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Kaithal News: दिल में छेद वाले बच्चों की संख्या बढ़ी
Sun, 16 Nov 2025 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 16 Nov 2025 01:05 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। राज्य में दिल में छेद (कंजेनिटल हार्ट डिफेक्ट) के साथ जन्म लेने वाले नवजातों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कैथल में भी यह समस्या गंभीर होती जा रही है। जिला स्वास्थ्य कार्यक्रम की रिपोर्ट के अनुसार, 1 अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024 तक 41 मामले सामने आए, जबकि 1 अप्रैल 2024 से सितंबर 2024 तक ही 48 नए केस दर्ज किए जा चुके हैं।
स्वास्थ्य विभाग के क्षेत्रीय आंकड़ों से पता चला है कि जींद, कैथल, अंबाला और यमुनानगर में इस समस्या के सबसे अधिक मामले सामने आ रहे हैं। पिछले ढाई साल में इन चार जिलों में कुल 410 बच्चे दिल में छेद के साथ पैदा हुए हैं। काउंसलिंग में सामने आया है कि करीब 45 फीसदी मामलों में मां ने गर्भावस्था के दौरान बीपी और शुगर की नियमित दवाइयां ली थीं, जिनके कारण भ्रूण पर असर पड़ने की आशंका प्रबल हो जाती है।राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्म दोष, रोग, कमियां और विकास में देरी जैसी समस्याओं की पहचान कर उनका निःशुल्क उपचार किया जाता है। इसी तरह राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) के माध्यम से 10–19 वर्ष के किशोरों में पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, हिंसा, चोट और नशे की आदतों जैसी चुनौतियों पर कार्य किया जाता है। जिले में इन योजनाओं के लिए हमारी 11 टीमें कार्यरत हैं। प्रत्येक टीम में एक पुरुष व एक महिला चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट और एक एएनएम शामिल है। -डॉ. विकास धवन, डिप्टी सिविल सर्जन, कैथल
दिल में छेद लेकर पैदा होने वाले बच्चों के जिलेवार आंकड़े
जिला
संख्या
कैथल
48
यमुनानगर
51
अंबाला
67
जींद
70
(अप्रैल 2024 से 30 सितंबर 2025 तक के आंकड़े)
मरीज का अनुभव : गर्भावस्था की दवाइयों ने बढ़ाया खतरा
जिला नागरिक अस्पताल पहुंचे जनकपुरी कॉलोनी निवासी राजीव शर्मा ने बताया कि उनका 6 साल का बेटा अक्सर सांस लेने में परेशानी महसूस करता था और जल्दी थक जाता था। जांच के बाद पता चला कि बच्चे के दिल में छेद है। राजीव के अनुसार, उनकी पत्नी ने गर्भ के दौरान बीपी और शुगर की दवाइयां नियमित रूप से ली थीं। डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि इसका सीधा असर गर्भस्थ शिशु पर पड़ा है और बच्चा जन्म से दिल में छेद की समस्या लेकर पैदा हुआ।
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कैथल। राज्य में दिल में छेद (कंजेनिटल हार्ट डिफेक्ट) के साथ जन्म लेने वाले नवजातों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कैथल में भी यह समस्या गंभीर होती जा रही है। जिला स्वास्थ्य कार्यक्रम की रिपोर्ट के अनुसार, 1 अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024 तक 41 मामले सामने आए, जबकि 1 अप्रैल 2024 से सितंबर 2024 तक ही 48 नए केस दर्ज किए जा चुके हैं।
स्वास्थ्य विभाग के क्षेत्रीय आंकड़ों से पता चला है कि जींद, कैथल, अंबाला और यमुनानगर में इस समस्या के सबसे अधिक मामले सामने आ रहे हैं। पिछले ढाई साल में इन चार जिलों में कुल 410 बच्चे दिल में छेद के साथ पैदा हुए हैं। काउंसलिंग में सामने आया है कि करीब 45 फीसदी मामलों में मां ने गर्भावस्था के दौरान बीपी और शुगर की नियमित दवाइयां ली थीं, जिनके कारण भ्रूण पर असर पड़ने की आशंका प्रबल हो जाती है।राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्म दोष, रोग, कमियां और विकास में देरी जैसी समस्याओं की पहचान कर उनका निःशुल्क उपचार किया जाता है। इसी तरह राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) के माध्यम से 10–19 वर्ष के किशोरों में पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, हिंसा, चोट और नशे की आदतों जैसी चुनौतियों पर कार्य किया जाता है। जिले में इन योजनाओं के लिए हमारी 11 टीमें कार्यरत हैं। प्रत्येक टीम में एक पुरुष व एक महिला चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट और एक एएनएम शामिल है। -डॉ. विकास धवन, डिप्टी सिविल सर्जन, कैथल
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दिल में छेद लेकर पैदा होने वाले बच्चों के जिलेवार आंकड़े
जिला
संख्या
कैथल
48
यमुनानगर
51
अंबाला
67
जींद
70
(अप्रैल 2024 से 30 सितंबर 2025 तक के आंकड़े)
मरीज का अनुभव : गर्भावस्था की दवाइयों ने बढ़ाया खतरा
जिला नागरिक अस्पताल पहुंचे जनकपुरी कॉलोनी निवासी राजीव शर्मा ने बताया कि उनका 6 साल का बेटा अक्सर सांस लेने में परेशानी महसूस करता था और जल्दी थक जाता था। जांच के बाद पता चला कि बच्चे के दिल में छेद है। राजीव के अनुसार, उनकी पत्नी ने गर्भ के दौरान बीपी और शुगर की दवाइयां नियमित रूप से ली थीं। डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि इसका सीधा असर गर्भस्थ शिशु पर पड़ा है और बच्चा जन्म से दिल में छेद की समस्या लेकर पैदा हुआ।
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