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Karnal News: दो घंटे में बन गया ड्राइविंग लाइसेंस, छात्राओं के खिल उठे चेहरे
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करनाल। यातायात नियमों का पाठ पढ़ने और फर्स्ट एड के प्रशिक्षण के बाद मात्र दो घंटे में आवेदन प्रक्रिया पूरी होकर हाथ में लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस बनकर आ गया। छात्राओं के चेहरे खुशी से खिल उठे। मौका था जिला प्रशासन के सहयोग से अमर उजाला की ओर लगाए गए लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस शिविर का। बुधवार को रेलवे रोड स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय में शिविर लगाया गया।
कॉलेज में पहली बार लगे इस शिविर में 137 छात्राओं ने लर्निंग डीएल के लिए पंजीकरण कराया। अध्यक्षता कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. विवेक रंगा ने की।
मुख्य अतिथि एसडीएम अनुभव मेहता ने बीए की छात्रा रितिका और आस्था को मौके पर लर्निंग डीएल देकर शिविर की शुरुआत की। शिविर के दौरान छात्राओं को आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के बाद ऑनलाइन हुए स्टॉल टेस्ट में सफलता मिलने पर मौके पर ही लर्निंग डीएल दिया गया। भीड़ ज्यादा होने पर जिन छात्राओं का ऑनलाइन टेस्ट नहीं हो पाया, उनके टेस्ट के लिए एसडीएम ने शनिवार का दिन तय किया। इस दिन कॉलेज में दोबारा शिविर लगाने के अलावा लघु सचिवालय के सरल केंद्र में भी प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।
एनआईसी टीम से आए प्रदीप चौहान ने छात्राओं को बताया कि जिनका लर्निंग डीएल बना है, वे एक माह में वाहन चलाना सीखने के बाद पक्के लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकते हैं। लर्निंग डीएल की पात्रता 6 माह की रहेगी। शिविर में एसडीएम कार्यालय की ओर से एनआईसी से नवीन कुमार, दीपक कक्कड़ और प्रदीप शर्मा ने भी लर्निंग डीएल के लिए आवेदन की प्रक्रिया को पूरा कराया। प्राध्यापिका डॉ. सुशीला, प्रियंका, नीशा, रेणू और नेहा ने व्यवस्था में सहयोग दिया।
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रेडक्रॉस, ट्रैफिक पार्क के विशेषज्ञों ने दिया प्रशिक्षण
लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस के लिए सरकार व जिला प्रशासन की ओर से रेडक्रॉस से फर्स्ट एड और सेक्टर-7 के ट्रैफिक पार्क से यातायात नियमों की क्लास लगाकर प्रमाणपत्र प्राप्त करना अनिवार्य किया गया है। शिविर में रेडक्रॉस के सचिव कुलबीर मलिक के नेतृत्व में ट्रेनर नीना और रीना ने प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया। होंडा के ट्रैफिक पार्क से यातायात विशेषज्ञ रवि ने वीडियो व पीपीटी के माध्यम से यातायात नियमों का जरूरी प्रशिक्षण दिया।
शिविर से लंबी जटिल प्रक्रिया बनी आसान
लर्निंग डीएल के लिए लंबी व जटिल आवेदन प्रक्रिया को अमर उजाला के शिविर के माध्यम से आसान बनाया गया। आवेदन फाइल तैयार करने के लिए ट्रैफिक पार्क और रेडक्रॉस की ट्रेनिंग एक ही जगह हुई। इसके बाद आवेदन की ऑनलाइन प्रक्रिया को भी मौके पर पूरा किया गया। यहीं पर छात्राओं ने अपनी रेडक्रॉस और आवेदन की सरकारी फीस जमा कराई। पात्रता जांचने के लिए ऑनलाइन स्टॉल टेस्ट भी मौके पर लिया गया। जिनकी फीस कटने के बाद की आगामी प्रक्रिया भीड़ ज्यादा होने के कारण जो छात्राएं पूरा नहीं कर पाई, उन्हें अतिरिक्त समय दिया जाएगा।
डीएल जिम्मेदार नागरिक की पहचान : एसडीएम
मुख्य अतिथि एसडीएम अनुभव मेहता ने छात्राओं से कहा कि डीएल केवल कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि लड़कियों की सशक्तिकरण यात्रा का अहम पड़ाव है। आज के समय में लड़कियों का डीएल होना सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि उनकी सुरक्षा, स्वतंत्रता और समाज में बढ़ती भागीदारी का प्रतीक है। ट्रैफिक नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है, क्योंकि अनुशासन ही जिम्मेदार नागरिक की पहचान है। अगर युवतियां ड्राइविंग लाइसेंस बनवा लेती है और ड्राइविंग में सक्षम हो जाती है तो यह उन्हें आत्मनिर्भर बनाएगा। वह कहीं भी आने-जाने के लिए परिजन पर निर्भर नहीं रहेंगी।
यातायात नियमों का पता होना जरूरी : प्रिंसिपल
कॉलेज प्राचार्य डॉ. विवेक रंगा ने ड्राइविंग लाइसेंस के जरूरत और इसके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सड़क पर चलने से पहले यह जरूरी है कि यातायात नियम पता हों और उससे भी ज्यादा जरूरी है कि यह पता हो हादसाग्रस्त की मदद के लिए प्राथमिक उपचार कैसे दिया जाए। लर्निंग डीएल के लिए शिविर की पहल छात्राओं को न केवल समय बचाने में मदद करेगी बल्कि अभिभावकों को भी तसल्ली देगी कि बेटियां सुरक्षित वातावरण में वाहन चलाना सीखें। उन्होंने अमर उजाला और प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आयोजन समाज में लड़कियों की स्वतंत्र सोच और आत्मनिर्भरता को नई दिशा देगा।
