवाओं पर गहरा असर होता दिख रहा है। इसलिए प्रशासन को हिंसा और आक्रोश को बढ़ाने वाले कंटेंट पर रोक लगानी चाहिए।
1928-1945 साइलेंट जेनरेशन
1946-1964 बेबी बूमर्स
1965-1980 जनरेशन एक्स
1981-1995 मिलेनियल्स
1996-2012 जेन जी
2013-2025 जेन अल्फा
2025 व आगे ओन वाली पीढ़ी जेन बीटा

151..... कमल

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