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Kaithal News: वेतन न मिलने की समस्या पर डीसी से मिलने पहुंचे ग्रामीण
Wed, 08 Jan 2025 01:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 08 Jan 2025 01:12 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। देबवन गांव के ग्रामीणों ने विधवा महिला को पिछले चार साल से वेतन न मिलने की समस्या को लेकर मंगलवार को डीसी प्रीति से मुलाकात करने के लिए पहुंचे।
ग्रामीणों ने बताया कि कुछ साल पहले महिला के पति की मृत्यु हो गई थी, जिसके स्थान पर महिला को ट्यूबवैल ऑपरेटर रखा गया था, लेकिन पिछले चार साल से उक्त महिला को कोई वेतन नहीं दिया गया। जिस समय ग्रामीण डीसी से मिलने पहुंचे उस समय डीसी प्रीति लोकसभा सांसद नवीन जिंदल के साथ बैठक में मौजूद थी।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2020 में महिला के पति, जो ट्यूबवैल ऑपरेटर के पद पर तैनात थे कि मौत हो जाने के बाद मृतक की पत्नी के कागज विभाग को दिए गये थे। विभाग ने महिला के पति का खाता बंद करके नया खाता भी खोला था, लेकिन वेतन नहीं दिया गया।
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जिस जगह महिला नौकरी करती है वो जमीन भी जन स्वास्थ्य विभाग को महिला के परिवार ने ही मुफ्त में दी हुई है। महिला के परिजनों ने जमीन के रुपयों की बजाय नौकरी की मांग की थी जिसे विभाग ने मंजूर कर लिया था। इस मामले को लेकर वे पूर्व मंत्री कमलेश ढांडा समेत विभाग के आला अधिकारियों से भी मिल चुके है, लेकिन किसी ने भी उनकी समस्या का हल नहीं किया।
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कैथल। देबवन गांव के ग्रामीणों ने विधवा महिला को पिछले चार साल से वेतन न मिलने की समस्या को लेकर मंगलवार को डीसी प्रीति से मुलाकात करने के लिए पहुंचे।
ग्रामीणों ने बताया कि कुछ साल पहले महिला के पति की मृत्यु हो गई थी, जिसके स्थान पर महिला को ट्यूबवैल ऑपरेटर रखा गया था, लेकिन पिछले चार साल से उक्त महिला को कोई वेतन नहीं दिया गया। जिस समय ग्रामीण डीसी से मिलने पहुंचे उस समय डीसी प्रीति लोकसभा सांसद नवीन जिंदल के साथ बैठक में मौजूद थी।
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ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2020 में महिला के पति, जो ट्यूबवैल ऑपरेटर के पद पर तैनात थे कि मौत हो जाने के बाद मृतक की पत्नी के कागज विभाग को दिए गये थे। विभाग ने महिला के पति का खाता बंद करके नया खाता भी खोला था, लेकिन वेतन नहीं दिया गया।
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जिस जगह महिला नौकरी करती है वो जमीन भी जन स्वास्थ्य विभाग को महिला के परिवार ने ही मुफ्त में दी हुई है। महिला के परिजनों ने जमीन के रुपयों की बजाय नौकरी की मांग की थी जिसे विभाग ने मंजूर कर लिया था। इस मामले को लेकर वे पूर्व मंत्री कमलेश ढांडा समेत विभाग के आला अधिकारियों से भी मिल चुके है, लेकिन किसी ने भी उनकी समस्या का हल नहीं किया।