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Karnal News: परीक्षा की तैयारी में किताबों से ज्यादा अब एआई पर भरोसा
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परीक्षा की तैयारी में किताबों से ज्यादा अब एआई पर भरोसा
- फोटो : परीक्षा की तैयारी में किताबों से ज्यादा अब एआई पर भरोसा
-दो माह बाद शुरू होने वाली परीक्षाओं को लेकर विद्यार्थियों ने बदली रणनीति
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। कॉलेजों में परीक्षाओं की तैयारियों के लिए अब विद्यार्थियों का तरीका तेजी से बदल रहा है। काॅलेज परीक्षा में करीब दो माह का समय शेष होने के बावजूद कई विद्यार्थी पहले की तरह किताबों और नोट्स तक सीमित नहीं हैं। पढ़ाई से जुड़े सवालों के जवाब, कठिन टॉपिक की आसान व्याख्या, महत्वपूर्ण प्रश्न, शॉर्ट नोट्स और रिवीजन सामग्री तैयार करने के लिए विद्यार्थी एआई टूल्स का सहारा ले रहे हैं।
विद्यार्थियों का कहना है कि एआई ने परीक्षा की तैयारी को आसान बना दिया है। ऐसे में वर्तमान में परीक्षाओं की तैयारी के लिए किताबों और एआई टूल्स से काफी सहायता मिल रही हैं। कॉलेज विद्यार्थियों ने बताया कि पहले किसी विषय को समझने के लिए अलग-अलग किताबें या इंटरनेट पर कई वेबसाइट खंगालनी पड़ती थीं। अब एआई टूल में सवाल लिखकर विद्यार्थी अपनी जरूरत के अनुसार जवाब और उदाहरण मांग लेते हैं। इससे समय की बचत होने के साथ कठिन विषयों को दोहराना भी आसान हो रहा है।
कई बार ऐसे विषय व टॉपिक समझ नहीं आते हैं जिसमें चैट जीपीटी और जेमीनी जैसे एआई टूल्स बिल्कुल आसान भाषा में विषय को समझाने में मदद करते हैं। वहीं शिक्षकों का कहना है कि वे लेक्चर में हर विषय को विस्तार से समझाते हैं लेकिन विद्यार्थी अपनी समझ के हिसाब से एआई से और भी अधिक गहराई से विषय को समझ रहे हैं। एआई का सही उपयोग करना और पूरी तरह से एआई पर भी निर्भर न होकर पढ़ाई करनी चाहिए।
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बोले- विद्यार्थी
अपनी भाषा में समझ लेते हैं कठिन टॉपिक
बीए तृतीय वर्ष की छात्रा संध्या ने बताया कि कई बार कक्षा में पढ़ाया गया कोई विषय पूरी तरह समझ नहीं आता। ऐसे में एआई से उसी टॉपिक को आसान भाषा और उदाहरण के साथ समझने में मदद मिलती है। परीक्षा से पहले महत्वपूर्ण बिंदुओं की सूची बनाकर रिवीजन भी किया जा सकता है।
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नोट्स बनाने में मिल रही मदद
बीकॉम तृतीय वर्ष की सूचिता ने बताया कि लंबे अध्याय पढ़ने के बाद उनके महत्वपूर्ण बिंदु अलग करना समय लेने वाला काम है। एआई की मदद से किसी टॉपिक के मुख्य बिंदु, संभावित प्रश्न और रिवीजन प्वाइंट तैयार कर लेते हैं। इसके बाद किताब से मिलान कर तैयारी पूरी करते हैं। ऐसे एआई को अपनी भाषा में अपने प्रश्नों को उत्तर आसानी से ले पाते हैं।
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प्रश्नों का अभ्यास करने में भी ले रहे एआई की मदद
बीए द्वितीय वर्ष की तन्नू ने बताया कि परीक्षा से पहले केवल पढ़ना ही नहीं, बल्कि सवाल हल करने का अभ्यास भी जरूरी है। एआई से किसी अध्याय से जुड़े अभ्यास प्रश्न तैयार करवाकर वह खुद उनका उत्तर देने का प्रयास करती हैं। इससे यह पता चलता है कि किस टॉपिक में अभी और तैयारी की जरूरत है लेकिन एआई भी कई बार गलत उत्तर देता है जिसे शिक्षक से समझना हर विद्यार्थी के लिए जरूरी है।
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किताब का विकल्प नहीं, तैयारी में सहायक मान रहे विद्यार्थी
