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चालू लोन छिपाकर फर्जी दस्तावेजों से लिए नए ऋण
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करनाल। कृषि योग्य भूमि पर बैंक की योजनाओं के तहत चल रहे ऋण को छिपाकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऋण लेने के तीन मामले सामने आए हैं। तीनों मामले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अनाज मंडी शाखा के हैं। इसका पता बैंक को तब चला जब आरोपी लोन की किश्तें नहीं भर पाए और बैंक ने अपने स्तर पर जांच कराई। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर कई बैंकों से अलग-अलग समय में लोन लिए हैं। बैंक प्रबंधक राजेश साहू ने एसपी को तीनों के खिलाफ अलग-अलग शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने तीनों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
मामला-1
आरोपी धर्मवीर वासी औगंद की गांव में खेती योग्य 38 कनाल जमीन है। उसने एसबीआई से 2009 में 1.50 लाख रुपये का ऋण केसीसी के तहत लिया था। आरोपी ने अन्य अधिकारियों से मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसी जमीन पर स्टेट बैंक ऑफ पटियाला निसिंग से 7 लाख रुपये का लोन चालू लोन को छिपाते हुए लिए। जिसका रिकार्ड जमाबंदी साल 2014-2015 में दर्ज है। इसके आधार पर 2 लाख रुपये की जमानत अदालत में भी दी थी। अब लोन की किश्त न भरने पर हुई जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया है।
मामला-2
आरोपी नफे सिंह वासी बड़ौता ने खेती योग्य 34 बीघा, 12 बिस्वे जमीन पर 2008 में 5.90 लाख रुपये ऋण केसीसी और केजीसी के तहत लिया था। 3.50 लाख रुपये केसीसी लोन अब बंद हो चुका है। आरोपी ने अन्य अधिकारियों से मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन पर साल 2011 में ओबीसी बैंक सेक्टर-8 से पांच लाख, 2014 में एक्सिस बैंक बसताड़ा से 11 लाख, 2015 में स्टेट बैंक ऑफ पटियाला एनडीआरआई शाखा से 10 लाख और 2016 में पीएनबी प्रेम नगर से 10 लाख रुपये का ऋण लिया। जोकि पहले लोन को छिपाकर लिया गया।
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मामला-3
आरोपी संजय वासी औगंद की गांव में खेती योग्य 51 कनाल 6 मरले जमीन है। इस पर 2007 में बैंक से 4.80 लाख रुपये का ऋण केसीसी और केजीसी के तहत लिया था। केजीसी लोन 3.20 लाख रुपये अब बंद हो चुका है। आरोपी ने मिलीभगत करके फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इसी जमीन पर 2011 में ओबीसी निसिंग से 5 लाख, 2016 में स्टेट बैंक ऑफ पटियाला एनडीआरआई से 17.50 लाख, 2017 में ओबीसी निसिंग से 9.50 लाख रुपये का लोन लिया है। किश्त न भरने पर जांच की तो ये फर्जीवाड़ा सामने आया है।
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मामला-1
आरोपी धर्मवीर वासी औगंद की गांव में खेती योग्य 38 कनाल जमीन है। उसने एसबीआई से 2009 में 1.50 लाख रुपये का ऋण केसीसी के तहत लिया था। आरोपी ने अन्य अधिकारियों से मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसी जमीन पर स्टेट बैंक ऑफ पटियाला निसिंग से 7 लाख रुपये का लोन चालू लोन को छिपाते हुए लिए। जिसका रिकार्ड जमाबंदी साल 2014-2015 में दर्ज है। इसके आधार पर 2 लाख रुपये की जमानत अदालत में भी दी थी। अब लोन की किश्त न भरने पर हुई जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया है।
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मामला-2
आरोपी नफे सिंह वासी बड़ौता ने खेती योग्य 34 बीघा, 12 बिस्वे जमीन पर 2008 में 5.90 लाख रुपये ऋण केसीसी और केजीसी के तहत लिया था। 3.50 लाख रुपये केसीसी लोन अब बंद हो चुका है। आरोपी ने अन्य अधिकारियों से मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन पर साल 2011 में ओबीसी बैंक सेक्टर-8 से पांच लाख, 2014 में एक्सिस बैंक बसताड़ा से 11 लाख, 2015 में स्टेट बैंक ऑफ पटियाला एनडीआरआई शाखा से 10 लाख और 2016 में पीएनबी प्रेम नगर से 10 लाख रुपये का ऋण लिया। जोकि पहले लोन को छिपाकर लिया गया।
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मामला-3
आरोपी संजय वासी औगंद की गांव में खेती योग्य 51 कनाल 6 मरले जमीन है। इस पर 2007 में बैंक से 4.80 लाख रुपये का ऋण केसीसी और केजीसी के तहत लिया था। केजीसी लोन 3.20 लाख रुपये अब बंद हो चुका है। आरोपी ने मिलीभगत करके फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इसी जमीन पर 2011 में ओबीसी निसिंग से 5 लाख, 2016 में स्टेट बैंक ऑफ पटियाला एनडीआरआई से 17.50 लाख, 2017 में ओबीसी निसिंग से 9.50 लाख रुपये का लोन लिया है। किश्त न भरने पर जांच की तो ये फर्जीवाड़ा सामने आया है।