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Karnal News: जर्जर स्कूल भवन गिराने की तैयारी नए निर्माण का बजट अभी पास नहीं
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इंद्री खेड़ा गांव का स्कूल जहां के सभी कमरों को ध्वस्त किया जाना है। संवाद
इंद्री। शिक्षा विभाग ने क्षेत्र के 14 सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों को गिराने की प्रक्रिया तेज की है। इन भवनों की नीलामी 12 अक्तूबर को होगी। हालांकि, नए भवनों के निर्माण के लिए अभी तक बजट स्वीकृत नहीं हुआ है।
अभिभावकों और ग्रामीणों ने इस पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि पुराने भवन गिरने के बाद पर्याप्त कमरे नहीं बचेंगे। सर्दियां शुरू होने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था न होने पर बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। ग्रामीण इंद्रवेश, विनोद, रमेश और जय ने स्थायी व्यवस्था की मांग की। उन्होंने कहा कि जर्जर भवनों को सुरक्षा के लिए गिराना जरूरी है। लेकिन इससे पहले बच्चों के लिए स्थायी व्यवस्था होनी चाहिए। खुले में कक्षाएं लगाना बच्चों के लिए परेशानी का कारण बनेगा। सरकार को ध्वस्तीकरण और नए निर्माण की प्रक्रिया साथ-साथ चलानी चाहिए।
वैकल्पिक व्यवस्था और चिंता
खंड शिक्षा अधिकारी गुरनाम सिंह ने बताया कि खेड़ा गांव को छोड़कर सभी स्कूलों में वैकल्पिक व्यवस्था है। जर्जर भवनों में सुरक्षा कारणों से विद्यार्थियों को नहीं बैठाया जा सकता। जगह की कमी होने पर बच्चों को नजदीकी गांवों के स्कूलों में भेजा जाएगा। विद्यार्थियों के आवागमन के लिए विशेष बसों की व्यवस्था भी की जाएगी। पूर्व प्रिंसिपल महिंद्र खेड़ा ने खेड़ा स्कूल का पूरा भवन नीलामी सूची में होने पर नए बजट के बिना इसे गिराने को अनुचित बताया।
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जर्जर घोषित स्कूल और कमरे
इंद्री क्षेत्र के 14 स्कूलों के भवन और कमरे जर्जर घोषित किए गए हैं। इनमें डबकौली कलां, ढूंगरा, फाजिलपुर, कादराबाद, घिसरपुरी, गोरगढ़, धमनहेरी, मुरादगढ़, शेरगढ़ खालसा, खेड़ी मानसिंह, गढ़ी जाटान, खेड़ा और नगला रोड़ान शामिल हैं। डबकौली कलां व ढूंगरा प्राथमिक स्कूलों के दो-दो कमरे जर्जर हैं। गढ़ी जाटान वरिष्ठ माध्यमिक के दस कमरे और खेड़ा वरिष्ठ माध्यमिक के आठ कमरे व एक स्टोर भी सूची में हैं। फाजिलपुर, कादराबाद, घिसरपुरी, गोरगढ़, धमनहेरी, मुरादगढ़, शेरगढ़ खालसा, खेड़ी मानसिंह और नगला रोड़ान के विभिन्न कमरे व स्टोर भी जर्जर घोषित हुए हैं।
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अभिभावकों और ग्रामीणों ने इस पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि पुराने भवन गिरने के बाद पर्याप्त कमरे नहीं बचेंगे। सर्दियां शुरू होने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था न होने पर बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। ग्रामीण इंद्रवेश, विनोद, रमेश और जय ने स्थायी व्यवस्था की मांग की। उन्होंने कहा कि जर्जर भवनों को सुरक्षा के लिए गिराना जरूरी है। लेकिन इससे पहले बच्चों के लिए स्थायी व्यवस्था होनी चाहिए। खुले में कक्षाएं लगाना बच्चों के लिए परेशानी का कारण बनेगा। सरकार को ध्वस्तीकरण और नए निर्माण की प्रक्रिया साथ-साथ चलानी चाहिए।
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वैकल्पिक व्यवस्था और चिंता
खंड शिक्षा अधिकारी गुरनाम सिंह ने बताया कि खेड़ा गांव को छोड़कर सभी स्कूलों में वैकल्पिक व्यवस्था है। जर्जर भवनों में सुरक्षा कारणों से विद्यार्थियों को नहीं बैठाया जा सकता। जगह की कमी होने पर बच्चों को नजदीकी गांवों के स्कूलों में भेजा जाएगा। विद्यार्थियों के आवागमन के लिए विशेष बसों की व्यवस्था भी की जाएगी। पूर्व प्रिंसिपल महिंद्र खेड़ा ने खेड़ा स्कूल का पूरा भवन नीलामी सूची में होने पर नए बजट के बिना इसे गिराने को अनुचित बताया।
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जर्जर घोषित स्कूल और कमरे
इंद्री क्षेत्र के 14 स्कूलों के भवन और कमरे जर्जर घोषित किए गए हैं। इनमें डबकौली कलां, ढूंगरा, फाजिलपुर, कादराबाद, घिसरपुरी, गोरगढ़, धमनहेरी, मुरादगढ़, शेरगढ़ खालसा, खेड़ी मानसिंह, गढ़ी जाटान, खेड़ा और नगला रोड़ान शामिल हैं। डबकौली कलां व ढूंगरा प्राथमिक स्कूलों के दो-दो कमरे जर्जर हैं। गढ़ी जाटान वरिष्ठ माध्यमिक के दस कमरे और खेड़ा वरिष्ठ माध्यमिक के आठ कमरे व एक स्टोर भी सूची में हैं। फाजिलपुर, कादराबाद, घिसरपुरी, गोरगढ़, धमनहेरी, मुरादगढ़, शेरगढ़ खालसा, खेड़ी मानसिंह और नगला रोड़ान के विभिन्न कमरे व स्टोर भी जर्जर घोषित हुए हैं।