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Kaithal News: तुमसे नजरें मिलाई, दिलो दीवार महकते हैं...
Mon, 11 Sep 2023 02:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 11 Sep 2023 02:46 AM IST
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कैथल। आरकेएसडी कॉलेज में रविवार को साहित्य सभा की काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में रणधीर सिंह धीर की पुस्तक चालदा चक्कर, उपेन्द्र गर्ग के कविता संग्रह गठरियां का लोकार्पण भी किया गया। गोष्ठी का आगाज दिलबाग अकेला की कविता सच्चाई का अभाव से हुआ। इसके बाद गांव पाई से पधारे युवा कवि विनोद ने कहा ‘तुमसे नजरें मिलाई, दिलो दीवार महकते हैं ’रचना प्रस्तुत कर समां बांध दिया।
वहीं श्याम सुंदर गौड़ ने ‘नहीं भूलूंगा भारत को’। दिनेश बंसल ने ‘कदम पे राही ठहरते जाते हैं, उन्हीं के ख्वाब सफर में बिखर जाते हैं’ और बलवान कुंडू ने ‘पानी सा बहते जाना अपनी राह बनाते जाना’ डॉ. विकास आनंद ने ‘दंगों में न हिंदू न मुसलमान मरते हैं दंगों में तो केवल इंसान मरते हैं’, महेन्द्र सिंह शर्मा ने ‘हे धरा जगतात्री धन्य तेरे उपकार’ कविता से अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। युवा कवि राजेश भारती काकौत ने ‘आज मैं मां से लिपट कर रोऊंगा, और उसकी गोद में सोऊंगा चैन की नींद’, अशोक अत्री ने ‘सच कहना आसान नहीं है, सत्ताधीशों का सम्मान नहीं है’, नौच के युवा राजेश ‘भारत ने तिरंगा चांद पर लहराया मान भारत का’ कविता सुनाकर खूब प्रशंसा बटोरी।
उपेन्द्र गर्ग ने कहा करे ‘इंसान कर्म खूबसूरत, वही खूबसूरत वही खूबसूरत’। कमलेश शर्मा ने ‘सत्ता के गलियारों से उठते विषैले धुएं’ पर शानदार कविता सुनाई। गोष्ठी में विनोद टीक, टीसी अग्रवाल, सतपाल आंनद, डॉ. हरीश झंडई, मधु गोयल, अनिल गर्ग धनौरी, अनिल कौशिक, स्वामी कृष्णानंद, कमल डीग, रजनीश शर्मा, अश्वनी शांडिल्य, बलवान कुंडू सावी, सुरेंद्र कंवल, रविंद्र मित्तल, सोहन लाल, चतुर्भुज बंसल, रामफल गौड ने भी रचनाओं के माध्यम से अपने विचार रखे। काव्य गोष्ठी के अंत में अध्यक्ष अमृतलाल मदान ने राधा-कृष्ण के पावन प्रेम पर मुक्तक सुनाकर गोष्ठी का समापन किया। गोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. अमृतलाल मदान ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में नरेश चौधरी जींद से व उपेन्द्र गर्ग नरवाना से उपस्थित रहे। संचालन रिसाल जांगड़ा का रहा।
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वहीं श्याम सुंदर गौड़ ने ‘नहीं भूलूंगा भारत को’। दिनेश बंसल ने ‘कदम पे राही ठहरते जाते हैं, उन्हीं के ख्वाब सफर में बिखर जाते हैं’ और बलवान कुंडू ने ‘पानी सा बहते जाना अपनी राह बनाते जाना’ डॉ. विकास आनंद ने ‘दंगों में न हिंदू न मुसलमान मरते हैं दंगों में तो केवल इंसान मरते हैं’, महेन्द्र सिंह शर्मा ने ‘हे धरा जगतात्री धन्य तेरे उपकार’ कविता से अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। युवा कवि राजेश भारती काकौत ने ‘आज मैं मां से लिपट कर रोऊंगा, और उसकी गोद में सोऊंगा चैन की नींद’, अशोक अत्री ने ‘सच कहना आसान नहीं है, सत्ताधीशों का सम्मान नहीं है’, नौच के युवा राजेश ‘भारत ने तिरंगा चांद पर लहराया मान भारत का’ कविता सुनाकर खूब प्रशंसा बटोरी।
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उपेन्द्र गर्ग ने कहा करे ‘इंसान कर्म खूबसूरत, वही खूबसूरत वही खूबसूरत’। कमलेश शर्मा ने ‘सत्ता के गलियारों से उठते विषैले धुएं’ पर शानदार कविता सुनाई। गोष्ठी में विनोद टीक, टीसी अग्रवाल, सतपाल आंनद, डॉ. हरीश झंडई, मधु गोयल, अनिल गर्ग धनौरी, अनिल कौशिक, स्वामी कृष्णानंद, कमल डीग, रजनीश शर्मा, अश्वनी शांडिल्य, बलवान कुंडू सावी, सुरेंद्र कंवल, रविंद्र मित्तल, सोहन लाल, चतुर्भुज बंसल, रामफल गौड ने भी रचनाओं के माध्यम से अपने विचार रखे। काव्य गोष्ठी के अंत में अध्यक्ष अमृतलाल मदान ने राधा-कृष्ण के पावन प्रेम पर मुक्तक सुनाकर गोष्ठी का समापन किया। गोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. अमृतलाल मदान ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में नरेश चौधरी जींद से व उपेन्द्र गर्ग नरवाना से उपस्थित रहे। संचालन रिसाल जांगड़ा का रहा।
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