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Karnal News: 146 लाभार्थियों की डीपीआर, फिर भी प्रमाणपत्र के लिए लगा रहे चक्कर
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करनाल। प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत गरीब परिवारों को अपना घर दिलाने की योजना में कागजी औपचारिकताएं बड़ी बाधा बन रही हैं। लाल डोरा क्षेत्र के पात्र लाभार्थियों को संपत्ति प्रमाणपत्र के लिए नगर निगम के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। योजना के तहत 80 लाभार्थियों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) मुख्यालय से मंजूर हो चुकी है, जबकि 66 लाभार्थियों की डीपीआर मंजूरी के लिए मुख्यालय भेजी गई है। ऐसे में 146 लाभार्थियों की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में है।
वीरवार को नगर निगम कार्यालय में आयोजित विशेष शिविर में 100 से अधिक लोग पहुंचे लेकिन करीब 15 लाभार्थियों को ही मौके पर प्रमाणपत्र मिल सके। बाकी लोगों के दस्तावेजों की जांच के बाद प्रमाणपत्र जारी करने की बात कही गई। सवाल यह है कि आवास का सपना पूरा करने की उम्मीद लेकर पहुंच रहे लोगों को पूरी प्रक्रिया एक ही जगह पर क्यों नहीं निपटाई जा रही।
हालांकि, डीपीआर मंजूर होने और संपत्ति प्रमाणपत्र जारी होने की प्रक्रिया अलग है। शिविर की अध्यक्षता उप निगम आयुक्त विनोद नेहरा ने की। शिविर में लोगों ने संपत्ति से संबंधित दस्तावेज जमा करवाए। अधिकारियों ने पात्र लाभार्थियों के प्रमाणपत्र तैयार कर वितरित किए।
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निगम की ओर से दावा किया गया कि शिविरों का उद्देश्य लोगों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने से बचाना है। मगर जिन आवेदकों के दस्तावेज अधूरे पाए गए, उन्हें जरूरी कागजात पूरे करके दोबारा फाइल जमा करवाने को कहा गया। इससे उन परिवारों की परेशानी बढ़ सकती है, जो पहले ही आवास योजना का लाभ पाने के लिए प्रक्रिया पूरी करने में जुटे हैं।
प्रमाणपत्र के लिए ये दस्तावेज जरूरी
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का मकान कच्चा होना चाहिए। आवेदक ईडब्ल्यूएस श्रेणी में हो और मकान वैध क्षेत्र में स्थित होना जरूरी है। लाल डोरा क्षेत्र के निवासियों को संपत्ति प्रमाणपत्र के साथ मलकियत का सबूत, आधार कार्ड, वोटर कार्ड और बैंक खाते की प्रति सहित आवश्यक दस्तावेज जमा करवाने होंगे। पात्र व्यक्ति ऑनलाइन पोर्टल pmay-urban.gov.in पर भी आवेदन कर सकते हैं।
शिविर में मिले सभी दस्तावेजों की विधिवत जांच होगी। पात्र लाभार्थियों को जल्द प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे। अधूरे दस्तावेज वाले आवेदकों को जरूरी कागजात पूरे करके फाइल जमा करवानी होगी। नागरिक नेहरू पैलेस स्थित नगर निगम कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।
- विनोद नेहरा, उप निगम आयुक्त
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वीरवार को नगर निगम कार्यालय में आयोजित विशेष शिविर में 100 से अधिक लोग पहुंचे लेकिन करीब 15 लाभार्थियों को ही मौके पर प्रमाणपत्र मिल सके। बाकी लोगों के दस्तावेजों की जांच के बाद प्रमाणपत्र जारी करने की बात कही गई। सवाल यह है कि आवास का सपना पूरा करने की उम्मीद लेकर पहुंच रहे लोगों को पूरी प्रक्रिया एक ही जगह पर क्यों नहीं निपटाई जा रही।
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हालांकि, डीपीआर मंजूर होने और संपत्ति प्रमाणपत्र जारी होने की प्रक्रिया अलग है। शिविर की अध्यक्षता उप निगम आयुक्त विनोद नेहरा ने की। शिविर में लोगों ने संपत्ति से संबंधित दस्तावेज जमा करवाए। अधिकारियों ने पात्र लाभार्थियों के प्रमाणपत्र तैयार कर वितरित किए।
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निगम की ओर से दावा किया गया कि शिविरों का उद्देश्य लोगों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने से बचाना है। मगर जिन आवेदकों के दस्तावेज अधूरे पाए गए, उन्हें जरूरी कागजात पूरे करके दोबारा फाइल जमा करवाने को कहा गया। इससे उन परिवारों की परेशानी बढ़ सकती है, जो पहले ही आवास योजना का लाभ पाने के लिए प्रक्रिया पूरी करने में जुटे हैं।
प्रमाणपत्र के लिए ये दस्तावेज जरूरी
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का मकान कच्चा होना चाहिए। आवेदक ईडब्ल्यूएस श्रेणी में हो और मकान वैध क्षेत्र में स्थित होना जरूरी है। लाल डोरा क्षेत्र के निवासियों को संपत्ति प्रमाणपत्र के साथ मलकियत का सबूत, आधार कार्ड, वोटर कार्ड और बैंक खाते की प्रति सहित आवश्यक दस्तावेज जमा करवाने होंगे। पात्र व्यक्ति ऑनलाइन पोर्टल pmay-urban.gov.in पर भी आवेदन कर सकते हैं।
शिविर में मिले सभी दस्तावेजों की विधिवत जांच होगी। पात्र लाभार्थियों को जल्द प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे। अधूरे दस्तावेज वाले आवेदकों को जरूरी कागजात पूरे करके फाइल जमा करवानी होगी। नागरिक नेहरू पैलेस स्थित नगर निगम कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।
- विनोद नेहरा, उप निगम आयुक्त