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Kaithal News: कपिल मुनि धाम में प्राचीन शिव मंदिर का कायाकल्प पूर्ण
Tue, 19 Aug 2025 01:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 19 Aug 2025 01:14 AM IST
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22 कलायत के प्राचीन कपिल मुनि धाम आंगन में दोबारा से विकसित शिव मंदिर को दिखाते पुजारी अनिरूद्ध
संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। श्री कपिल मुनि धाम प्रांगण में स्थित खंडित प्राचीन शिव मंदिर का कायाकल्प कार्य पूर्ण हो गया है। यह मंदिर क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का प्रतीक रहा है, जिसे अब पुनः उसी गरिमा के साथ स्थापित किया गया है।
मंदिर पुजारी संजय शास्त्री और अनिरुद्ध गौतम ने बताया कि यह शिव मंदिर सदियों पुराना है और मान्यता है कि मुगल शासक औरंगजेब के काल में इस पर आक्रमण कर इसे खंडित कर दिया गया था। मंदिर का बड़ा हिस्सा कपिल मुनि सरोवर में ढहा दिया गया था। बाद में खोदाई के दौरान मिले अवशेषों को संजोया गया, लेकिन श्रद्धालुओं की कसक हमेशा रही कि मंदिर को उसके मूल स्वरूप में पुनः स्थापित किया जाए।
श्रद्धालुओं ने चंदा एकत्र कर मंदिर के कायाकल्प का कार्य आरंभ किया, जो अब पूर्ण हो चुका है। हाल ही में शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा वैदिक मंत्रोच्चारण और हवन-पाठ के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और शिव जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।
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पार्षद जगदीश रायका ने कहा कि भले ही पुनर्निर्माण में समय लगा हो, लेकिन स्थानीय जनता की आस्था कभी कमजोर नहीं पड़ी। जन सहयोग और भक्ति भावना के चलते यह कार्य संभव हो सका। पुजारी अनिरुद्ध गौतम ने बताया कि शिव मंदिर का कायाकल्प केवल मंदिर निर्माण नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने का प्रयास है। मंदिर को पारंपरिक स्थापत्य शैली में बनाया गया है, ताकि उसकी ऐतिहासिक पहचान बनी रहे और नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ सके।
अब मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना के साथ-साथ सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। पार्षद कुमारी रेणू धानियां, उषा रानी, सचिन राणा, प्रीत जगदेव, प्रदीप राणा, महीपाल पंवार, संजय सिंगला, विनोद जेष्ठ, अमित बैद, रवींद्र निर्मल बंटी व अन्य पार्षदों ने कहा कि सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण से कलायत की विशेष पहचान बनी हुई है। इसी सोच के तहत वर्षों से खंडित पड़े शिव मंदिर के कायाकल्प का कार्य अब पूर्ण किया गया है।
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कलायत। श्री कपिल मुनि धाम प्रांगण में स्थित खंडित प्राचीन शिव मंदिर का कायाकल्प कार्य पूर्ण हो गया है। यह मंदिर क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का प्रतीक रहा है, जिसे अब पुनः उसी गरिमा के साथ स्थापित किया गया है।
मंदिर पुजारी संजय शास्त्री और अनिरुद्ध गौतम ने बताया कि यह शिव मंदिर सदियों पुराना है और मान्यता है कि मुगल शासक औरंगजेब के काल में इस पर आक्रमण कर इसे खंडित कर दिया गया था। मंदिर का बड़ा हिस्सा कपिल मुनि सरोवर में ढहा दिया गया था। बाद में खोदाई के दौरान मिले अवशेषों को संजोया गया, लेकिन श्रद्धालुओं की कसक हमेशा रही कि मंदिर को उसके मूल स्वरूप में पुनः स्थापित किया जाए।
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श्रद्धालुओं ने चंदा एकत्र कर मंदिर के कायाकल्प का कार्य आरंभ किया, जो अब पूर्ण हो चुका है। हाल ही में शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा वैदिक मंत्रोच्चारण और हवन-पाठ के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और शिव जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।
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पार्षद जगदीश रायका ने कहा कि भले ही पुनर्निर्माण में समय लगा हो, लेकिन स्थानीय जनता की आस्था कभी कमजोर नहीं पड़ी। जन सहयोग और भक्ति भावना के चलते यह कार्य संभव हो सका। पुजारी अनिरुद्ध गौतम ने बताया कि शिव मंदिर का कायाकल्प केवल मंदिर निर्माण नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने का प्रयास है। मंदिर को पारंपरिक स्थापत्य शैली में बनाया गया है, ताकि उसकी ऐतिहासिक पहचान बनी रहे और नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ सके।
अब मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना के साथ-साथ सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। पार्षद कुमारी रेणू धानियां, उषा रानी, सचिन राणा, प्रीत जगदेव, प्रदीप राणा, महीपाल पंवार, संजय सिंगला, विनोद जेष्ठ, अमित बैद, रवींद्र निर्मल बंटी व अन्य पार्षदों ने कहा कि सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण से कलायत की विशेष पहचान बनी हुई है। इसी सोच के तहत वर्षों से खंडित पड़े शिव मंदिर के कायाकल्प का कार्य अब पूर्ण किया गया है।