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Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Haryana Day Special: Haryanvi dialect unites all in one thread

हरियाणा दिवस विशेष: हरियाणवी हां दब्या कोनी करदे, आना-जाना हानि और लाभ का... जैसे गीतों से हरियाणवी बोली सभी को पिरोती है एक सूत्र में

Mon, 01 Nov 2021 02:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो नरेंद्र शर्मा, अमर उजाला ब्यूरो, करनाल।
नरेंद्र शर्मा, अमर उजाला ब्यूरो, करनाल। Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 01 Nov 2021 02:45 AM IST
सार

किसी भी प्रदेश की भाषा या बोली लोगों को एक सूत्र में पिरोने का काम करती है। ऐसे ही हरियाणवी बोली भी लोगों को एक सूत्र में बांधती है। हर कार्यक्रम मेें एक ही तरह के गीत महिलाएं गुनगुनाती हैं। हरियाणवी बोली विदेशों तक पहुंच गई है। सोशल मीडिया पर भी हरियाणवी बोली और गीत खूब पसंद हैं।

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Haryana Day Special: Haryanvi dialect unites all in one thread
55 साल का हरियाणा(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणवी हां दब्या कोनी करदे, आना जाना हानि और लाभ का... यह हरियाणवी गीत काफी प्रचलित है। मतलब कि हरियाणा के लोग हानि-लाभ होने पर भी नहीं घबराते और हंसते हुए हर समस्या से पार पा लेते हैं। यह बोली प्रदेश की 36 बिरादरी व समाज के लोगों को एकता के सूत्र में पिरोती है। प्रदेश के 22 जिलों में हर कार्यक्रम मेें एक ही तरह के गीत महिलाएं गुनगुनाती हैं। हरियाणवी बोली विदेशों तक पहुंच गई है। सोशल मीडिया पर भी हरियाणवी बोली और गीत खूब पसंद हैं। हरियाणा की बोली और संस्कृति ने बॉलीवुड को भी आकर्षित किया है, लेकिन आज तक इसे भाषा का दर्जा नहीं मिल सका है।
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बॉलीवुड से विदेशों तक धूम
म्हारा नाम है कुसुम सांगवान, अर फोन नंबर मैं देऊं कोन्या... अभिनेत्री कंगना राणौत द्वारा तनु वैड्स मनु में बोला गया यह डायलॉग खूब लोकप्रिय हुआ। बॉलीवुड फिल्म निर्माताओं ने तनु वैडस मनु, सुल्तान, दंगल, लाल रंग आदि नामी फिल्में हरियाणावी पृष्ठभूमि पर बनाई जिन्हाेंने करोड़ों का व्यवसाय किया। वहीं करनाल के विकास श्योरण आस्ट्रेलिया में नामी यू ट्यूबर हैं जिनके विदेश में भी लाखों फॉलोवर हैं।
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हरियाणवी पहनावा हुआ लुप्त
हरियाणा अपने खान-पान और पहनावे कोलेकर जाना जाता है लेकिन समय के साथ पहनावा लुप्त होता जा रहा है। अब सिर्फ विशेष कार्यक्रमों में ही हरियाणवी पहनावा नजर आता है।
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पंजाबी की तर्ज पर भाषा का दर्जा नहीं

55 वर्ष के इतिहास में आज तक हरियाणवी बोली को भाषा का दर्जा नहीं मिल पाया। स्कूल-कॉलेजों में पंजाबी पढ़ाई जाती है लेकिन हरियाणवी नहीं। जिससे आगामी पीढ़ी हरियाणा बोली व संस्कृति को कैसे बरकरार रख सकेगी। सरकार को इस बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए। जबकि हरियाणवी आर्यों की मूल भाषा बताई जाती है, जो कि 1500 ई. पूर्व भारत में आई थी। - रामजी लाल, पूर्व प्राचार्य दयाल सिंह कॉलेज

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