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कॉलेज में पहली बार लगे इस शिविर में 137 छात्राओं ने लर्निंग डीएल के लिए पंजीकरण कराया। अध्यक्षता कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. विवेक रंगा ने की।
मुख्य अतिथि एसडीएम अनुभव मेहता ने बीए की छात्रा रितिका और आस्था को मौके पर लर्निंग डीएल देकर शिविर की शुरुआत की। शिविर के दौरान छात्राओं को आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के बाद ऑनलाइन हुए स्टॉल टेस्ट में सफलता मिलने पर मौके पर ही लर्निंग डीएल दिया गया। भीड़ ज्यादा होने पर जिन छात्राओं का ऑनलाइन टेस्ट नहीं हो पाया, उनके टेस्ट के लिए एसडीएम ने शनिवार का दिन तय किया। इस दिन कॉलेज में दोबारा शिविर लगाने के अलावा लघु सचिवालय के सरल केंद्र में भी प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।
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एनआईसी टीम से आए प्रदीप चौहान ने छात्राओं को बताया कि जिनका लर्निंग डीएल बना है, वे एक माह में वाहन चलाना सीखने के बाद पक्के लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकते हैं। लर्निंग डीएल की पात्रता 6 माह की रहेगी। शिविर में एसडीएम कार्यालय की ओर से एनआईसी से नवीन कुमार, दीपक कक्कड़ और प्रदीप शर्मा ने भी लर्निंग डीएल के लिए आवेदन की प्रक्रिया को पूरा कराया। प्राध्यापिका डॉ. सुशीला, प्रियंका, नीशा, रेणू और नेहा ने व्यवस्था में सहयोग दिया।
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रेडक्रॉस, ट्रैफिक पार्क के विशेषज्ञों ने दिया प्रशिक्षण
लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस के लिए सरकार व जिला प्रशासन की ओर से रेडक्रॉस से फर्स्ट एड और सेक्टर-7 के ट्रैफिक पार्क से यातायात नियमों की क्लास लगाकर प्रमाणपत्र प्राप्त करना अनिवार्य किया गया है। शिविर में रेडक्रॉस के सचिव कुलबीर मलिक के नेतृत्व में ट्रेनर नीना और रीना ने प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया। होंडा के ट्रैफिक पार्क से यातायात विशेषज्ञ रवि ने वीडियो व पीपीटी के माध्यम से यातायात नियमों का जरूरी प्रशिक्षण दिया।
शिविर से लंबी जटिल प्रक्रिया बनी आसान
लर्निंग डीएल के लिए लंबी व जटिल आवेदन प्रक्रिया को अमर उजाला के शिविर के माध्यम से आसान बनाया गया। आवेदन फाइल तैयार करने के लिए ट्रैफिक पार्क और रेडक्रॉस की ट्रेनिंग एक ही जगह हुई। इसके बाद आवेदन की ऑनलाइन प्रक्रिया को भी मौके पर पूरा किया गया। यहीं पर छात्राओं ने अपनी रेडक्रॉस और आवेदन की सरकारी फीस जमा कराई। पात्रता जांचने के लिए ऑनलाइन स्टॉल टेस्ट भी मौके पर लिया गया। जिनकी फीस कटने के बाद की आगामी प्रक्रिया भीड़ ज्यादा होने के कारण जो छात्राएं पूरा नहीं कर पाई, उन्हें अतिरिक्त समय दिया जाएगा।
डीएल जिम्मेदार नागरिक की पहचान : एसडीएम
मुख्य अतिथि एसडीएम अनुभव मेहता ने छात्राओं से कहा कि डीएल केवल कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि लड़कियों की सशक्तिकरण यात्रा का अहम पड़ाव है। आज के समय में लड़कियों का डीएल होना सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि उनकी सुरक्षा, स्वतंत्रता और समाज में बढ़ती भागीदारी का प्रतीक है। ट्रैफिक नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है, क्योंकि अनुशासन ही जिम्मेदार नागरिक की पहचान है। अगर युवतियां ड्राइविंग लाइसेंस बनवा लेती है और ड्राइविंग में सक्षम हो जाती है तो यह उन्हें आत्मनिर्भर बनाएगा। वह कहीं भी आने-जाने के लिए परिजन पर निर्भर नहीं रहेंगी।
यातायात नियमों का पता होना जरूरी : प्रिंसिपल
कॉलेज प्राचार्य डॉ. विवेक रंगा ने ड्राइविंग लाइसेंस के जरूरत और इसके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सड़क पर चलने से पहले यह जरूरी है कि यातायात नियम पता हों और उससे भी ज्यादा जरूरी है कि यह पता हो हादसाग्रस्त की मदद के लिए प्राथमिक उपचार कैसे दिया जाए। लर्निंग डीएल के लिए शिविर की पहल छात्राओं को न केवल समय बचाने में मदद करेगी बल्कि अभिभावकों को भी तसल्ली देगी कि बेटियां सुरक्षित वातावरण में वाहन चलाना सीखें। उन्होंने अमर उजाला और प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आयोजन समाज में लड़कियों की स्वतंत्र सोच और आत्मनिर्भरता को नई दिशा देगा।