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गैंगरेप पीड़िता के परिजनों ने गांव छोड़ा, पंजाब में ली शरण
अमर उजाला/ब्यूरो, करनाल
Updated Wed, 16 Jul 2014 12:43 AM IST
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इंद्री के एक गांव में गैंगरेप की शिकार नाबालिग के परिजन घर का सारा
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सामान समेटकर गांव छोड़कर पंजाब चले गए। गांव छोड़ने से पहले नाबालिग के
परिजनों और पिछले करीब 28 साल से साथ रह रहे पड़ोस के लोगों की आंखें नम
रहीं। पीड़िता के पिता ने रुंधे गले से बात करते हुए मांग की कि रेप के
आरोपियों को फांसी की सजा दी जाए।
उन्होंने कहा कि उन्हें जान का खतरा है। आरोपी प्रधान दबंग है। उसके परिवार के लोग दबाव डाल रहे थे। पुलिस उनकी कोई मदद नहीं कर रही है। पीड़िता को पहले ही परिजनों ने रिश्तेदारी में भेज दिया था अब खुद भी गांव से पूरी तरह पलायन कर लिया है।
इस दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी ने परिवार को जाने से नहीं रोका।
मंगलवार को पीड़िता के परिजनों ने सुबह से ही कैंटर में सामान लादना शुरू कर दिया था। गांव की कुछ महिलाओं ने इन लोगाें को रोकने का प्रयास किया, परंतु पीड़िता के पिता ने कहा कि जब उनकी इज्जत नहीं रही तो गांव में कैसे रहें। गुरुद्वारे के ग्रंथी के तौर पर उन्होंने गांव के लोगों को भाईचारे का संदेश दिया। गुरुद्वारे के प्रधान और उसके नौकर ने उसकी बेटी के साथ जो दरिंदगी की है।
उससे उनका पूरा परिवार टूट चुका है। नाबालिग के पिता ने बताया कि क्षेत्र के इस गुरुद्वारे में कोई ग्रंथी अपने परिवार के साथ न आए। हालांकि इस गांव में काफी लोग भले हैं। उन्होंने दुख-सुख की घड़ी में पूरा साथ दिया है, लेकिन इस घटना के बाद उनका सामाजिक रूप से सम्मान खत्म हो गया है। इसी के साथ उनके परिवार को जान का खतरा है। वह हरियाणा में कहीं नहीं रहेंगे, बल्कि वापस पंजाब चले जाएंगे।
यह था मामला
कुछ दिन पहले इंद्री क्षेत्र के एक गांव में गुरुद्वारे के प्रधान तथा उसके नौकर ने गुरुद्वारे के ग्रंथी की बेटी से गैंगरेप किया था। मामले को निपटाने के लिए गांव में पंचायतों का दौर भी चला। पीड़िता के पिता पर मामले में समझौते का दबाव बनाया गया। आरोपी के खिलाफ थाना इंद्री पुलिस में शिकायत दी। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर दिया था। कोर्ट ने आरोपियों को जेल भेज दिया है। लोक लाज के चलते परिजनों ने नाबालिग को रिश्तेदारी में भेज दिया था। उसी दिन से पूरे परिवार की गांव से पलायन की खबरें आ रही थीं। परिवार के अन्य लोगों ने भी मंगलवार को सामान समेटकर कैंटर में लादकर गांव छोड़ दिया और पंजाब चले गए।
ऐसा जख्म जो गांव में रहकर नहीं भर सकता
पीड़िता के पिता ने बताया कि वह 28 साल पहले इस गांव में आए थे। आरोपी प्रधान ने उन्हें जो जख्म दिया वह इस गांव में रहकर नहीं भर सकता। वह गुरुद्वारे में ग्रंथी के तौर पर रहे। उनका परिवार भी गुरुद्वारे में बंद कमरे में रहता था। इस दौरान उन्होंने गांव में भाईचारा बनाए रखा। वह आरोपी प्रधान पर भी विश्वास करता था, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि उसकी नीयत इतनी बुरी है।
सुरक्षा मांगेंगे तो मिलेगी
इंद्री के डीएसपी बलजिंद्र सिंह ने बताया कि गैंगरेप मामले में पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर दिया था। इस मामले में कोई ढिलाई नहीं बरती गई। जहां तक गांव से पलायन करने की बात है वह लोग मर्जी से गांव छोड़ रहे हैं। उन लोगों ने पुलिस से किसी खतरे की बात नहीं की। यदि ये लोग सुरक्षा मांगते हैं तो उन्हें दी जाती।
