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Kaithal News: दो पुलिसकर्मी लाइन हाजिर लेकिन रिपोर्ट में नाम नहीं

Fri, 11 Jul 2025 12:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Fri, 11 Jul 2025 12:59 AM IST
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Two policemen were on line duty but their names were not mentioned in the report
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। सीवन थाना क्षेत्र में महिला ममता से कथित थर्ड डिग्री टॉर्चर के मामले में हरियाणा राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने वीरवार को लघु सचिवालय सभागार में खुली सुनवाई करते हुए पुलिस कार्रवाई पर तीखी नाराजगी जताई। सफाई देते हुए एसपी ने बताया कि दो पुलिसकर्मी लाइन हाजिर किए गए हैं जबकि तीसरा होमगार्ड है। उस पर भी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि इनके नाम एफआईआर में नहीं हैं।

आयोग ने पुलिस प्रशासन को तलब कर संबंधित अधिकारियों से मामले की धीमी जांच, एफआईआर में नाम न दर्शाने, और थाना स्तर पर अनियमितताओं को लेकर कई गंभीर सवाल किए। आयोग के अध्यक्ष रविंद्र बाल्याना ने करनाल स्थित एडीजीपी कार्यालय से फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट और पीड़िता ममता की विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक से तलब की है।
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आयोग ने पीड़िता की चिकित्सकीय स्थिति की निष्पक्ष जांच के लिए पीजीआई रोहतक के वरिष्ठ डॉक्टर की अध्यक्षता में मेडिकल बोर्ड गठित करने की सिफारिश भी की है।
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एसपी आस्था मोदी ने बताया कि पूछताछ के दिन थाने में एसआई हरप्रीत कौर, एसपीओ देवेंद्र और होमगार्ड जगदीश मौजूद थे। इनमें से दो पुलिसकर्मियों को लाइनहाजिर कर दिया गया है, जबकि होमगार्ड पर कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को पत्र लिखा गया है। आयोग ने सवाल उठाया कि एफआईआर में इन्हें नामजद क्यों नहीं किया गया।

थाना प्रभारी की भूमिका पर भी सवाल ः आयोग ने पूछताछ के दौरान थाना प्रभारी की अनुपस्थिति और केस को गुमशुदगी से अपहरण में बदलने पर भी पुलिस से जवाब मांगा। एसपी ने बताया कि पूछताछ के दौरान थाना प्रभारी व डीएसपी बैठक में थे, जबकि गुमशुदगी की एफआईआर के आधार पर ही धारा जोड़ी गई थी।

एससी/एसटी एक्ट की धाराएं जोड़ने और मेडिकल बोर्ड बनाने के निर्देश ः आयोग ने पुलिस को निर्देश दिए हैं कि एफआईआर में एससी/एसटी एक्ट की धाराएं जोड़ी जाएं और सभी संदेहास्पद अधिकारियों को जांच में शामिल किया जाए। आयोग ने कहा कि यदि संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो मामला राज्य सरकार और राष्ट्रीय आयोग तक पहुंचाया जाएगा।

कथित टॉर्चर, पूछताछ का तरीका और नोटिस प्रक्रिया पर सवाल

आयोग ने पूछा कि ममता को थाने में कितने घंटे रखा गया, पूछताछ के लिए नोटिस क्यों नहीं दिया गया, और सीसीटीवी फुटेज जांच में क्यों देरी हुई। एसपी ने बताया कि पूछताछ के दो दिन बाद बयान दर्ज हुए, चंडीगढ़ से मेडिकल बोर्ड के लिए पत्र भेजा गया है, और सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है।


पृष्ठभूमि

यह मामला 26 जून को एक किशोरी की गुमशुदगी को लेकर दर्ज केस से जुड़ा है, जिसमें महिला ममता पर किशोरी को भगाने का आरोप लगाया गया। 29 जून को पूछताछ के लिए थाने बुलाने के बाद ममता ने आरोप लगाया कि थाने में उससे मारपीट की गई, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। मामला सामने आने के बाद तीन अज्ञात पुलिसकर्मियों पर सामान्य मारपीट की धाराओं में केस दर्ज किया गया, लेकिन आयोग ने इसे अपर्याप्त मानते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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