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25 वर्ष पुरानी 33 केवी लाइन के भरोसे चल रहा है गांव फरल का बिजली घर
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33 केवी बिजली घर फरल पर क्षमता से अधिक लोड होने व पूंडरी से फरल तक लगभग 10 किलोमीटर तक की 33 केवी लाइन लगभग 25 वर्ष पुरानी होने से बिजली घर रामभरोसे चल रहा है। धेरडू सहित कई गांवों को फरल बिजली घर से जोडऩे के कारण फरल वासियों को इस भीषण गर्मी में जगमग योजना के बावजूद बिजली के अघोषित कटों का सामना करना पड़ रहा है। लगभग 25 वर्ष बाद भाजपा सरकार व कार्यकारी अभियंता सोमबीर सिंह व निगम की पूरी टीम के प्रयासों के चलते मार्च 2021 में गांव 24 घंटे जगमग योजना में शामिल हुआ। अब ग्रामीणों को तो अच्छी बिजली मिल रही है लेकिन खेतों में किसानों को पूरी बिजली नहीं मिल पाती। जिसका मुख्य
जानकारी के अनुसार वर्ष 1995 में जब से बिजली घर बना है तब से लगभग 25 वर्ष पुरानी बिजली की 33 केवी लाइन को बदला नहीं गया है। इसका नुकसान यह होता है कि जब भी थोड़ा सा लोड बढ़ जाता है तो 33 केवी की लाइन पुरानी होने के कारण गर्म होकर टूट जाती है या आपस में रगड़ लग कर फाल्ट कर देती हैं। ग्रामीणों की यह बात समझ से परे है कि इतने वर्षों के बाद भी 33 केवी की इस लाइन को बदला क्यों नहीं गया। जब कि फरल बिजली घर में म्योली, खेड़ी मटरवा, रावणहेड़ा, जीतगढ़, घेरडृ, फरल व चुहड़माजरा का भी किस्सा है।
गांव फरल 33 केवी बिजली घर को पूंडरी 132 केवी से हटा कर ढांड 132 केवी से जोड़ा जाए। ग्रामीणों का कहना है कि फरल से पूंडरी 10 किलोमीटर और ढांड बिजली घर 4 किलोमीटर है। इसलिए फरल बिजली घर को ढांड से जोडऩे की मांग की। इसके साथ धेरडू, जीतगढ़ व चुहड़माजरा को अलग करने की मांग की। ग्रामीणों राकेश, प्रवीन, विनोद, रवि, मोनू, विक्की, कुलविंद्र, विक्की ने बताया कि ओवरलोड होने के कारण ही पूंडरी 132 केवी से फरल फीडर की बिजली के कट लगाए जाते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग है करते हुए कहा कि गांव धेरडू, जीतगढ़ व खनौदा गांव के कुछ ट्रांसफार्मर फरल बिजली घर से काट कर गांव कौल, टीक व चुहड माजरा से जोड़ा जाए। गांव जीतगढ़ से खनौदा के बहुत से कनेक्शन फरल बिजली घर से जुड़े हुए हैं।
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अधीक्षक अभियंता बीएस रंगा ने बताया कि गांव में बिजली के कटों के लगने के कारण पता करवाया जाएगा। ग्रामीणों की समस्या को दुरुस्त करवाया जाएगा।
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जानकारी के अनुसार वर्ष 1995 में जब से बिजली घर बना है तब से लगभग 25 वर्ष पुरानी बिजली की 33 केवी लाइन को बदला नहीं गया है। इसका नुकसान यह होता है कि जब भी थोड़ा सा लोड बढ़ जाता है तो 33 केवी की लाइन पुरानी होने के कारण गर्म होकर टूट जाती है या आपस में रगड़ लग कर फाल्ट कर देती हैं। ग्रामीणों की यह बात समझ से परे है कि इतने वर्षों के बाद भी 33 केवी की इस लाइन को बदला क्यों नहीं गया। जब कि फरल बिजली घर में म्योली, खेड़ी मटरवा, रावणहेड़ा, जीतगढ़, घेरडृ, फरल व चुहड़माजरा का भी किस्सा है।
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गांव फरल 33 केवी बिजली घर को पूंडरी 132 केवी से हटा कर ढांड 132 केवी से जोड़ा जाए। ग्रामीणों का कहना है कि फरल से पूंडरी 10 किलोमीटर और ढांड बिजली घर 4 किलोमीटर है। इसलिए फरल बिजली घर को ढांड से जोडऩे की मांग की। इसके साथ धेरडू, जीतगढ़ व चुहड़माजरा को अलग करने की मांग की। ग्रामीणों राकेश, प्रवीन, विनोद, रवि, मोनू, विक्की, कुलविंद्र, विक्की ने बताया कि ओवरलोड होने के कारण ही पूंडरी 132 केवी से फरल फीडर की बिजली के कट लगाए जाते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग है करते हुए कहा कि गांव धेरडू, जीतगढ़ व खनौदा गांव के कुछ ट्रांसफार्मर फरल बिजली घर से काट कर गांव कौल, टीक व चुहड माजरा से जोड़ा जाए। गांव जीतगढ़ से खनौदा के बहुत से कनेक्शन फरल बिजली घर से जुड़े हुए हैं।
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अधीक्षक अभियंता बीएस रंगा ने बताया कि गांव में बिजली के कटों के लगने के कारण पता करवाया जाएगा। ग्रामीणों की समस्या को दुरुस्त करवाया जाएगा।