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Kaithal News: गेहूं में खुला कंडवा की रोकथाम के लिए बीज को गर्म पानी में रखें

Sat, 30 Nov 2024 12:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sat, 30 Nov 2024 12:36 AM IST
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To prevent open blight in wheat, keep the seeds in hot water.
संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के क्षेत्रीय एकीकृत नाशिजीव प्रबंधन केंद्र फरीदाबाद द्वारा उपमंडल के गांव बात्ता में बीजोपचार एवं कीटनाशकों के सुरक्षित प्रयोग पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को जानकारी दी गई कि गेहूं में खुला कंडवा (लूज स्मट) की रोकथाम के लिए बीज को गर्म पानी में 10 मिनट के लिए उपचारित करते हैं।

सेमिनार में डॉ. सूरज बरनवाल ने बीजोपचार के उद्देश्य एवं लाभ तथा बीजोपचार से फसलों में विभिन्न प्रकार के रोगों से बचाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बीज उपचार वह प्रक्रिया है जिसमें बीज को बीज से होने वाले मिट्टी रोगों तथा कीटों से बचाने के लिए भौतिक, रसायनिक, बायो एजेंट की एक निश्चित मात्रा से बीज शोधन किया जाता है।
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बीजों में किसी उपयुक्त रसायनिक या जैव अभिकर्ता की निश्चित मात्रा को इस प्रकार मिलाते हैं कि जिससे बीजों के बाहर रसायन या जैव रसायन की एक सुरक्षात्मक परत बन जाए जो बीज को बीज या मिट्टी के रोग कारकों से बचा सके। उन्होंने बताया की गेहूं के लूज स्मट रोग पर काबू पाने के लिए बीजों को चार घंटे तक ठंडे पानी मेें भिगोते हैं जिससे कि रोगाणु रोग के प्रति अधिक असहिष्णु हो जाते हैं। फिर बीज को 49-56 डिग्री सेंटीग्रेड गर्म पानी में बीज के अनुसार अलग-अलग समय के लिए डाल देते हैं। फिर बीज को सुखा कर बुवाई करते हैं।
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उन्होंने बताया कि सौर उपचार से बीजोपचार किया जाता है। उन्होंने बताया की बीजोपचार के लिए अधिकतर दवाएं पाउडर के रूप में मिलती हैं। 2-2.5 ग्राम दवा प्रति किलो बीज के हिसाब से दवा व बीज को किसी पीपे, डब्बे, मटके अथवा ड्रम में डालकर अच्छी तरह हिलाएं ताकि दवा की हल्की परत बीज की सतह पर अच्छी तरह छा जाये। इस विधि से बीज की सतह पर लगे व बीज के आवरणों में छिपे रोगजनक नष्ट हो जाते हैं।

इसके अलावा राइजोबियम कल्चर से भी बीजों का उपचार किया जा सकता है। इस विधि में एक लीटर पानी में 250 ग्राम गुड़ डालकर गर्म कर घोल बनाएं व ठंंडा होने पर इसमें 600 ग्राम राइजोबियम कल्चर डालें। इसे धीरे-धीरे लकड़ी के डंडे से हिलाते रहें। इस घोल को बीज पर इस ढंग से छिड़कें कि इसकी परत बीजों पर समान रूप से चढ़ जाए।

उन्होंने बताया कि अब इन बीजों को छाया में सुखाना चाहिये। इस प्रकार उपचारित राईजोबियम कल्चर युक्त बीजों से दलहनी फसल को 20-25 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर तक नाइट्रोजन की आवश्यकता की पूर्ति हो जाती है। इसके अलावा पीएसबी कल्चर से भी बीज का उपचार किया जा सकता है।


सहायक निदेशक डा. सुनील चंद्र ने मंत्रालय के द्वारा लांच एनपीएसएस ऐप द्वारा किसान अपनी फसल में लगने वाले कीट एवं रोग की पहचान किस प्रकार से करें, जानकारी दी। इस मौके पर असिस्टेंट टेक्नोलॉजी मैनेजर रमेश समध्यान, प्रगतिशील किसान जॉनी राणा, मोनू राणा, नरेश राणा, सुशील कुमार, राम जीत मौर्य, केपी शर्मा उपस्थित रहे।
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