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कृषि पाठ्यक्रमों में शामिल होंगे जीरो बजट खेती, ऑर्गेनिक फार्मिंग, प्राकृतिक खेती, मूल्य संवर्धन नीतियां
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कैथल। केंद्रीय बजट में कृषि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों को लेकर बड़ी घोषणा की गई है। अब कृषि क्षेत्र में डिग्री या डिप्लोमा करने वाले विद्यार्थी अन्य पाठ्यक्रम के साथ जीरो बजट खेती, प्राकृतिक खेती, ऑर्गेनिक खेती सहित मूल्य संवर्धन नीतियों का भी अध्ययन करेंगे। सरकार ने इसकी घोषणा की है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब इन नीतियों के पाठ्यक्रम में शामिल होने के लिए इन पर रिसर्च होगा जिनके अच्छे परिणाम मिलने पर यह पाठ्यक्रम में शामिल हुए तो किसानों को लाभ मिलेगा।
अब तक कुछ विशेषज्ञ जीरो-बजट खेती पर सवाल उठा रहे थे। हालांकि कई विशेषज्ञ प्राकृतिक खेती को अच्छा बताते थे लेकिन अब ये सभी विषय कृषि पाठ्यक्रमों में शामिल होंगे। बजट में कहा गया है कि राज्यों को केंद्र की ओर से कहा जाएगा कि वे अपने कृषि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में ऐसे संशोधन कर सकते हैं जिनसे प्राकृतिक, जीरो बजट और ऑर्गेनिक फार्मिंग, आधुनिक कृषि, मूल्य संवर्धन और प्रबंधन की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
प्राकृतिक खेती को लेकर कुछ किसानों ने देशभर में उत्कृष्ट उदहारण प्रस्तुत किए हैं। कैथल से कृषि वैज्ञानिक ईश्वर कुंडू ने कमाल कलैंप सहित कई ऐसे उत्पाद तैयार किए हैं, जो रसायनमुक्त हैं। इसी प्रकार डॉ. संजीव कुमारी ने कई तरह के अर्क से खाद व दवाएं तैयार की हैं। कई किसान कैथल में ऑर्गेनिक खेती करके कृषि को जहर मुक्त करने का काम कर रहे हैं।
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अब यदि विश्वविद्यालयों में इस विषय पर मंथन होगा तो निश्चित तौर पर खेती को जहरमुक्त करने में मदद मिलेगी। खेती में लगातार प्रयोग किए जा रहे जहरीले रसायनों को प्रयोग कम होगा और नए पाठ्यक्रम को पढ़कर निकलने वाले विद्यार्थी किसानों को प्रोत्साहित करेंगे।
कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. रमेश वर्मा ने कहा कि अब तक जीरो बजट खेती, प्राकृतिक खेती या अन्य नए कॉसेप्ट पाठ्यक्रम में नहीं हैं। यदि सरकार इन नए विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करती है तो निश्चित तौर पर इन पर मंथन होगा। रिसर्च होगा। रिसर्च में यदि किसानों और आम जन के हित में कुछ बातें सामने आएंगी तो किसानों को तो लाभ होगा ही साथ ही आम जन को भी लाभ होगा। पाठ्यक्रम को अपडेट करने का सरकार का यह फैसला सराहनीय है।
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अब तक कुछ विशेषज्ञ जीरो-बजट खेती पर सवाल उठा रहे थे। हालांकि कई विशेषज्ञ प्राकृतिक खेती को अच्छा बताते थे लेकिन अब ये सभी विषय कृषि पाठ्यक्रमों में शामिल होंगे। बजट में कहा गया है कि राज्यों को केंद्र की ओर से कहा जाएगा कि वे अपने कृषि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में ऐसे संशोधन कर सकते हैं जिनसे प्राकृतिक, जीरो बजट और ऑर्गेनिक फार्मिंग, आधुनिक कृषि, मूल्य संवर्धन और प्रबंधन की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
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प्राकृतिक खेती को लेकर कुछ किसानों ने देशभर में उत्कृष्ट उदहारण प्रस्तुत किए हैं। कैथल से कृषि वैज्ञानिक ईश्वर कुंडू ने कमाल कलैंप सहित कई ऐसे उत्पाद तैयार किए हैं, जो रसायनमुक्त हैं। इसी प्रकार डॉ. संजीव कुमारी ने कई तरह के अर्क से खाद व दवाएं तैयार की हैं। कई किसान कैथल में ऑर्गेनिक खेती करके कृषि को जहर मुक्त करने का काम कर रहे हैं।
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अब यदि विश्वविद्यालयों में इस विषय पर मंथन होगा तो निश्चित तौर पर खेती को जहरमुक्त करने में मदद मिलेगी। खेती में लगातार प्रयोग किए जा रहे जहरीले रसायनों को प्रयोग कम होगा और नए पाठ्यक्रम को पढ़कर निकलने वाले विद्यार्थी किसानों को प्रोत्साहित करेंगे।
कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. रमेश वर्मा ने कहा कि अब तक जीरो बजट खेती, प्राकृतिक खेती या अन्य नए कॉसेप्ट पाठ्यक्रम में नहीं हैं। यदि सरकार इन नए विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करती है तो निश्चित तौर पर इन पर मंथन होगा। रिसर्च होगा। रिसर्च में यदि किसानों और आम जन के हित में कुछ बातें सामने आएंगी तो किसानों को तो लाभ होगा ही साथ ही आम जन को भी लाभ होगा। पाठ्यक्रम को अपडेट करने का सरकार का यह फैसला सराहनीय है।