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Karnal News: पशु आहार मात्रा पर शोध करेंगे एनडीआरआई के वैज्ञानिक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 10 Sep 2024 06:00 AM IST
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NDRI scientists will do research on animal feed quantity
अखिल भारतीय डिस्टिलरीज एसोसिएशन (एआईडीए), नई दिल्ली के सहयोग से आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, एनडीआरआई में वैज्ञानिकों व अखिल भारतीय डिस्टिलरीज एसोसिएशन के बीच हुई बैठक
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। अब गन्ने के साथ साथ मक्का और चावल से भी जैविक इथेनाल बनने लगा है। इसके बनने के बाद जो निष्प्रयोज्य अवशेष बचता है, वह प्रोटीन से भरपूर होने के कारण उसे पशु आहार बनाने का कार्य शुरू हो गया है लेकिन अभी ये तय नहीं हो पाया है कि ये आहार पशु के कितना सुरक्षित है और पशु को कितनी मात्रा में दिया जा सकता है।
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इस पर अब राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) के वैज्ञानिक शोध करेंगे। इसके लिए संस्थान निदेशक डॉ.धीर सिंह की अध्यक्षता में वैज्ञानिकों व अखिल भारतीय डिस्टिलरीज एसोसिएशन (एआईडीए), नई दिल्ली के पदाधिकारियों की मौजूदगी में संगोष्ठी की गई।
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एनडीऐआरआई के डॉ. एनएन दस्तूर सभागार में घुलनशील पदार्थों के साथ सूखे डिस्टिलरी अनाज (डीडीजीएस) पर आयोजित संगोष्ठी में निदेशक और कुलपति डॉ. धीर सिंह ने सतत पर्यावरण, शुद्ध शून्य कार्बन नीति और सर्कुलर अर्थव्यवस्था पर जोर दिया। कहा कि देश जैव-इथेनॉल उत्पादन की क्वांटम जंप के लिए अपनी गतिविधियों और नीतियों को तैयार कर रहा है। चीनी के अलावा अनाज (जैसे मक्का, चावल आदि) पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
डीडीजीएस में उच्च पोषण मूल्य है और इसका उपयोग मूल्यवर्धित उत्पादों का उत्पादन करने के लिए माइक्रोबियल किण्वन द्वारा पशु फीड के लिए किया जा सकता है और उच्च उत्पादन को बढ़ाने के लिए गुणवत्ता वाले फ़ीड (आहार) सामग्री की आपूर्ति के आधार पर पशुधन क्षेत्र की तत्काल चुनौतियों का समाधान कर सकता है।
इस जैव रिफाइनरी प्रक्रिया में घुलनशील पदार्थों के साथ सूखे डिस्टिलरी अनाज (डीडीजीएस) के रूप में भारी मात्रा में सह-उत्पाद उत्पन्न हो रहे हैं जो प्रोटीन, ऊर्जा, विटामिन और खनिजों से भरपूर हैं। निदेशक ने कहा कि आईसीएआर-एनडीआरआई को डीडीजीएस की विभिन्न चुनौतियों पर विज्ञान आधारित साक्ष्य तैयार करने के लिए तैयार है।
अखिल भारतीय डिस्टिलरी एसोसिएशन (एआईडीए), नई दिल्ली के सलाहकार सुनील दुग्गल ने डीडीजीएस पर उनके भविष्य के रोडमैप पर प्रकाश डाला। संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. राजन शर्मा ने पारंपरिक सांद्र सामग्री के आंशिक प्रतिस्थापन के लिए डीडीजीएस के महत्व पर प्रकाश डाला और गुणवत्ता और सुरक्षा मुद्दे पर जोर दिया।

उद्योग और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई वक्ताओं ने पशु पोषण विशेषज्ञ और पशु पोषण प्रभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. एके.वर्मा, आईसीएआर-आईवीआरआई, बरेली, उत्तर प्रदेश की अध्यक्षता में डीडीजीएस पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

संगोष्ठी के आयोजन सचिव डॉ. सचिन कुमार ने सिफारिशों का सारांश प्रस्तुत किया। तकनीकी सत्र का समन्वय डॉ. नितिन त्यागी और संगोष्ठी के सह-आयोजन सचिव डॉ. गौतम मंडल ने किया। अंत में अतिथियों को स्मृति चिह्न भी दिए गए।
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