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परमात्मा को पाने के लिए सच्चा प्रेम जरूरी : आचार्य कृष्णानंद

Fri, 20 Jun 2025 01:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Fri, 20 Jun 2025 01:15 AM IST
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True love is necessary to attain God: Acharya Krishnananda
संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत। श्री ग्यारह रुद्री मंदिर में जारी श्रीमद्भागवत सप्ताह की कथा के पांचवें दिन कथा व्यास आचार्य कृष्णानंद महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सच्चा धन वही है जो तन, मन और धन से सेवा व भक्ति में लगे। परमात्मा की प्राप्ति केवल निष्कलंक प्रेम के माध्यम से ही संभव है।

पूतना चरित्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि राक्षसी पूतना बालकृष्ण को उठा कर स्तनपान कराने लगी। परंतु बालकृष्ण ने स्तनपान करते-करते ही उसका वध कर उसका उद्धार कर दिया। इसके उपरांत माता यशोदा ने बालकृष्ण को पूतना के वक्ष से उठाकर पंचगव्य—गोबर, गोमूत्र आदि से स्नान कराया।
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आचार्य ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को गौ सेवा, गायत्री मंत्र का जाप और श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ अवश्य करना चाहिए। गोसेवा से 33 करोड़ देवी-देवताओं की सेवा भी हो जाती है। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा व्रज की रज का सेवन यह दर्शाता है कि जिन भक्तों ने अपने समस्त कर्म और भावनाएं भगवान को समर्पित कर दी हैं, वे उन्हें कितने प्रिय हैं।
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गिरिराज महात्म्य की कथा सुनाते हुए आचार्य ने कहा कि जब ब्रजवासियों ने इंद्र की पूजा त्याग कर गिरिराज की पूजा प्रारंभ की, तो इंद्र ने क्रोधित होकर मूसलाधार वर्षा कर दी। तब श्रीकृष्ण ने गिरिराज पर्वत को अपनी कनिष्ठा अंगुली पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की और इंद्र के अहंकार का विनाश किया। इससे इंद्र को भगवान की सत्ता का बोध हुआ और उन्होंने भगवान से क्षमा याचना की। इंद्र ने कहा, “हे प्रभु! मैं यह भूल गया था कि मेरे पास जो कुछ भी है, वह सब आपका ही दिया हुआ है।”


आचार्य कृष्णानंद ने आज की युवा पीढ़ी से अपील करते हुए कहा कि यदि वे अपने धर्म और भगवान को जानना चाहते हैं, तो गीता, भागवत और रामायण जैसे ग्रंथों का अध्ययन करें। कथा के दौरान “राधे कृष्ण गोविंद गोपाल राधे-राधे” जैसे भजनों पर भक्तगण भावविभोर होकर झूम उठे। कथा के अंत में भंडारे का प्रसाद वितरण किया गया।
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