अंतरिक्ष परी जैसे तो बनना चाहती हैं, पर उन्हें जानती नहीं

करनाल Updated Sun, 02 Feb 2014 12:12 AM IST
करनाल की बेटी और अंतरिक्ष परी डॉ. कल्पना चावला के स्कूल में पढ़ने वाली छात्राएं उनकी ही तरह बनना तो चाहती हैं, लेकिन उनकी उपलब्धियों से अनभिज्ञ हैं।

चावला बनने की कल्पना संजोए ये छात्राएं भले ही उस स्कूल में पढ़ रही हैं, जहां से अंतरिक्ष परी पढ़ी थी, लेकिन उन्हें यह नहीं बताया जा रहा है कि आखिर कल्पना चावला की उपलब्धियां क्या थीं? उन्हें सिर्फ इतना पता है कि कल्पना एक आदर्श बेटी, छात्रा और अपने सपनों को पूरा करने के लिए खुले आसमान में उड़ने वाली महिला थीं, लेकिन वे कल्पना चावला की जीवनी के ज्ञान से परे हैं।

छात्राएं जानती हैं कि कल्पना करनाल की रहने वाली थी, लेकिन कहां रहती थी, कोई नहीं जानती। शनिवार को कल्पना चावला की पुण्यतिथि मनाई गई। स्कूल परिसर में कल्पना को श्रद्धांजलि दी गई। लेकिन विद्यार्थियों को नहीं पता कि उनकी यह कौन सी पुण्यतिथि थी।


अंतरिक्ष परी कल्पना चावला ने टैगोर बाल निकेतन स्कूल में पढ़कर अपनी विश्व में अलग पहचान बनाई। टैगोर बाल निकेतन स्कूल समय-समय पर कल्पना के नाम पर स्कूल स्तर पर बड़े-बडे़ कार्यक्रमों का आयोजन करता रहता है। शायद यही कारण है कि अंतरिक्ष परी कल्पना चावला को शिक्षित करने वाले स्कूल में जिले के लोग अपने बच्चों को दाखिला दिलाकर उन्हें भी अंतरिक्ष परी की राह पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। मगर विडंबना यह है कि टैगोर स्कूल के विद्यार्थी कल्पना चावला के बारे में कुछ विशेष जानकारी नहीं रखते हैं। छात्रों को जानकारी है कि कल्पना चावला टैगोर बाल निकेतन की छात्रा रही, लेकिन यदि उनके जीवन के बारे में पूछा जाए तो छात्र एक दूसरे के चेहरे को देखने लगते हैं। आठवीं कक्षा से 12 वीं कक्षा की छात्रों से जब कल्पना चावला के बारे में बातचीत की गई तो उनकी बातें हास्यपद लगी।

कल्पना ने विदेश से की थी पढ़ाई
कल्पना हमारे शहर की रहने वाली थी। अंतरिक्ष में जाकर तारों की सैर करना ही कल्पना का सपना था। शिक्षा के क्षेत्र में काफी होशियार होने के कारण उन्होंने विदेश जाकर उच्च शिक्षा हासिल की। एक फरवरी को कल्पना की पुण्यतिथि होती है। -प्रीति, कक्षा-आठवीं
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महिला होने पर करना पड़ा कल्पना को संघर्ष
कल्पना करनाल में रहती थी, आसमान को छूना चाहती थी। महिला होने पर उसे काफी संघर्ष करना पड़ा, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और अपने सपनों को साकार करने के लिए मेहनत करते हुए अपना मुकाम हासिल किया। कल्पना खुली आंखों से सपने देखना चाहती थीं।
-जागृति भाटिया, कक्षा-बारहवीं
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कल्पना का जन्म कब हुआ, पता नहीं
कल्पना करनाल की रहने वाली थी, अपने सपनों को पूरा करने के लिए कल्पना ने काफी मेहनत की। मेहनत के बल पर ही कल्पना ने अमेरिका में जाकर अपनी शिक्षा पूर्ण की और वहीं पर उसने अपने सपनों को पूरा किया। एक फरवरी को उनकी पुण्यतिथि होती है। उनका जन्म कब हुआ, नहीं पता।
-पंखुड़ी कक्षा-नौवीं
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करनाल में कहां रहती थी, नहीं पता?
कल्पना करनाल की रहने वाली थी, लेकिन कहां रहती थी नहीं पता। उनके पापा ने उन्हें मोटीवेट किया। पिता के मना करने के बाद भी कल्पना ने अमेरिका जाकर शिक्षा पूर्ण की। बचपन में कल्पना नीचे से ऊपर की ओर देखती रहती थी। बचपन से ही कल्पना ऊंचाइयों को छूने की इच्छा रखती थी। एक फरवरी को कल्पना की पुण्यतिथि होती है।
-पल्लवी, कक्षा-दसवीं

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