डीसी बोले, अन्याय नहीं होगा
डीसी बलराज सिंह ने बताया कि इंद्री के अधिकारियों से मामले की जानकारी लेंगे। उनके संज्ञान में ऐसा मामला नहीं आया है। यदि कोई परिवार इस तरह से गांव छोड़कर जा रहा है तो इस संबंध में जांच की जाएगी और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि उन्हें जान का खतरा है। आरोपी प्रधान दबंग है। उसके परिवार के लोग दबाव डाल रहे थे। पुलिस उनकी कोई मदद नहीं कर रही है। पीड़िता को पहले ही परिजनों ने रिश्तेदारी में भेज दिया था अब खुद भी गांव से पूरी तरह पलायन कर लिया है।
इस दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी ने परिवार को जाने से नहीं रोका।
मंगलवार को पीड़िता के परिजनों ने सुबह से ही कैंटर में सामान लादना शुरू कर दिया था। गांव की कुछ महिलाओं ने इन लोगाें को रोकने का प्रयास किया, परंतु पीड़िता के पिता ने कहा कि जब उनकी इज्जत नहीं रही तो गांव में कैसे रहें। गुरुद्वारे के ग्रंथी के तौर पर उन्होंने गांव के लोगों को भाईचारे का संदेश दिया। गुरुद्वारे के प्रधान और उसके नौकर ने उसकी बेटी के साथ जो दरिंदगी की है।
उससे उनका पूरा परिवार टूट चुका है। नाबालिग के पिता ने बताया कि क्षेत्र के इस गुरुद्वारे में कोई ग्रंथी अपने परिवार के साथ न आए। हालांकि इस गांव में काफी लोग भले हैं। उन्होंने दुख-सुख की घड़ी में पूरा साथ दिया है, लेकिन इस घटना के बाद उनका सामाजिक रूप से सम्मान खत्म हो गया है। इसी के साथ उनके परिवार को जान का खतरा है। वह हरियाणा में कहीं नहीं रहेंगे, बल्कि वापस पंजाब चले जाएंगे।
यह था मामला
कुछ दिन पहले इंद्री क्षेत्र के एक गांव में गुरुद्वारे के प्रधान तथा उसके नौकर ने गुरुद्वारे के ग्रंथी की बेटी से गैंगरेप किया था। मामले को निपटाने के लिए गांव में पंचायतों का दौर भी चला। पीड़िता के पिता पर मामले में समझौते का दबाव बनाया गया। आरोपी के खिलाफ थाना इंद्री पुलिस में शिकायत दी। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर दिया था। कोर्ट ने आरोपियों को जेल भेज दिया है। लोक लाज के चलते परिजनों ने नाबालिग को रिश्तेदारी में भेज दिया था। उसी दिन से पूरे परिवार की गांव से पलायन की खबरें आ रही थीं। परिवार के अन्य लोगों ने भी मंगलवार को सामान समेटकर कैंटर में लादकर गांव छोड़ दिया और पंजाब चले गए।
ऐसा जख्म जो गांव में रहकर नहीं भर सकता
पीड़िता के पिता ने बताया कि वह 28 साल पहले इस गांव में आए थे। आरोपी प्रधान ने उन्हें जो जख्म दिया वह इस गांव में रहकर नहीं भर सकता। वह गुरुद्वारे में ग्रंथी के तौर पर रहे। उनका परिवार भी गुरुद्वारे में बंद कमरे में रहता था। इस दौरान उन्होंने गांव में भाईचारा बनाए रखा। वह आरोपी प्रधान पर भी विश्वास करता था, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि उसकी नीयत इतनी बुरी है।
सुरक्षा मांगेंगे तो मिलेगी
इंद्री के डीएसपी बलजिंद्र सिंह ने बताया कि गैंगरेप मामले में पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर दिया था। इस मामले में कोई ढिलाई नहीं बरती गई। जहां तक गांव से पलायन करने की बात है वह लोग मर्जी से गांव छोड़ रहे हैं। उन लोगों ने पुलिस से किसी खतरे की बात नहीं की। यदि ये लोग सुरक्षा मांगते हैं तो उन्हें दी जाती।
डीसी बोले, अन्याय नहीं होगा
डीसी बलराज सिंह ने बताया कि इंद्री के अधिकारियों से मामले की जानकारी लेंगे। उनके संज्ञान में ऐसा मामला नहीं आया है। यदि कोई परिवार इस तरह से गांव छोड़कर जा रहा है तो इस संबंध में जांच की जाएगी और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।