बीएससी तृतीय वर्ष की छात्रा नैन्सी ने बताया कि एआई से मिली जानकारी को सीधे परीक्षा में लिखने के बजाय किताब और शिक्षक के नोट्स से मिलान करना जरूरी है। एआई से तैयारी का तरीका आसान हुआ है, लेकिन विषय की सही और प्रमाणिक जानकारी के लिए किताबों व शिक्षक को प्राथमिकता देना जरूरी है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। कॉलेजों में परीक्षाओं की तैयारियों के लिए अब विद्यार्थियों का तरीका तेजी से बदल रहा है। काॅलेज परीक्षा में करीब दो माह का समय शेष होने के बावजूद कई विद्यार्थी पहले की तरह किताबों और नोट्स तक सीमित नहीं हैं। पढ़ाई से जुड़े सवालों के जवाब, कठिन टॉपिक की आसान व्याख्या, महत्वपूर्ण प्रश्न, शॉर्ट नोट्स और रिवीजन सामग्री तैयार करने के लिए विद्यार्थी एआई टूल्स का सहारा ले रहे हैं।
विद्यार्थियों का कहना है कि एआई ने परीक्षा की तैयारी को आसान बना दिया है। ऐसे में वर्तमान में परीक्षाओं की तैयारी के लिए किताबों और एआई टूल्स से काफी सहायता मिल रही हैं। कॉलेज विद्यार्थियों ने बताया कि पहले किसी विषय को समझने के लिए अलग-अलग किताबें या इंटरनेट पर कई वेबसाइट खंगालनी पड़ती थीं। अब एआई टूल में सवाल लिखकर विद्यार्थी अपनी जरूरत के अनुसार जवाब और उदाहरण मांग लेते हैं। इससे समय की बचत होने के साथ कठिन विषयों को दोहराना भी आसान हो रहा है।
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कई बार ऐसे विषय व टॉपिक समझ नहीं आते हैं जिसमें चैट जीपीटी और जेमीनी जैसे एआई टूल्स बिल्कुल आसान भाषा में विषय को समझाने में मदद करते हैं। वहीं शिक्षकों का कहना है कि वे लेक्चर में हर विषय को विस्तार से समझाते हैं लेकिन विद्यार्थी अपनी समझ के हिसाब से एआई से और भी अधिक गहराई से विषय को समझ रहे हैं। एआई का सही उपयोग करना और पूरी तरह से एआई पर भी निर्भर न होकर पढ़ाई करनी चाहिए।
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बोले- विद्यार्थी
अपनी भाषा में समझ लेते हैं कठिन टॉपिक
बीए तृतीय वर्ष की छात्रा संध्या ने बताया कि कई बार कक्षा में पढ़ाया गया कोई विषय पूरी तरह समझ नहीं आता। ऐसे में एआई से उसी टॉपिक को आसान भाषा और उदाहरण के साथ समझने में मदद मिलती है। परीक्षा से पहले महत्वपूर्ण बिंदुओं की सूची बनाकर रिवीजन भी किया जा सकता है।
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नोट्स बनाने में मिल रही मदद
बीकॉम तृतीय वर्ष की सूचिता ने बताया कि लंबे अध्याय पढ़ने के बाद उनके महत्वपूर्ण बिंदु अलग करना समय लेने वाला काम है। एआई की मदद से किसी टॉपिक के मुख्य बिंदु, संभावित प्रश्न और रिवीजन प्वाइंट तैयार कर लेते हैं। इसके बाद किताब से मिलान कर तैयारी पूरी करते हैं। ऐसे एआई को अपनी भाषा में अपने प्रश्नों को उत्तर आसानी से ले पाते हैं।
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प्रश्नों का अभ्यास करने में भी ले रहे एआई की मदद
बीए द्वितीय वर्ष की तन्नू ने बताया कि परीक्षा से पहले केवल पढ़ना ही नहीं, बल्कि सवाल हल करने का अभ्यास भी जरूरी है। एआई से किसी अध्याय से जुड़े अभ्यास प्रश्न तैयार करवाकर वह खुद उनका उत्तर देने का प्रयास करती हैं। इससे यह पता चलता है कि किस टॉपिक में अभी और तैयारी की जरूरत है लेकिन एआई भी कई बार गलत उत्तर देता है जिसे शिक्षक से समझना हर विद्यार्थी के लिए जरूरी है।
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किताब का विकल्प नहीं, तैयारी में सहायक मान रहे विद्यार्थी
बीएससी तृतीय वर्ष की छात्रा नैन्सी ने बताया कि एआई से मिली जानकारी को सीधे परीक्षा में लिखने के बजाय किताब और शिक्षक के नोट्स से मिलान करना जरूरी है। एआई से तैयारी का तरीका आसान हुआ है, लेकिन विषय की सही और प्रमाणिक जानकारी के लिए किताबों व शिक्षक को प्राथमिकता देना जरूरी है।