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Karnal News: बारिश में हो रहा कान का संक्रमण, ईयरफोन से और बढ़ रही बीमारी
Sat, 06 Sep 2025 02:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sat, 06 Sep 2025 02:27 AM IST
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402... नागरिक अस्पताल में ईएनटी के बाहर लगी कतार। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। बारिश में कान के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। जिला नागरिक अस्पताल के ईएनटी विभाग में रोजाना 50 से 60 नए मरीज ऑटोमायकोसिस (कान का फंगल संक्रमण) के पहुंच रहे हैं। सामान्य दिनों की तुलना में मरीजों की संख्या में 15 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। सबसे अधिक प्रभावित युवा वर्ग और कामकाजी लोग हैं। ईयरफोन का अधिक और लगातार इस्तेमाल बीमारी को और बढ़ा रहा है।
नागरिक अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. जयवर्धन ने बताया कि बरसात में वातावरण में नमी बढ़ जाती है। नहाने या बारिश के दौरान कान में पानी जाने से नमी लंबे समय तक बनी रहती है। यही नमी फंगस के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती है। कान की नली में पानी रुक जाने पर फंगस के पनपने की आशंका बढ़ जाती है। लोग ईयरफोन का लंबे समय तक उपयोग करते हैं तो कान में हवा का प्रवाह कम हो जाता है। ऐसे में नमी बनी रहती है। इससे संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि जब खुजली होती है तो लोग नुकीली चीजें डालकर कान साफ करने की कोशिश करते हैं। इससे भी कान में संक्रमण फैल जाता है। संक्रमण होने पर ऐसा लगता है कि कानों से कम सुनाई दे रहा है। पानी या अन्य चीज निगलने पर कान बंद होने जैसा महसूस होता है।
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दर्द और सुनने में कमी की शिकायतें
डॉ. जयवर्धन के मुताबिक शुरुआत में फंगस बाहरी कान (एक्सटर्नल ईयर कैनाल) को प्रभावित करता है। मरीज को कान में खुजली, भारीपन, दर्द और सुनने में कमी की शिकायत होती है। अगर समय पर इलाज न मिले तो यह संक्रमण कान की झिल्ली तक असर डाल सकता है। गंभीर स्थिति में सुनने की क्षमता स्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है।
- ये हैं लक्षण
कान में लगातार खुजली
कान में दर्द या जलन
कान से बदबूदार तरल निकलना
कान में भारीपन महसूस होना
सुनने में कमी महसूस होना
कान की नली में सूजन होना
लालिमा, पपड़ीदार त्वचा हो जाना
- बचाव के उपाय
कान में पानी जाने से बचाएं
भीग जाने पर तुरंत सुखाएं
ईयरफोन का लंबे समय तक इस्तेमाल न करें
खुजली होने पर नुकीली वस्तु न डालें
समस्या होने पर डॉक्टर से परामर्श लें
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करनाल। बारिश में कान के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। जिला नागरिक अस्पताल के ईएनटी विभाग में रोजाना 50 से 60 नए मरीज ऑटोमायकोसिस (कान का फंगल संक्रमण) के पहुंच रहे हैं। सामान्य दिनों की तुलना में मरीजों की संख्या में 15 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। सबसे अधिक प्रभावित युवा वर्ग और कामकाजी लोग हैं। ईयरफोन का अधिक और लगातार इस्तेमाल बीमारी को और बढ़ा रहा है।
नागरिक अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. जयवर्धन ने बताया कि बरसात में वातावरण में नमी बढ़ जाती है। नहाने या बारिश के दौरान कान में पानी जाने से नमी लंबे समय तक बनी रहती है। यही नमी फंगस के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती है। कान की नली में पानी रुक जाने पर फंगस के पनपने की आशंका बढ़ जाती है। लोग ईयरफोन का लंबे समय तक उपयोग करते हैं तो कान में हवा का प्रवाह कम हो जाता है। ऐसे में नमी बनी रहती है। इससे संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है।
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उन्होंने बताया कि जब खुजली होती है तो लोग नुकीली चीजें डालकर कान साफ करने की कोशिश करते हैं। इससे भी कान में संक्रमण फैल जाता है। संक्रमण होने पर ऐसा लगता है कि कानों से कम सुनाई दे रहा है। पानी या अन्य चीज निगलने पर कान बंद होने जैसा महसूस होता है।
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दर्द और सुनने में कमी की शिकायतें
डॉ. जयवर्धन के मुताबिक शुरुआत में फंगस बाहरी कान (एक्सटर्नल ईयर कैनाल) को प्रभावित करता है। मरीज को कान में खुजली, भारीपन, दर्द और सुनने में कमी की शिकायत होती है। अगर समय पर इलाज न मिले तो यह संक्रमण कान की झिल्ली तक असर डाल सकता है। गंभीर स्थिति में सुनने की क्षमता स्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है।
- ये हैं लक्षण
कान में लगातार खुजली
कान में दर्द या जलन
कान से बदबूदार तरल निकलना
कान में भारीपन महसूस होना
सुनने में कमी महसूस होना
कान की नली में सूजन होना
लालिमा, पपड़ीदार त्वचा हो जाना
- बचाव के उपाय
कान में पानी जाने से बचाएं
भीग जाने पर तुरंत सुखाएं
ईयरफोन का लंबे समय तक इस्तेमाल न करें
खुजली होने पर नुकीली वस्तु न डालें
समस्या होने पर डॉक्टर से परामर्श लें